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दिल्ली प्रदूषण: सख्ती के बीच ड्यूटी से टाइम निकालकर PUC सेंटर पहुंच रहे लोग, सामने आ रहीं दिक्कतें

Delhi Air Pollution: राजधानी के पेट्रोल पंपों पर बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के किसी भी वाहन को ईंधन नहीं दिया जा रहा है. इसकी वजह से कई लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के फ्यूल न देने का फैसला लिया गया. इस सख्ती के बीच लोग ड्यूटी से समय निकालकर PUC सेंटर पहुंच रहे हैं. इस बीच लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई केंद्रों पर सर्वर डाउन से लंबी कतार दिख रही हैं.

दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया है. अब राजधानी के पेट्रोल पंपों पर बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के किसी भी वाहन को ईंधन नहीं दिया जा रहा है. सरकार की इस सख्ती के बाद बड़ी संख्या में लोग प्रदूषण जांच केंद्रों पर पहुंच रहे हैं और अपनी गाड़ियों की जांच करवा रहे हैं.

पेट्रोल पंप पर कैसे पकड़ी जा रही है बिना PUC वाली गाड़ी?

पेट्रोल पंपों पर अब एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. जैसे ही कोई गाड़ी पंप पर पहुंचती है, उसका नंबर स्कैन किया जाता है. यदि सिस्टम में उस गाड़ी का PUC सर्टिफिकेट एक्सपायर पाया जाता है, तो तुरंत announcement की जाती है कि संबंधित गाड़ी के पास वैध सर्टिफिकेट नहीं है. ऐसी स्थिति में स्पष्ट कर दिया जाता है कि जब तक PUC सर्टिफिकेट नहीं बनवाया जाएगा, तब तक ईंधन नहीं मिलेगा. 

ड्यूटी के बीच ब्रेक लेकर PUC बनवाने पहुंचे लोग

एबीपी न्यूज ने ऐसे कई लोगों से बात की जो अपनी ड्यूटी के बीच में समय निकालकर प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवाने पहुंचे. इस दौरान इम्पीरियल होटल के कर्मचारी मंसूर अहमद खान ने बताया कि मेरा पॉल्यूशन सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया था. अब पेट्रोल नहीं मिल रहा, इसलिए बनवाना पड़ रहा है. लंच टाइम में समय निकालकर आया हूं.

वहीं विजय पाल कहते हैं कि मैं भी ड्यूटी के बीच से ही प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र लेने आया हूं. एक महिला वाहन चालक ने बताया कि बीच ड्यूटी से पॉल्यूशन सर्टिफिकेट लेने के लिए आना पड़ा. इस बीच पत्रकार शंकर चक्रवर्ती बताते हैं कि मेरी गाड़ी की PUC एक्सपायर होने की घोषणा हो रही थी. मुझे नए नियम की जानकारी नहीं थी. मैं अपनी गलती मानता हूं कि सर्टिफिकेट नहीं लिया, लेकिन यह नियम बहुत जरूरी है.

PUC एक्सपायर अनाउंसमेंट पर गाड़ी मालिक की राय

बीजेपी कार्यकर्ता और गाड़ी मालिक जसबीर सिंह सोलंकी ने बताया कि मैं वर्कशॉप से गाड़ी लेकर आया हूं और गुरुवार (18 दिसंबर) को ही पॉल्यूशन खत्म हुआ है. मुझे नहीं लगता कि सिर्फ इस कदम से प्रदूषण पूरी तरह नियंत्रित हो पाएगा. जितना प्रदूषण इंडस्ट्रीज से होता है, उतना गाड़ियों से नहीं.

इस दौरान प्रदूषण जांच कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि सुबह से ही असाधारण भीड़ देखने को मिल रही है. सुबह से अब तक 60 सर्टिफिकेट इश्यू कर चुके हैं. गुरुवार (18 दिसंबर) को एक ही दिन में बहुत ज्यादा लोग जांच के लिए आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि ऐसे में सर्वर डाउन हो जाता है, क्योकि वेबसाइट स्लो चल रही है. कब तक सर्वर ठीक होगा यह कहना मुश्किल है. दो दिनों से सर्टिफिकेट बनवाने बहुत लोग आ रहे हैं.

सर्वर डाउन बना परेशानी की वजह

कई लोगों को सर्वर डाउन होने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा. इस बीच ड्राइवर का कहना है कि हम द्वारका से आए हैं और 15-20 मिनट से इंतजार कर रहे हैं. हर बार सर्वर डाउन मिल जाता है. पहले जब चेकिंग नहीं होती थी, तब कोई नहीं मानता था. अब सर्वर डाउन होने पर भी सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा.

शंकर चतुर्वेदी ने कहा कि मैं लिंक रोड गया, फिर भी CP गया. एक घंटा इंतजार किया, लेकिन सर्वर ही डाउन रहा. आखिर कितनी बार आऊं प्रदूषण जांच के लिए? आज इंतजार करके ही जाऊंगा. दिल्ली सरकार की यह सख्ती लोगों को नियमों के प्रति जागरूक तो कर रही है, लेकिन साथ ही तकनीकी समस्याएं, जैसे सर्वर डाउन, आम लोगों के लिए नई परेशानी भी बन रही हैं. इसके बावजूद ज्यादातर लोग इस कदम को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक जरूरी और अहम पहल मान रहे हैं.

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