दिल्ली में अटल कैंटीन मॉडल में होगा बड़ा बदलाव, टाइमिंग से लेकर फ्री भोजन तक पर मंथन
Delhi Atal Canteen: सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि सिस्टम को भी अपडेट करने की तैयारी है. टोकन सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली फेस रिकग्निशन तकनीक के डेटा को अब सीमित अवधि तक ही सुरक्षित रखा जाएगा.

- कैंटीन में भोजन मुफ्त करने पर सरकार कर रही है विचार.
दिल्ली में शहरी गरीबों, मजदूरों औ अन्य वंचित लोगों के लिए जो अटल कैंटीन खोली गई थी, उसमें बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है. इस बदलाव से फोकस केवल भोजन उपलब्ध कराने पर नहीं, बल्कि इसे लोगों की दिनचर्या के अनुरूप और ज्यादा उपयोगी बनाने पर है. इसी कड़ी में सरकार टाइमिंग, तकनीक और लागत जैसे कई पहलुओं पर एक साथ काम कर रही है. झुग्गी बस्तियों और दिहाड़ी मजदूरों से मिले फीडबैक ने साफ कर दिया कि मौजूदा समय-सारिणी उनके काम के घंटों से टकरा रही है.
कई लोग काम के कारण समय पर नहीं पहुंच पाते, जिससे उन्हें योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाता. इसी वजह से अब भोजन वितरण को पहले शुरू करने और देर तक जारी रखने की रणनीति बनाई गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें. इसके तहत सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 6 बजे से रात 9:30 बजे तक भोजन वितरण की योजना है, जबकि वर्तमान में 11:30 से दोपहर 2 बजे तक और शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक भोजन का वितरण किया जाता है.
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प्रस्तावित बदलाव से बढ़ेगी पहुंच, सरकार की मंजूरी बाकी
नई व्यवस्था के तहत सुबह का भोजन पहले शुरू होगा और रात का समय बढ़ाया जाएगा. इसके लिए दिल्ली अर्बन इंप्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) ने सरकार से औपचारिक मंजूरी मांगी है. इससे उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है जो सुबह जल्दी काम पर निकल जाते हैं या देर शाम लौटते हैं. फिलहाल यह प्रस्ताव मंजूरी के चरण में है और हरी झंडी मिलते ही इसे लागू किया जा सकता है.
सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि सिस्टम को भी अपडेट करने की तैयारी है. टोकन सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली फेस रिकग्निशन तकनीक के डेटा को अब सीमित अवधि तक ही सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है. यह कदम डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है.
लक्ष्य बड़ा, लेकिन जमीनी हकीकत अलग
योजना के तहत हर कैंटीन में 500 थाली भोजन देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वास्तविकता में यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है. कई जगहों पर तय संख्या से कम लोगों को ही भोजन मिल रहा है. इसकी एक बड़ी वजह समय का असंगत होना माना जा रहा है, जिसे अब सुधारने की कोशिश हो रही है. सरकार अब इस योजना को और आगे ले जाने की दिशा में भी सोच रही है. चर्चा इस बात पर हो रही है कि क्या अटल कैंटीन में भोजन पूरी तरह मुफ्त किया जा सकता है.
इसके लिए एक ऐसा मॉडल तैयार करने पर विचार है, जिसमें वेंडरों को बुनियादी सुविधाएं बिना लागत के दी जाएं और बदले में वे लोगों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराएं. अगर ये सभी बदलाव लागू होते हैं, तो अटल कैंटीन सिर्फ एक भोजन योजना नहीं, बल्कि शहरी गरीबों के लिए एक मजबूत सहारा बन सकती है.
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