'नया घर, नया डेस्टिनेशन मुबारक...' AAP सांसदों के BJP में शामिल होने पर बोले RJD नेता मनोज झा
Manoj Jha on AAP MP Join BJP: आरजेडी सांसद मनोज झा ने आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के बीजेपी में जाने पर कहा कि ऐसा न हो कि देश में वन नेशन और वन पार्टी की स्थिति बन जाए.

देश की राजनीति में आम आदमी पार्टी से राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक कुमार मित्तल सहित 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने को लेकर सियासी हलचल तेज है. इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे किसी एक पार्टी का मामला नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोकतंत्र पर पड़ने वाला झटका बताया है.
मनोज झा ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया. उन्होंने कहा कि आज कई लोग और मीडिया भी इस तरह के बदलाव के असर को ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं.
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उनके मुताबिक, “ऐसे झटके, यह कार्यशैली, यह कार्य व्यवहार लोकतंत्र को चोट पहुंचाते हैं.” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को किसी दूसरे मॉडल की ओर ले जाया जा रहा है.
उन्होंने कहा, “क्या हम चीन के मॉडल पर अपनी पूरी लोकतंत्र की व्यवस्था को ले जा रहे हैं? वन नेशन वन इलेक्शन की बात सुन रहे थे, कहीं ऐसा तो नहीं कि वन नेशन और वन पार्टी की स्थिति बन जाए.”
राघव चड्ढा पर की सख्त टिप्पणी
राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज झा ने कहा, “राघव चड्ढा बीजेपी के मंच से अमृतवाणी तो आम आदमी पार्टी या विपक्ष के लिए नहीं बोलते. उनको उनका नया घर, नया डेस्टिनेशन मुबारक. उन्होंने डिलीवरी अच्छी कर दी.”
मनोज झा ने दल बदल कानून के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस कानून के मायने बदल दिए गए हैं. उन्होंने कहा, “यह पूरी फेहरिस्त देखिए. ऑर्गेनिक रिश्ता इनमें से किसका था? एक व्यक्ति को मैं जानता हूं, जब संसद में सवाल उठाते थे तो पंजाबी भाषा में और जमीनी मुद्दों पर बात करते थे.”
आगे उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “पहले लोग कहते थे हॉर्स ट्रेडिंग होती है, अब तो यह स्टेबल ट्रेडिंग हो रही है. पूरा का पूरा स्टेबल ही इधर से उधर कर दिया जाता है.”
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लोकतंत्र को लेकर चिंता
मनोज झा ने साफ किया कि उनकी चिंता किसी एक नेता के जाने से नहीं है, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ रहे असर को लेकर है. उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति लंबे समय में लोकतंत्र को कमजोर करती है और इसे गंभीरता से समझने की जरूरत है.
Source: IOCL



























