TMC का सिंबल फ्रीज हुआ तो क्या बोली BJP? 'ममता बनर्जी की…'
बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी का कहना है कि टीएमसी के अधिकांश सांसद दूसरे दल में चले गए हैं. दो टूक में कहा कि आज नेता प्रतिपक्ष भी ममता बनर्जी गुट का नहीं है.

चुनाव आयोग ने टीएमसी का सिंबल फ्रीज कर दिया है. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ऋतब्रत गुट के बीच जारी घमासान के बीच चुनाव आयोग ने यह कदम उठाया है. यानी उपचुनाव में दोनों गुट इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. दोनों गुटों से तीन-तीन विकल्प देने के लिए कहा गया है जिसे आज (शुक्रवार) ही देना है. इस बीच भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया आई है.
TMC के दोनों गुटों को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोकने पर बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, "उनके अधिकांश सांसद दूसरे दल में चले गए हैं. ममता बनर्जी की पुरानी TMC के विधायकों में भारी टूट हुई है."
#WATCH पटना: चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल उपचुनाव में TMC के दोनों गुटों को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोका | बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, "उनके अधिकांश सांसद दूसरे दल में चले गए हैं। ममता बनर्जी की पुरानी TMC के विधायकों में भारी टूट हुई है। आज नेता… pic.twitter.com/qUC1u3xYQJ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 18, 2026
संजय सरावगी ने आगे कहा, "आज नेता प्रतिपक्ष भी ममता बनर्जी गुट का नहीं है. जो उनके चुनाव चिह्न के साथ जाएगा तो उसका तो सूपड़ा साफ होना निश्चित है. चुनाव आयोग ने निर्णय करके फ्रीज किया है. चुनाव आयोग को इसका अधिकार है..."
शरद यादव के बेटे ने भी दिया रिएक्शन
पूर्व सांसद शरद यादव के बेटे शांतनु यादव ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है. शांतुन ने कहा, "पहले शिवसेना और NCP, फिर LJP और अब तृणमूल कांग्रेस- सीधा सवाल है क्या BJP और चुनाव आयोग के बीच कोई ऐसा गठबंधन है, जिसके निशाने पर लगातार विपक्षी दल हैं?"
पहले शिवसेना और NCP, फिर LJP और अब तृणमूल कांग्रेस— सीधा सवाल है—क्या BJP और चुनाव आयोग के बीच कोई ऐसा गठबंधन है, जिसके निशाने पर लगातार विपक्षी दल हैं।
— Shantanu Yadav (@shantanu_yadav1) September 18, 2026
विपक्षी दलों में टूट और उसके बाद पार्टी के नाम व चुनाव चिन्ह को लेकर उठते विवाद लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हैं निष्पक्षता… pic.twitter.com/tPc1jiuHtZ
अपने एक्स पोस्ट में शांतनु ने आगे लिखा, "विपक्षी दलों में टूट और उसके बाद पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न को लेकर उठते विवाद लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है. निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. लड़ाई किसी एक नेता या पार्टी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र, जनादेश और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता की रक्षा की लड़ाई है. यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और जनता के जनादेश के सम्मान की है!"
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उधर खबर है कि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के उस अंतरिम आदेश पर अपना जवाब सौंप दिया है जिसमें पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए मतपत्र से 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और उसके 'दो फूल और घास' वाले चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से हटा दिया गया है.
सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने बीते गुरुवार की रात 11:36 बजे आयोग को आगामी चुनावों के लिए नए नामों और चुनाव चिह्नों के अपने विकल्प ईमेल के जरिए भेजे और उन्हें 'कड़े विरोध के तहत' जमा किया.
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