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JNUSU Polls 2025: लेफ्ट यूनिटी पैनल ने उतारे उम्मीदवार, कहा- छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता

Delhi news: जेएनयू छात्रसंघ चुनाव से पहले लेफ्ट यूनिटी पैनल ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है. पैनल ने छात्रों के अधिकार, लोकतंत्र और निजीकरण के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (JNUSU) चुनावों से पहले लेफ्ट यूनिटी पैनल (AISA–SFI–DSF) ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इस मौके पर पैनल ने कहा कि पिछले सत्र में लेफ्ट नेतृत्व वाली छात्रसंघ ने प्रशासनिक दमन के बावजूद छात्रों के अधिकारों की रक्षा में उल्लेखनीय काम किया. मई 2025 में बनी नीतिश कुमार की टीम ने अपने छोटे कार्यकाल में कई बड़े संघर्षों के जरिए प्रशासन को पीछे हटने पर मजबूर किया था.

 लेफ्ट यूनिटी पैनल ने कहा कि नीतिश कुमार (अध्यक्ष), मनीषा (उपाध्यक्ष) और मुन्तेहा फातिमा (महासचिव) के नेतृत्व में पिछले सत्र की छात्रसंघ ने यह साबित किया कि जब छात्र एकजुट होते हैं, तो प्रशासन को झुकना पड़ता है. छात्रावास निष्कासन, छात्रवृत्ति में कटौती और फीस वृद्धि जैसे मुद्दों पर उस टीम ने लगातार संघर्ष कर छात्रों के हितों को आगे रखा. वहीं दूसरी ओर एबीवीपी से संयुक्त सचिव पद पर चुने गए प्रतिनिधि का इस पूरे कार्यकाल में लगभग न के बराबर योगदान रहा.

हॉस्टल, स्कॉलरशिप और फीस विवादों में वाम संगठनों की भूमिका

जून 2025 में प्रशासन ने अंतिम वर्ष के पीएचडी छात्रों को हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया था, जिससे छात्रों में गुस्सा फैल गया. वामपंथी छात्रसंघ ने इसका कड़ा विरोध करते हुए 16 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की. अंततः प्रशासन को आदेश वापस लेना पड़ा. यह कदम वाम संगठनों की एकजुटता और छात्रों के संघर्ष की बड़ी जीत माना गया.

Merit-cum-Means (MCM) स्कॉलरशिप को घटाने की कोशिश में प्रशासन ने एक गुप्त रैशनलाइजेशन कमेटी बनाई थी. लेफ्ट छात्रसंघ ने इस फैसले का जमकर विरोध किया और छात्रों के दबाव में प्रशासन को कमेटी भंग करनी पड़ी. इस निर्णय से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बड़ी राहत मिली. वहीं, एबीवीपी से जुड़े प्रतिनिधि इस संघर्ष से दूर रहकर निजी कंपनी ‘Rapido’ के साथ भागीदारी करते नजर आए, जिससे छात्रों के सस्ते परिवहन विकल्प प्रभावित हुए.

सितंबर में इंटर-हॉल एडमिनिस्ट्रेशन (IHA) ने हॉस्टल फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था. वाम नेतृत्व की सक्रियता के चलते यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका. छात्रसंघ ने इसे एक और छात्र विरोधी नीति बताते हुए कहा कि फीस वृद्धि से गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों की पहुंच उच्च शिक्षा तक सीमित हो जाती.

जेएनयूईई बहाली और नई टीम की घोषणा

प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर वाम छात्रसंघ ने जेएनयू एंट्रेंस एग्ज़ाम (JNUEE) की बहाली को लेकर भी मोर्चा खोला. 16 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान प्रशासन को मजबूर होकर यूजीसी-नेट 2025 के आवेदकों को पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल करना पड़ा. वहीं, एबीवीपी के संयुक्त सचिव ने इस मुद्दे पर भी प्रशासन का ही पक्ष लिया. इस संघर्ष को छात्रों ने शैक्षणिक लोकतंत्र की जीत बताया.

लेफ्ट यूनिटी पैनल ने आगामी सत्र (2025–26) के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए कहा कि यह टीम विरोध, बहस और लोकतंत्र की परंपरा को आगे बढ़ाएगी.
 अध्यक्ष पद: अदिति मिश्रा (PhD, CCPPT, SIS)
 उपाध्यक्ष पद: किझाकूट गोपिका बाबू (PhD, CSLG, SSS)
 महासचिव पद: सुनील यादव (PhD, CSA, SIS)
संयुक्त सचिव पद: दानिश अली (PhD, CHS, SSS)

 निजीकरण और भगवाकरण के खिलाफ जारी रहेगा संघर्ष

पैनल ने कहा कि उनका लक्ष्य जेएनयू को ऐसी जगह बनाए रखना है जहां हर छात्र को समान अवसर मिले. वे निजीकरण और भगवाकरण के हर प्रयास का विरोध करेंगे. उनका कहना है कि जेएनयू की असली पहचान इसकी बहस, विविधता और आलोचनात्मक सोच में है, जिसे वे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देंगे.

लेफ्ट यूनिटी पैनल ने कहा कि पिछले सत्र की छात्रसंघ ने यह साबित कर दिया कि छात्रसंघ केवल प्रतिनिधि निकाय नहीं, बल्कि आंदोलन की आत्मा है. उन्होंने आरोप लगाया कि एबीवीपी ने छात्रों के हितों से मुंह मोड़ लिया, लेकिन जेएनयू की छात्र बिरादरी ने हमेशा लोकतांत्रिक एकजुटता का रास्ता चुना.

अभिषेक नयन का पत्रकारिता में लंबा अनुभव है. साल 2011 से ABP News से जुड़े हैं. दिल्ली-NCR की राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक समस्याओं की जमीनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करते हैं.

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