क्या JNU में छात्राओं के खिलाफ बढ़ रहे हैं यौन अपराध के मामले, क्या कहती है RTI रिपोर्ट?
JNU Sexual Harassment Case: जेएनयू में पहले भी यौन उत्पीड़न के केस सामने आए हैं. साल 2013 और 2015 के बीच दिल्ली के सभी शिक्षण संस्थानों में से सबसे ज्यादा केस जेएनयू में दर्ज किए गए थे.

Delhi News: राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जेएनयू (JNU) यौन उत्पीड़न के मामलों से अछूती नहीं है. यहां 2017 से लेकर अब तक 151 यौन उत्पीड़न के केस दर्ज किए गए हैं. आरटीआई दाखिल कर मांगी गई जानकारी से यह डेटा सामने आया है. यूनिवर्सिटी का दावा है कि इसने करीब 98 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा कर दिया था और केवल तीन केस की ही जांच चल रही. आरटीआई में पूछा गया कि किस तरह की शिकायत की गई थी तो इस पर यूनिवर्सिटी ने गोपनीयता का हवाला देकर जानकारी शेयर नहीं की.
2017 में जेंडर सेंसेटाइजेशन कमिटी अगेंस्ट (GSCASH) की जगह जेएनयू के इंटरनल कम्प्लेंट्स कमिटी बनाई गई थी. GSCASH हटाना विवाद का विषय बना हुआ है क्योंकि स्टूडेंट्स और टीचर्स एसोसिएशन से इसे वापस लाए जाने की मांग कर रहे हैं. एसोसिएशन का कहना है कि ICC में पारदर्शिता और स्वायतत्ता की कमी है जो कि GSCASH के पास थी. यह प्रशासनिक प्रभाव में काम कर रहा है. इसलिए इसपर भरोसा करना मुश्किल है.
कोरोना काल में घटा मामला
आरटीआई से पता चलता है कि 2018-19 में सबसे ज्यादा 63 शिकायतें मिली थीं. ICC के गठन से पहले 2016 में 38 केस आए थे. कोविड-19 के दौरान इसमें गिरावट आई है. 2019 से 2021 के बीच केवल छह शिकायतें ही मिलीं. ऐसा संभवत: कैम्पस गतिविधियां कम होने के कारण हुई थीं.
बीते कुछ वर्षों का आंकड़ा
हालांकि इसके बाद के वर्षों में इसमें फिर तेजी देखी गई है. 2022-23 और 2023-24 में 30-30 मामले सामने आए. 2017-18 में 17 केस दर्ज किए गए थे. 2018-19 में 63, 2019-20 में पांच, 2020-21 में एक और 2021-22 में पांच केस दर्ज किए गए थे. 2015 में दिल्ली महिला आयोग ने बताया था कि राजधानी के सभी शिक्षण संस्थानों में सबसे अधिक यौन उत्पीड़न के केस जेएनयू से आए हैं. 2013 से 2015 के बीच 51 केस दर्ज किए गए थे. दिल्ली के शिक्षण संस्थानों में दर्ज केस का यह 50 प्रतिशत था.
फ्रेशर्स पार्टी में हुआ था यौन उत्पीड़न?
हाल के समय में कई मामलों को लेकर जेएनयू जांच के दायरे में है. अप्रैल में सेकेंड ईयर की छात्रा 12 दिनों के अनशन पर बैठ गई थी. उसने यूनिवर्सिटी के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था और कहा था कि इस मामले में कार्रवाई नहीं हो रही है. बाद में छात्रा और उसके समर्थकों पर ही यूनिवर्सिटी ने प्रदर्शन करने को लेकर दंड लगा दिया था. अक्टूबर में 47 छात्राओं ने आईसीसी के पास शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने फ्रेशर्स पार्टी के दौरान यौन उत्पीड़न होने और हिंसा के आरोप लगाए थे.
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Source: IOCL


























