बिहार: 10 साल बाद अब फिर शुरू होगा गोलघर? कर सकेंगे पटना का दीदार
अकाल से निपटने के लिए अनाज भंडारण को लेकर पटना के गोलघर का निर्माण हुआ था. 2016 से ही इस पर चढ़ने पर रोक है. अब जल्द ही लोगों के लिए यह शुरू हो सकेगा.

बिहार की पहचान गोलघर कई वर्षों से बंद है. अब इसे शुरू करने की तैयारी हो रही है. गोलघर पर चढ़कर फिर से पटना के खूबसूरत नजारे का दीदार किया जा सकता है. कला संस्कृति विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी की मानें तो गोलघर का दिन अब बदलने वाला है. जल्द ही लोगों को चकाचक पटना की तरह चकाचक गोलघर भी दिखेगा.
गुरुवार (17 सितंबर, 2026) को मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने बताया कि भवन निर्माण विभाग गोलघर और सीढ़ियों की मरम्मत का काम करेगा. इसमें लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे. निर्माण पूरा होने में करीब छह महीना लगेगा.
प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि पहले कहा जाता था कि अगर आप पटना आए और गोलघर नहीं चढ़े तो क्या किए, ऐसे में यह ऐतिहासिक धरोहर एक बार फिर से लोगों के लिए नए रूप एवं नए रंग में दिखेगा.
करीब 10 साल से बंद है गोलघर
बता दें कि गोलघर पर चढ़ने और उतरने उतरने के लिए दो अलग-अलग सीढ़ियां हैं. एक पूर्वी ओर और एक पश्चिमी ओर, लेकिन 2016 के जून महीने में मरम्मत को लेकर पूर्वी तरफ वाली सीढ़ी बंद कर दी गई. बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में जीर्णोद्धार हुआ. कुछ दिनों बाद ही गोलघर को पूरी तरह बंद कर दिया गया.
उस वक्त के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीढ़ियों को बंद किए जाने के बाद उस जगह पर पार्क का निर्माण कराया. पार्क में लोग आते हैं और गोलघर को भी देखते हैं, लेकिन गोलघर पर चढ़ने की अनुमति नहीं है. अब कला संस्कृति विभाग ने बड़ी पहल की है. अगर सब कुछ अच्छा रहा तो छह महीने बाद फिर गोलघर पर चढ़कर पटना देखा जा सकता है.
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बता दें कि गोलघर का निर्माण 20 जनवरी, 1784 को शुरू हुआ था. ढाई साल के निर्माण कार्य के बाद 20 जुलाई, 1786 को इसे पूरा कर लिया गया था. 1770 में बंगाल में भीषण अकाल पड़ा था उस वक्त बंगाल, ओडिशा , बिहार एक राज्य था. उस अकाल में कई लोगों की जान चली गई थी. अकाल से निपटने के लिए अनाज भंडारण को लेकर उस वक्त के तत्कालीन गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने गोलघर के निर्माण का आदेश दिया था. ईस्ट इंडिया कंपनी के इंजीनियर जॉन गार्स्टिन ने इसका निर्माण कराया था.
गोलघर की ऊंचाई 29 मीटर है, लेकिन बड़ी बात है कि इसमें कोई स्तंभ नहीं है. इसकी दीवारें 3.6 मीटर मोटी हैं. गोलघर के शिखर पर लगभग तीन मीटर तक ईंट की जगह पत्थरों का प्रयोग किया गया है. इसपर चढ़ने के लिए 142-43 सीढियां हैं.
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