बिहार के इस जिले में गर्मी छुट्टी के बाद पहले दिन गायब मिले 487 शिक्षक, अब बताना होगा कारण
Bihar Teacher News: सभी अनुपस्थित शिक्षकों पर ई-शिक्षा कोषांग के नोडल पदाधिकारी सह स्थापना जिला कार्यक्रम पदाधिकारी संजय कुमार यादव ने एक्शन लिया है. तीन दिनों में जवाब देना होगा.

बिहार के सरकारी विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियों (ग्रीष्मावकाश) की समाप्ति के बाद पहले ही दिन लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने अपना कड़ा रुख अख्तियार किया है. सोमवार (22 जून) को विद्यालय खुलने के पहले दिन ही बांका जिले के विभिन्न प्रखंडों के सरकारी स्कूलों से कुल 487 शिक्षक बिना किसी सूचना के गायब पाए गए.
ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर हाजिरी दर्ज नहीं होने के कारण पकड़े गए इन सभी अनुपस्थित शिक्षकों पर ई-शिक्षा कोषांग के नोडल पदाधिकारी सह स्थापना जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) संजय कुमार यादव ने एक्शन लिया है. इन शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज) जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है.
ग्रीष्मावकाश के तुरंत बाद छुट्टी पर था प्रतिबंध
स्थापना डीपीओ संजय कुमार यादव द्वारा जारी पत्रांक 729 के तहत स्पष्ट किया गया है कि विभागीय निर्देशानुसार 22 जून से सभी विद्यालयों को अपने नियत समय से संचालित होना था, जिसमें सभी शिक्षक और शिक्षिकाओं की उपस्थिति अनिवार्य थी. विभाग ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि लंबी छुट्टियों के बाद विद्यालय खुलने के पहले दिन किसी भी शिक्षक को किसी भी प्रकार का अवकाश (लीव) देय नहीं होगा.
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लापरवाही पर स्कूल के हेडमास्टर भी नपेंगे
जारी आदेश में नोडल पदाधिकारी ने न केवल अनुपस्थित शिक्षकों से जवाब तलब किया है, बल्कि संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों पर भी शिकंजा कसा है. सभी विद्यालय प्रधानों को दो दिनों के भीतर इन शिक्षकों की अनुपस्थिति के संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट कार्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है. डीपीओ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर रिपोर्ट नहीं भेजी गई तो यह माना जाएगा कि शिक्षकों की इस अनाधिकृत अनुपस्थिति में स्कूल के हेडमास्टर की भी मिलीभगत थी. ऐसे में उनके खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
तीन दिनों में देना होगा जवाब, नहीं तो कार्रवाई
नोटिस में जिले भर के विभिन्न प्रखंडों के सभी 487 शिक्षकों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि वे तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण समर्पित करें कि आखिर उनके इस कृत्य के लिए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में विभाग द्वारा कार्रवाई की जाएगी.
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