दिल्ली HC में लालू यादव की याचिका पर सुनवाई, BJP बोली- 'बिहार के सबसे बड़े भ्रष्ट...'
Bihar News: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर बीजेपी नेता संजय जैसवाल ने हमला बोला है. लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई को लेकर निशाना साधा है.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कथित IRCTC घोटाले में निचली अदालत की ओर से तय किए गए आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. लालू यादव की यह याचिका सोमवार (5 जनवरी) को दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है. अब इस पर बिहार बीजेपी के नेता उन पर हमला करने में जुट गए हैं और लालू प्रसाद यादव को बिहार का सबसे बड़ा भ्रष्ट नेता बताया है.
लालू यादव की याचिका पर बीजेपी ने क्या कहा?
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि वह किस चीज का चुनौती देंगे, पटना में उनका मॉल सामने दिख रहा है. रांची और भुवनेश्वर का होटल सामने है. किस प्रकार से होटल लिया गया और किस प्रकार से मॉल के लिए इतनी बड़ी जमीन मिली यह सारा कुछ बिहार की जनता के सामने है.
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपना सांसद और मंत्रियों के आवंटित जमीन को छीन करके पटना में अपना मकान बनवा रहा हो, लालू यादव आम लोगों के साथ जो भी अत्याचार किए हैं उनके कारण ही साढ़े 32 साल की सजा कोर्ट ने दी थी और यह सजा बढ़ती जाएगी. लालू यादव कितना भी अस्वस्थ होने का बहाना कर ले लेकिन बिहार की जनता यह जानती है कि उनसे ज्यादा भ्रष्ट व्यक्ति बिहार में कोई नहीं है.
तेजस्वी यादव के आगमन को लेकर बोले संजय जायसवाल
तेजस्वी यादव के आगमन को लेकर भी उन्होंने कहा कि आने दीजिए वह तो 18 नवंबर को शपथ ग्रहण कर रहे थे, लेकिन उन्होंने साल नहीं बताया था. शायद वह अगले शताब्दी वर्ष का सपना देख रहा है.
उमर खालिद की याचिका पर क्या कहा?
संजय जायसवाल ने उमर खालिद और सर्जिल इमाम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर फैसले को सराहना किया और कहा कि जिस तरह से इन दोनों ने देश विरोधी काम किया और चिकन नेक को डैमेज करके पूर्वी भारत को काटने की साजिश रची थी उसकी पुष्टि सुप्रीम कोर्ट ने कर दी है.
अब 1 साल तक यह लोग कहीं जमानत के लिए अप्लाई भी नहीं करेंगे. यह निर्णय बताता है कि भारत सरकार ने जो फैसला लिया था वह बिल्कुल सही था. केंद्रीय एजेंसियां है वे यह सब अच्छी तरह से जानती थी और यही वजह से यह निर्णय हुआ है.
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