SIR को लेकर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला, 'बिहार का चुनाव पूरा फर्जीवाड़ा...'
तेजस्वी यादव ने SIR को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बिहार चुनाव को फर्जीवाड़ा बताया और जमुई में नाबालिग की तस्वीर पोस्ट होने पर CM से सवाल किया.

आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने INDIA ब्लॉक की बैठक से पहले चुनाव आयोग और SIR को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की शुरुआत बिहार से हुई और उस समय से ही विपक्ष को चुनाव प्रक्रिया को लेकर आशंका थी. तेजस्वी ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में बेईमानी और फर्जी तरीके अपनाए गए.
तेजस्वी यादव ने कहा कि जब चुनाव से जुड़े कानून और नियम बदले जा रहे थे, तभी विपक्ष को संदेह हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने के लिए कानूनी बदलाव किए गए और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े पैनल में बदलाव किया गया.
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PM मोदी-शाह पर भी लगाए आरोप
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार केवल एक ‘नमूना’ हैं और असली फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करवा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पूरी सच्चाई सामने आएगी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान के साथ खिलवाड़ करने वालों को भविष्य में सजा मिलेगी.
#WATCH | दिल्ली | राजद नेता तेजस्वी यादव ने INDIA ब्लॉक की बैठक पर कहा, "SIR की शुरूआत बिहार से ही हुई है और उस समय भी हमने कहा था कि चुनाव को देखते हुए बड़ी साजिश की जा रही है। जिस तरह से खुलासा हुआ है, ये साबित करता है कि बेईमानी और फर्जी तरीके से बंगाल और बिहार का चुनाव करवाया… pic.twitter.com/EC7yURHSBZ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 30, 2026
‘चुनाव आयोग सब कुछ छिपाता है’
आरजेडी नेता ने बिहार के चुनाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि बिहार का चुनाव ‘पूरा फर्जीवाड़ा’ था और चुनाव आयोग कई चीजों को छिपाता है. बता दें कि SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और INDIA ब्लॉक की बैठक में संयुक्त आंदोलन की रणनीति पर चर्चा प्रस्तावित है.
जमुई मामले पर CM से पूछा सवाल
जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट होने के मामले को लेकर भी तेजस्वी ने सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि यदि POCSO के तहत नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है, तो मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई. हालांकि इस मामले में पटना पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की है.
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