दिल्ली में यमुना के उफान से निपटने की तैयारी, राजधानी में बनेगी 4.72 किमी लंबी सुरक्षा दीवार
Delhi Yamuna Flood Protection Wall: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऐलान किया कि मजनू का टीला से ओल्ड रेलवे ब्रिज तक करीब 4.72 किलोमीटर लंबी दीवार बनाई जाएगी, यह परियोजना बजट का हिस्सा है.

- दिल्ली में यमुना बाढ़ से निपटने को सुरक्षा दीवार बनेगी.
- 2027 तक दीवार बनकर मजनूं का टीला तक पहुंचेगी.
- दीवार से रिहायशी इलाकों को बाढ़ से मिलेगी राहत.
- विशेषज्ञों ने नदी प्रवाह बाधित होने पर चिंता जताई.
दिल्ली में हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले इलाकों को राहत देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. यमुना के बढ़ते जलस्तर से बचाव के लिए राजधानी में एक लंबी सुरक्षा दीवार बनाने की योजना को मंजूरी मिल गई है, जिसे 2027 के मॉनसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऐलान किया कि मजनूं का टीला से ओल्ड रेलवे ब्रिज तक करीब 4.72 किलोमीटर लंबी दीवार बनाई जाएगी.
यह परियोजना बजट का हिस्सा है और इसे बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यह दीवार यमुना के पानी को रिहायशी इलाकों में घुसने से रोकेगी. खासतौर पर सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनूं का टीला जैसे इलाकों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है, जहां हर साल बाढ़ का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलता है.
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हर साल बढ़ता खतरा, रिकॉर्ड तोड़ चुका है जलस्तर
दिल्ली में बाढ़ का खतरा हर साल बढ़ता जा रहा है. 2023 में यमुना का जलस्तर 208.66 मीटर तक पहुंच गया था, जो अब तक का रिकॉर्ड है. वहीं, 2025 में भी नदी खतरे के निशान से ऊपर बहते हुए 207.48 मीटर तक पहुंच गई थी, जिससे कई इलाके पानी में डूब गए थे. इस परियोजना की नींव अगस्त 2024 में तैयार संयुक्त बाढ़ समिति की रिपोर्ट पर रखी गई थी. विशेषज्ञों द्वारा किए गए हाइड्रोलिक मॉडलिंग और डेटा विश्लेषण के बाद इस दीवार को दीर्घकालिक समाधान के रूप में सुझाया गया था.
मुख्यमंत्री रेखा का कहना है कि मौजूदा तटबंध भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. नई दीवार न सिर्फ बाढ़ के पानी को रोकने में मदद करेगी, बल्कि नदी किनारे कटाव को भी कम करेगी और गंदगी फेंकने पर रोक लगाने में सहायक होगी.
विशेषज्ञों ने उठाए गंभीर सवाल
हालांकि, इस योजना से सभी विशेषज्ञ सहमत नहीं हैं. पर्यावरण से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसी संरचनाएं नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं और बाढ़ के खतरे को दूसरे इलाकों में बढ़ा सकती हैं. वरिष्ठ पर्यावरण विशेषज्ञ वेरहेन खन्ना ने एबीपी लाइव को जानकारी देते हुए बताया कि यमुना के किनारे पहले से ही फ्लड प्लेंस बने हुए है, जो नेचर ने ही बनाये है. जब ज़्यादा पानी आता है तो वह फ्लड प्लेंस सारा पानी खींच लेता है. लोग उन्हीं फ्लड प्लेन्स में कंस्ट्रक्शन करने लगे जिस वजह से वहां उन्हें यह दिक्कत आने लगी. दीवार बनाकर कुछ समय के लिए ही इसे रोका जा सकता है, लेकिन यह कोई परमानेंट उपाय नहीं है. जब भी हम नेचर के विरुद्ध जाने की कोशिश करते है तो हर लड़ाई में नेचर की ही जीत होती है.
विशेषज्ञ खन्ना ने आगे बताया कि इन फ्लड प्लेन्स का भी अपना काम होता है अगर हम पानी का रास्ता ही बंद कर देंगे कि पानी फ्लड प्लेंस तक आए ही नहीं और ज़्यादा दिक्कत बढ़ सकती है. अगर हम ज़्यादा छेड़छाड़ करेंगे नेचर के साथ तो हमारा ही नुकसान होगा और हमारे देश में कंस्ट्रक्शन का हाल भी काफी बुरा है. कई बार बिना उद्धघाटन हुए ही नए ब्रिज टूट जाते हैं. हमें प्रकृति से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए.
विशेषज्ञों का सुझाव है कि बाढ़ से निपटने के लिए प्राकृतिक तरीकों को अपनाना ज्यादा कारगर होगा. नदी के आसपास के प्राकृतिक बफर जोन को बढ़ाना और उसके प्रवाह को समझकर योजना बनाना ही लंबे समय में सुरक्षित और टिकाऊ समाधान साबित हो सकता है.
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Source: IOCL

























