हत्याकांड के आरोपियों की परेड, हथकड़ी डाल पैदल कोर्ट ले गई बिहार पुलिस
15 अक्टूबर 2026 की सुबह राम कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वे मॉर्निंग वॉक पर निकले थे. हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था.

सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर राम कुमार सिंह हत्याकांड में पुलिस ने गिरफ्तार तीन आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच नवादा थाना से आरा सिविल कोर्ट तक पैदल ले जाकर पेश किया. गुरुवार (22 अक्टूबर, 2026) को हुई इस कार्रवाई के दौरान आरोपियों को नकाब भी नहीं पहनाया गया था.
थाना से कोर्ट की दूरी लगभग डेढ़ किलोमीटर है. आरोपियों को पैदल ले जाते देख रास्ते में लोगों की भीड़ जुट गई. इन तीन आरोपियों में मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, चंदन सिंह, अभिषेक कुमार और टीपू कुमार शामिल हैं. इनमें से मनोज लक्की को घटना के दिन ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. बाकी तीन आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया गया. पैदल कोर्ट जाने वालों में अभिषेक, टीपू और चंदन हैं.
भोजपुर, बिहार: आरा के नवादा थाना क्षेत्र अंतर्गत कनकपुरी में सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर राम कुमार सिंह की हत्या मामले में पुलिस द्वारा मुख्य आरोपियों को नवादा थाने से आरा सिविल कोर्ट तक लगभग 1.6 किलोमीटर पैदल मार्च कराते हुए पेशी के लिए ले जाया गया। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए नवादा थाना पुलिस द्वारा भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। मुख्य आरोपी चंदन सिंह बड़की सिंगही निवासी है।
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 22, 2026
मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई थी हत्या
मर्डर की घटना 15 अक्टूबर 2026 की है. सुबह करीब छह बजे नवादा थाना क्षेत्र के कनकपुरी मोहल्ले में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के पास राम कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वह अपनी पत्नी और बड़े बेटे के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकले थे. उन्हें सात से आठ गोलियां मारी गई थी.
जमीन के विवाद में हुआ मर्डर
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोजपुर पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था. टीम का नेतृत्व सदर-1 एसडीपीओ कर रहे थे. भोजपुर के एसपी अवधेश दीक्षित ने इस कांड के पीछे जमीन का विवाद बताया था.
विवादित जमीन भोजपुर जिले के सिंघी इलाके में स्थित है. इसका थाना नंबर 245, खेसरा नंबर 69 और खाता नंबर 88 है. 2006 से राम कुमार सिंह का इस जमीन पर कब्जा था. 2020 में उन्होंने जमीन की घेराबंदी भी कराई थी. पुलिस का आरोप है कि दूसरे पक्ष ने वर्ष 2025 में इस जमीन के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी ली और इसके आधार पर अलग-अलग लोगों के नाम जमीन की रजिस्ट्री कराई. इसके बाद म्यूटेशन भी कराया गया. पुलिस इसी जमीन विवाद को हत्या की साजिश से जोड़कर जांच कर रही है.
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अनुसंधान में यह सामने आया है कि आरोपियों ने हत्या से करीब 15 से 20 दिन पहले इसकी योजना बनाई थी. पुलिस का दावा है कि घटना से तीन-चार दिन पहले आरोपियों ने अपने बैंक खातों से पैसे निकालकर अपनी पत्नी के खातों में ट्रांसफर किए थे. उनकी पत्नियों को भी दूसरी जगह भेज दिया गया था. जांच में नए सिम कार्ड, मोबाइल फोन और बैंक खाते का इस्तेमाल कर पहचान छिपाने की बात भी सामने आई है.
एसपी के अनुसार, घटना के बाद आरोपी पहले सिलीगुड़ी, फिर गंगटोक और उसके बाद कोलकाता पहुंचे. वहां होटल में पहचान छिपाकर ठहरने की कोशिश की गई. पुलिस ने चंदन सिंह और अभिषेक कुमार को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया, जबकि टीपू कुमार को भोजपुर से पकड़ा गया. मनोज लक्की की गिरफ्तारी वारदात के तुरंत बाद हुई थी.
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