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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बजट में कटौती, कांग्रेस का हल्ला बोल, सरकार के सामने रखे कई सवाल
Delhi: दिल्ली सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बजट में कटौती की गयी है. अब इस मुद्दे पर कांग्रेस दिल्ली बीजेपी सरकार पर हमलावार है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा की सरकार अपने वादे को पूरा नहीं कर रही.

दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव
Source : अभिषेक नयन
केन्द्रीय बजट में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित राशि में कटौती को लेकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मोदी सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि बजट में की गई यह कटौती न सिर्फ सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करती है, बल्कि दिल्लीवासियों को जहरीली हवा से राहत देने के दावों की पोल भी खोलती है.
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि केन्द्रीय बजट में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित राशि में 209 करोड़ रुपये की कटौती भाजपा की मोदी सरकार की उदासीनता को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि देश भर के लिए पिछले वर्ष 1300 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे इस वर्ष घटाकर 1091 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह फैसला प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करने वाला है.
दिल्ली को राहत नहीं देना चाहती सरकार
देवेन्द्र यादव ने आरोप लगाया कि राजधानी दिल्ली में पहले ही प्रदूषण नियंत्रण में नाकाम रही रेखा गुप्ता सरकार के बाद अब केन्द्र सरकार भी दिल्लीवासियों को राहत देने के मूड में नहीं दिख रही है. उन्होंने कहा कि जहरीली और दमघोंटू हवा से जूझ रही दिल्ली के लिए सीएक्यूएम को केवल 35.26 करोड़ रुपये आवंटित करना बेहद नाकाफी है, जबकि दिल्ली विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शीर्ष पर है.
पूरे जनवरी में नहीं सुधरी हवा की गुणवत्ता
उन्होंने कहा कि भारी बारिश और तेज हवाओं के बावजूद पूरे जनवरी महीने में दिल्ली का एक्यूआई एक भी दिन 100 से नीचे नहीं गया. यह राजधानी की खराब हवा की भयावह स्थिति को साफ तौर पर दर्शाता है. इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के बजट में कटौती और इस पर दिल्ली की मुख्यमंत्री की चुप्पी दिल्लीवासियों के साथ विश्वासघात है.
चुनावी वादों के उलट हालात
देवेन्द्र यादव ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने प्रदूषण को जड़ से खत्म करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. पिछले एक वर्ष में दिल्ली की हवा हर दिन और अधिक जहरीली होती गई है और राजधानी धीरे-धीरे गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी है.
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण के कारण देश और दिल्ली में हर साल लाखों लोगों की मौत होती है, इसके बावजूद सरकार प्रदूषण नियंत्रण को लेकर गंभीर नहीं है. बजट में कटौती से सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है, क्योंकि प्रदूषण के मुख्य स्रोतों को नियंत्रित करना सरकार की प्राथमिकताओं में कभी शामिल नहीं रहा.
बजट कटौती का वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों पर पड़ेगा असर
देवेन्द्र यादव ने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत देश के 82 प्रदूषित शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों पर बजट कटौती का सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि रेखा सरकार ने दिल्ली में अब तक कोई नई और ठोस कार्ययोजना लागू नहीं की है और केवल पिछली आम आदमी पार्टी सरकार की नीतियों का अनुसरण कर रही है.
उन्होंने कहा कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संसदीय पैनल को केवल चिंता जताने के बजाय एक ठोस योजना बनाकर लोगों को प्रदूषण से राहत दिलाने की दिशा में काम करना चाहिए. देवेन्द्र यादव ने बताया कि बजट में कटौती का एक बड़ा कारण फंड का सही उपयोग न होना है. वर्ष 2024-25 में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित 858 करोड़ रुपये में से 31 जनवरी 2025 तक एक प्रतिशत से भी कम, यानी सिर्फ 7.22 करोड़ रुपये खर्च होना केन्द्र सरकार की प्रशासनिक गैर जिम्मेदारी को उजागर करता है.
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