चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठी, क्या BJP मानेगी? कांग्रेस बोली- 'कम से कम…'
Bihar Next CM: एलजेपी रामविलास के सांसद अरुण भारती का कहना है कि वो चिराग पासवान को बिहार के मुखिया के रूप में देखना चाहते हैं. हालांकि उन्होंने इसे अपना निजी राय बताया.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन कर दिया है. इसके साथ ही दूसरा सवाल उठने लगा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इस बीच एलजेपी रामविलास की ओर से बड़ा बयान आया है. पार्टी के सांसद अरुण भारती ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि वह चिराग पासवान में भविष्य देखते हैं.
इस सवाल पर कि क्या चिराग मुख्यमंत्री हो सकते हैं. इस पर अरुण भारती ने कहा, "मैं कहना चाहूंगा कि ये बातें गठबंधन के अंदर गठबंधन के बड़े नेता मिलकर तय करेंगे. उसके बाद ही फैसला किया जाएगा. मेरा निजी विचार है कि मैं अपने नेता चिराग पासवान को बिहार के बड़े नेता के रूप में देखना चाहता हूं. उनको बिहार के मुखिया के रूप में देखना चाहता हूं." हालांकि अरुण भारती ने इसे अपना निजी राय बताया लेकिन सवाल है कि क्या बीजेपी कभी मानेगी? यह देखने वाली बात होगी.
नीतीश के राज्यसभा जाने पर क्या कहा?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर कहा कि उन्होंने ही इच्छा व्यक्ति की और एनडीए के जितने भी घटक दल हैं सभी ने इस बात को मानते हुए आगे की इस यात्रा के लिए सभी ने सहयोग किया. जंगलराज से बिहार को निकालकर लाने वाले नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना एक युग का अंत हो रहा है तो दूसरे युग की शुरुआत हो रही है. एलजेपी रामविलास उनको बधाई देती है.
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तेजस्वी यादव को भी दिया जवाब
तेजस्वी यादव के इस बयान पर कि बीजेपी ने नीतीश कुमार को पहले ही हाईजैक कर लिया था. वो इस बात को कहते आए थे और वो अब दिख गया. इस पर अरुण भारती ने कहा कि तेजस्वी यादव क्या बयान देते हैं, हताशा में क्या बोलते हैं, उन्हें खुद आकलन करना चाहिए. आज महागठंबधन में उनकी बात सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है. तथ्य के साथ, तर्क के साथ, तेजस्वी यादव बोलें तो समझ आता है. उनके आरोपों को बिहार की जनता खारिज करती रही है.
इच्छाओं को दबाना सीखिए: कांग्रेस
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने अरुण भारती पर निशाना साधा है. उन्होंने अरुण भारती को कहा, "जब बिहार में बीजेपी के हनुमान बनकर आपके साले घूम रहे थे तब उन्हें सोचना चाहिए था… नीतीश कुमार के नाम पर वोट तो ले लिया लेकिन बीच रास्ते में साथ छोड़कर उन्हें दिल्ली भेजा जा रहा है. सोच लीजिएगा आपकी पसंद से बिहार नहीं चल रहा है. आप जैसे लोगों ने राजनीति को बिहार के हाथों से छटका के गुजरात के दो व्यापारियों के हाथों दे दिया है. कम से कम अपनी इच्छाओं को दबाना सीखिए."
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Source: IOCL

























