Delhi: फीस मनमानी पर अभिभावकों का फूटा गुस्सा, 'बच्चों को बैठने तक नहीं दिया जा रहा'
DPS School Fees: DPS द्वारका की फीस वृद्धि को लेकर अभिभावकों में गहरा आक्रोश है. स्कूल प्रशासन बढ़ी हुई फीस न भरने पर बच्चों को क्लास से बाहर कर लाइब्रेरी में 'अरेस्ट' कर रहा है.

DPS School Fees News Update: दिल्ली के नामी स्कूल DPS द्वारका पर एक बार फिर अभिभावकों का नाराजगी जताई है. शिक्षा मंत्री आशीष सूद (Ashish Sood) ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर पहली बार डीएम के नेतृत्व में स्कूल की जांच की जा रही है. पिछले 5 सालों से लगातार स्कूल ने फीस बढ़ाई है. हालांकि, तमाम सरकारी निर्देशों के बावजूद स्कूल प्रबंधन अपनी मनमानी पर अड़ा हुआ है. अभिभावकों का आरोप है कि जब तक वे बढ़ी हुई फीस नहीं भरते, तब तक उनके बच्चों को क्लास में बैठने तक नहीं दिया जा रहा है. कई बच्चों को लाइब्रेरी में बैठाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है.
अभिभावकों की पीड़ा और गुस्सा
पीड़ित मां बाप अपने बच्चों के हक के लिए स्कूल प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं लेकिन स्कूल प्रशासन के काम पर जूं तक नहीं रेंगता है. एबीपी ने अभिभावकों से बातचीत की जिसमें एक अभिभावक चंदन कुमार कहते हैं, “कोरोनाकाल से ही स्कूल फीस में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है. हम DOE द्वारा तय फीस देने को तैयार हैं, फिर भी बच्चों को परेशान किया जा रहा है.” वहीं मुकेश का कहना है, “DM की रेड के बावजूद स्कूल बच्चों को टेस्ट तक नहीं देने दे रहा. उन्हें लाइब्रेरी में बिठा दिया जाता है.”
एक अन्य अभिभावक ने बताया, “पहले 93,400 थी फीस, अब 1,90,000 हो गई है.” शिल्पी कहती हैं, “मेरे बच्चे पढ़ने नहीं, लाइब्रेरी में 'अरेस्ट' होने जाते हैं. बात करने की भी इजाज़त नहीं होती. व्हाट्सएप ग्रुप से भी निकाल दिया गया है.” शेफाली विश्वास की बेटी 10वीं में है, लेकिन उसे क्लास में बैठने नहीं दिया जा रहा. “बच्चों को पढ़ाया नहीं जा रहा, परीक्षा की तैयारी नहीं करवाई जा रही.”
अशीष गुप्ता ने बताया कि उन्होंने TC मांगी लेकिन स्कूल देने को तैयार नहीं. वहीं दिव्या मट्टी का कहना है, “बच्चे को क्लास से निकाल कर 7 घंटे लाइब्रेरी में बैठाया गया, बैग तक बाहर रखवा लिया गया.”
सरकारी आदेशों की अनदेखी
दिल्ली सरकार के DOE ने 22 मई 2024 को स्कूल की धांधली पर 26 पेज की रिपोर्ट जारी की थी. रिपोर्ट में बताया गया कि DPS द्वारका ने बिना अनुमति फीस बढ़ाई, जबकि स्कूल डीडीए की जमीन पर बना है और उसे DOE के नियमों का पालन करना ज़रूरी है.
2022-23 की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार स्कूल के डेवलेपमेंट फंड में 25 करोड़ से ज्यादा जमा है, जिसमें 19 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में हैं. यह राशि सालाना कलेक्शन से आठ गुना ज्यादा है. इसके अलावा 12.75 करोड़ रुपये की एनुअल फीस अतिरिक्त रूप से वसूली गई है.
DOE ने साफ निर्देश दिया था कि 2023-24 सत्र में कोई भी फीस नहीं बढ़ाई जाएगी और अगर पहले से बढ़ाई गई है, तो वह राशि या तो लौटाई जाए या एडजस्ट की जाए. लेकिन स्कूल ने आदेशों की अवहेलना करते हुए अभिभावकों पर दबाव बनाया.
अब सवाल ये है कि क्या दिल्ली सरकार इन आदेशों का पालन करवाएगी? क्या बच्चों को मानसिक उत्पीड़न से राहत मिलेगी? और सबसे ज़रूरी – क्या शिक्षा अब एक व्यापार बन चुकी है? अभिभावक अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार सख्त कार्रवाई करे और उनके बच्चों के अधिकारों की रक्षा हो. DPS द्वारका की ये कहानी दिल्ली के उन सैकड़ों स्कूलों का आइना है, जहां शिक्षा के नाम पर शोषण हो रहा है.
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Source: IOCL





















