Swami Avimukteshwaranand Saraswati Controversy: इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले शंकराचार्य का बड़ा बयान, कहा- मैं तो तैयार हूं...
Swami Avimukteshwaranand Saraswati News: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके वकील अदालत में उपस्थित हैं और सभी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को कहा कि उनके खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में यदि सच्चाई का पता लगाने के लिए नार्को टेस्ट जरूरी हो तो वह इसके लिए तैयार हैं.
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'यदि नार्को टेस्ट से सच्चाई सामने आ सकती है तो यह अवश्य किया जाना चाहिए. सच उजागर करने के लिए जो भी तरीके उपलब्ध हैं, उन्हें अपनाया जाना चाहिए.'
नार्को टेस्ट एक वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया है, जिसमें किसी संदिग्ध को ‘सोडियम पेंटोथल’ जैसी दवा दी जाती है. इसके असर से वह पूरी तरह होश में नहीं रहता, लेकिन सवालों के जवाब दे सकता है जिससे उसके सच बोलने की संभावना बढ़ जाती है. यह टेस्ट अदालत की अनुमति और व्यक्ति की सहमति के बाद विशेषज्ञों की निगरानी में ही होता है.
संत की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को अपराह्न करीब पौने चार बजे इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई हो सकती है. उनके शिष्य संजय पांडे ने बताया कि स्वामी अपनी नियमित धार्मिक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं और उन्होंने प्रतिदिन की तरह पूजा-अर्चना की. मठ में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी मौजूद थे.
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके वकील अदालत में उपस्थित हैं और सभी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे.
उन्होंने कहा, 'झूठ अधिक समय तक नहीं टिकता. जिन्होंने झूठी कहानी गढ़ी है, वे बेनकाब हो रहे हैं. जैसे-जैसे लोगों को इस मनगढ़ंत मामले की जानकारी होगी, सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी.'
मेडिकल जांच रिपोर्ट से जुड़े दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, 'एक मेडिकल रिपोर्ट हमारी संलिप्तता कैसे साबित कर सकती है? कहा जा रहा है कि रिपोर्ट से दुराचार सिद्ध हुआ है. यह किसी का कथन हो सकता है, लेकिन इतने दिनों बाद की गई मेडिकल जांच का क्या महत्व है?'
उसे हमारे नाम से जोड़ना आसान नहीं - शंकराचार्य
उन्होंने कहा कि यदि कोई गलत घटना हुई भी हो, तो इससे स्वतः यह सिद्ध नहीं होता कि उसके लिए कौन जिम्मेदार है. उन्होंने कहा, 'जो बच्चा कभी हमारे पास आया ही नहीं, उसे हमारे नाम से जोड़ना आसान नहीं है.'
अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि बच्चे शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ पांडे के साथ रह रहे थे और सवाल उठाया कि उन्हें किशोर गृह क्यों नहीं भेजा गया.
उन्होंने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए दावा किया कि बच्चों को हरदोई के एक होटल में रखा गया था और उन्हें पत्रकारों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई.
'सच्चाई अंततः सामने आएगी'
उन्होंने पुलिस पर शिकायतकर्ता को संरक्षण देने और उनके खिलाफ बयान तैयार कराने का आरोप लगाया. अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'कहानी कितनी भी मनगढ़ंत क्यों न हो, सच्चाई अंततः सामने आएगी.'
इससे पहले बृहस्पतिवार को स्वामी ने पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज मामले को 'झूठा' बताते हुए आरोप लगाया था कि यह उन्हें बदनाम करने और दुनिया भर में चर्चित ‘‘एप्स्टीन फाइल्स' से ध्यान भटकाने का प्रयास है.
उन्होंने कहा कि ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य के रूप में जिस संस्था का वह प्रतिनिधित्व करते हैं, उसकी गरिमा की रक्षा के लिए उन्होंने अग्रिम जमानत हेतु उच्च न्यायालय का रुख किया है.
उन्होंने यह भी कहा कि न तो उनका और न ही उनके गुरुकुल का शिकायतकर्ताओं से कोई संबंध है.
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Source: IOCL
























