Xप्लेन: बांकीपुर जीत के बाद प्रशांत किशोर की 'सम्राट हटाओ' मांग, लेकिन असल निशाना कौन?
PK Targets Samrat Choudhary: पीके की कोई मजबूरी नहीं, एक राजनीतिक दांव है. सम्राट चौधरी प्रशांत किशोर के लिए 'निशाना' नहीं, बल्कि एक 'सीढ़ी' हैं. इससे वे बिहार की सत्ता के केंद्र तक पहुंचना चाहते हैं.

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट पर चुनाव जीतने के बाद कहा, 'कोई भी पार्टी किसी सीट को अपना अभेद्य किला नहीं कह सकती है. लोकतंत्र में सभी किले जनता बनाती है और जब चाहे तोड़ सकती है. बीजेपी को अब यह समझ लेना चाहिए. प्रशांत किशोर ने साफ कहा है कि सम्राट चौधरी से उनकी कोई निजी लड़ाई नहीं है. वे इसे बिहार के नेतृत्व और दिशा का सवाल बताते हैं, लेकिन सियासत में कोई भी निशाना इत्तिफाक से नहीं चुना जाता. तो फिर सम्राट चौधरी को ही क्यों? क्या यह सिर्फ एक मजबूरी है या फिर कोई गहरी रणनीति...
बांकीपुर की जीत और 'सम्राट हटाओ' अभियान
सबसे पहली बात, यह सब बांकीपुर उपचुनाव से शुरू हुआ. प्रशांत किशोर ने बीजेपी के 30 साल पुराने इस गढ़ पर 19,324 वोटों से जीत हासिल की. यह उनके राजनीतिक करियर की पहली जीत थी. इस जीत को उन्होंने सीधे सम्राट चौधरी के खिलाफ 'रेफरेंडम' (जनमत संग्रह) के रूप में पेश किया. जीत के तुरंत बाद उन्होंने 'सम्राट हटाओ अभियान' की शुरुआत कर दी.
एक मीडिया इंटरव्यू में पीके ने कहा, 'सम्राट चौधरी के खिलाफ हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें मुख्यमंत्री पद से नहीं हटा देता. हमें कोई आपत्ति नहीं है अगर बीजेपी कुशवाहा जाति से मुख्यमंत्री बनाना चाहती है. लेकिन उसे एक ईमानदार और योग्य नेता चुनना चाहिए, जो कुशवाहा समाज में बहुतायत में हैं.
प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को 'अयोग्य' ठहराने के लिए तीन मजबूत आधार चुने हैं:
- आपराधिक पृष्ठभूमि: पीके ने बार-बार कहा है कि सम्राट चौधरी 'क्रिमिनल बैकग्राउंड' वाले नेता हैं. वे 1990 के दशक में कुशवाहा समुदाय के सात लोगों की हत्या के मामले में आरोपी हैं. पीके का कहना है, 'अगर आप आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाएंगे, तो बिहार तरक्की नहीं कर सकता.' वे आरोप लगाते हैं कि बीजेपी ने खुद 'जंगल राज' के खिलाफ वोट मांगा, लेकिन अब उसी 'जंगल राज' के प्रतीक को सत्ता में बिठा दिया है.
- शैक्षणिक अयोग्यता: पीके ने सम्राट चौधरी की शिक्षा पर भी सवाल उठाए हैं. पीके के मुताबिक, सम्राट चौधरी सातवीं कक्षा में फेल हैं और अपनी डिग्री को लेकर गलत बयानी करते हैं.
- आचरण और भाषा: वे सम्राट चौधरी के सार्वजनिक आचरण और भाषा को मुख्यमंत्री के पद के अनुरूप नहीं मानते. पीके का कहना है कि बिहार की जनता ने बांकीपुर में 'सम्राट चौधरी के आचरण, चरित्र और चेहरे' को खारिज कर दिया है.
पीके का असली निशाना सम्राट हैं या कोई और?
यहीं पर असली खेल शुरू होता है. प्रशांत किशोर साफ कहते हैं कि वे बीजेपी के खिलाफ नहीं हैं. वे कहते हैं कि अगर बीजेपी कुशवाहा समाज से मुख्यमंत्री बनाना चाहती है, तो उसे 'काबिल, ईमानदार और योग्य' नेता चुनना चाहिए.
असली बात यह है कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का फैसला था. 20 साल से ज्यादा समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार की जगह बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री बनाना अमित शाह के लिए 'गर्व का क्षण' था.
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जब प्रशांत किशोर सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हैं, तो उनका असली निशाना PM मोदी और अमित शाह होते हैं. वे बार-बार कहते हैं कि बांकीपुर का नतीजा 'मोदी जी और अमित शाह जी के लिए एक संदेश' है. वे PM मोदी पर बिहार को सिर्फ '5 किलो राशन' देने का आरोप लगाते हैं, जबकि गुजरात पर उनका खास ध्यान है.
प्रशांत किशोर के लिए यह 'मजबूरी' क्यों नहीं है?
अगर आप इसे प्रशांत किशोर की 'मजबूरी' कहेंगे, तो यह उनकी रणनीति को कम आंकना होगा. इसके पीछे चार बड़े कारण हैं:
1. 'विकल्प' के रूप में खुद को स्थापित करना
प्रशांत किशोर बिहार में बीजेपी और 'महागठबंधन' (राजद-कांग्रेस) के बीच 'तीसरी ताकत' के रूप में उभरना चाहते हैं. सम्राट चौधरी जैसे विवादित नेता को निशाना बनाकर वे खुद को एक ईमानदार, योग्य और विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं.
2. 'जनता के मुद्दों' को सत्ता तक पहुंचाना
वे बिहार में शिक्षा, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं. सम्राट चौधरी के 'अयोग्य' होने के नारे के जरिए वे इन मुद्दों को सत्ता के केंद्र तक पहुंचा रहे हैं.
3. बीजेपी की 'अहंकार' को चुनौती देना
प्रशांत किशोर का मानना है कि बांकीपुर में बीजेपी के पारंपरिक समर्थकों ने ही पार्टी के 'अहंकार' के खिलाफ वोट किया. वे बीजेपी को यह संदेश दे रहे हैं कि वह जनता को हल्के में नहीं ले सकती. 4 अगस्त 2026 को मीडिया इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा, 'बीजेपी ने जंगल राज से जुड़े एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना दिया और फिर दावा करते हैं कि आप जंगल राज के खिलाफ हैं.'
4. 'नॉन-नेगोशिएबल' डिमांड
प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को हटाने की अपनी मांग को 'नॉन-नेगोशिएबल' बना दिया है. इसका मतलब है कि वे इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेंगे, जिससे उनकी राजनीतिक साख मजबूत होती है.
क्या सम्राट चौधरी बदलेंगे?
13 अगस्त 2026 को बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने कहा, 'एक उपचुनाव के नतीजे के आधार पर मुख्यमंत्री को बदलना हास्यास्पद है.' लेकिन प्रशांत किशोर ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है.
सम्राट चौधरी को निशाना बनाकर, उन्होंने खुद को बिहार की सियासत के केंद्र में ला दिया है. चाहे सम्राट चौधरी बदलें या न बदलें, प्रशांत किशोर ने 'सम्राट हटाओ' अभियान के जरिए एक ऐसा मुद्दा खड़ा कर दिया है, जो आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकता है.
प्रशांत किशोर के लिए सम्राट चौधरी को निशाना बनाना कोई 'मजबूरी' नहीं है. वे बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व (मोदी-शाह) को चुनौती देकर और खुद को बिहार के 'विकल्प' के रूप में स्थापित करने की रणनीति बना रहे हैं.
प्रशांत किशोर ने आगे की क्या योजना बताई?
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के लिए कई विकास के वादे किए:
- 10,000 युवाओं को प्राइवेट नौकरी देंगे.
- 3 महीने के भीतर 60 साल से अधिक के हर व्यक्ति को 1,100 रुपए की मासिक पेंशन दिलाएंगे.
- शराबबंदी के नकली कानून को खत्म करेंगे.
पीके ने कहा, 'मैं यह पूरी कोशिश करूंगा कि विधायक निधि से जुड़े कार्यों में एक पैसे की भी चोरी न हो.'























