बिलासपुर रेल हादसा जांच में मृतक लोको पायलट पर लापरवाही का आरोप, परिवार हुआ भावुक
Chhattisgarh News: बिलासपुर रेल हादसे की जांच रिपोर्ट में मृत लोको पायलट पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ा है. लोको पायलट संघ ने रेलवे सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में हुए रेल हादसे को 3 दिन से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन जख्म अभी भी ताजा हैं. 4 नवंबर की शाम गेवरारोड स्टेशन के पास जब मेमू लोकल और मालगाड़ी की टक्कर हुई, तो कुछ ही सेकंड में सब कुछ तबाह हो गया. हादसे में 11 यात्रियों की मौत हो गई और दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हैं. रेल की पटरियों पर बिखरे डिब्बे और दर्द की चीखें अब भी उस भयावह शाम की याद दिला रहे हैं.
शनिवार की शाम रोज की तरह मेमू ट्रेन अपने तय समय पर निकली थी. यात्रियों में कोई हलचल नहीं थी, सब सामान्य लग रहा था. लेकिन गेवरारोड स्टेशन से कुछ किलोमीटर पहले अचानक तेज रफ्तार में आ रही मालगाड़ी ने मेमू ट्रेन को टक्कर मार दी. झटके इतने भयानक थे कि कई डिब्बे पलट गए.
महिला सहायक लोको पायलट रश्मि राज और मालगाड़ी के गार्ड शैलेंद्र चंद्रा ने किसी तरह ट्रेन से कूदकर अपनी जान बचाई. दोनों इस वक्त अस्पताल में भर्ती हैं. लेकिन लोको पायलट विद्यासागर और कई यात्री इस हादसे में जिंदगी हार गए.
रिपोर्ट में उठे सवाल
हादसे के बाद रेलवे ने भुसावल की स्टडी कमेटी से प्रारंभिक जांच कराई. रिपोर्ट में हादसे की 3 संभावित वजहें बताई गईं. ऑटोमैटिक सिग्नल की अनदेखी, RS वॉल्व समय पर न खोलना, ट्रेन संचालन में अति आत्मविश्वास. रिपोर्ट में सीधे तौर पर मृत लोको पायलट विद्यासागर और उनके सहायक पर लापरवाही का आरोप लगाया गया. लेकिन इस निष्कर्ष ने हालात और भी संवेदनशील बना दिए.
'CRS जांच चल रही, जिम्मेदारी तय करना जल्दबाजी'
लोको पायलट संघ ने इस रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है. मजदूर कांग्रेस लोको पायलट संघ (नागपुर) के महामंत्री पीताम्बर लक्ष्मी नारायण ने कहा, “जब CRS की जांच अभी जारी है, तो किसी मृत लोको पायलट पर ठीकरा फोड़ना अनुचित और अमानवीय है. विद्यासागर अब खुद अपना पक्ष नहीं रख सकते. पहले जांच पूरी होनी चाहिए.”
संघ ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर औपचारिक विरोध भी दर्ज कराया है.
पुलिस जांच भी जारी
एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल ने बताया कि गतौरा स्टेशन मैनेजर निखिलेश विठालकर की शिकायत पर तोरवा थाने में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ अपराध दर्ज कर मर्ग कायम किया है और जांच शुरू कर दी है. फिलहाल रेलवे अधिकारी CRS जांच का हवाला देकर मीडिया से बच रहे हैं.
जांच में यह बात सामने आई है कि हादसे की बड़ी वजह ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम की गड़बड़ी और तकनीकी त्रुटियाँ थीं. रेलवे की 5 सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी माना कि प्रशासनिक लापरवाही ने भी इस दुर्घटना को जन्म दिया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लोको पायलट विद्यासागर, जो पहले मालगाड़ी चलाते थे, उन्हें हाल ही में पैसेंजर ट्रेन की जिम्मेदारी दी गई थी.
नियम के मुताबिक उन्हें यह जिम्मेदारी मिलने से पहले साइकोलॉजिकल टेस्ट पास करना जरूरी था, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक वे इस टेस्ट में असफल रहे थे. इसके बावजूद अधिकारियों ने उन्हें ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी. यानी सिस्टम की लापरवाही ने इस हादसे की जमीन तैयार की.
बिलासपुर के लालखदान इलाके में स्थित लोको पायलट विद्यासागर का घर अब मातम में डूबा है. हर सुबह ड्यूटी पर जाते वक्त वो अपने बच्चों से कहते थे कि सुबह लौट आऊंगा. लेकिन इस बार सुबह उनका शरीर लौटा, धड़कन नहीं. उनकी पत्नी, बूढ़े माता-पिता और छोटे बच्चे अब सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं कि क्या हमारा बेटा सच में दोषी था, या उसे मरकर भी इल्ज़ाम झेलना पड़ेगा?
परिवार अब मीडिया से बात करने से भी डर रहा है. एक तरफ डर है, दूसरी तरफ उम्मीद कि शायद कोई न्याय मिले. SECR बिलासपुर के सीनियर जनसंपर्क अधिकारी संतोष कुमार ने कहा, “CRS की जांच चल रही है. जांच पूरी होने के बाद ही कोई निष्कर्ष दिया जाएगा. फिलहाल हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है.”
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Source: IOCL

























