क्यों लगातार चोटिल हो रहे हैं भारतीय खिलाड़ी? विवेक राजदान ने बताई वजह
पूर्व क्रिकेटर विवेक राजदान ने कहा, "मेरे पास जो भी तेज गेंदबाज आते हैं तो मैं उन्हें यही सलाह देता हूं कि जिम जाना तो ठीक है लेकिन फ्लेक्सिबिलिटी भी जरूरी है और इस पर खास ध्यान देने की जरूरत है.

टीम इंडिया को पिछले तीन महीनों में काफी इंजरी का सामना करना पड़ा. इसमें ज़्यादातर संख्या गेंदबाजों की है. बेंगलुरु स्थित सेंट्रल ऑफ एक्सीलेंस से सर्टिफ़िकेट मिलने के बाद भी खिलाड़ी सीरीज दर सीरीज चोटिल हो रहे है. आखिर क्या वजह है कि भारतीय खिलाड़ी फिटनेस के पैमाने पर मात खा रहे हैं. इसको लेकर एबीपी न्यूज़ कंसलटेंट रवीश बिष्ट ने पूर्व पूर्व गेंदबाज विवेक राजदान से खास बातचीत की.
सवाल- खिलाड़ी लगातार इंजर्ड हो रहे हैं, खासकर तेज़ गेंदबाज, आप क्या वजह मानते हैं?
जवाब- आज के दौर में इंजरी से बचना आसान नहीं है क्योंकि सारे साल क्रिकेट चलती है, कुछ खिलाड़ियों के एक्शन में तकनीकी कमी भी है अब सुधार करने के लिए वक्त भी चाहिए लेकिन क्रिकेट चलती जा रही है. हमारे वक्त में तीन महीने का ऑफ सीजन होता था तब हम अपनी तकनीक पर काम करते थे अब गेंदबाजों को टाइम कहा मिलता है क्योंकि सारे साल तो क्रिकेट चल रही है. मेरे पास जो भी तेज गेंदबाज आते हैं तो मैं उन्हें यही सलाह देता हूँ कि जिम जाना तो ठीक है लेकिन फ्लेक्सिबिलिटी भी जरूरी है और इस पर खास ध्यान देने की जरूरत है.
सवाल- फिटनेस को लेकर एक गेंदबाज़ को किन-किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब- देखिए फिटनेस को लेकर कोई हार्ड एंड फ़ास्ट रूल नहीं है ये खिलाड़ी पर निर्भर करता है. एक खिलाड़ी के तौर पर आपको अपने शरीर को समझना होता है. ये जरूरी नहीं है की एक खिलाड़ी का शेड्यूल दूसरे पर भी लागू हो. सबकी बॉडी अलग होती है. क्रिकेट का स्तर काफी बढ़ चुका है तो आपको फिटनेस पर काफी ध्यान देना होगा. जब बुमराह ने डेब्यू किया था तब कई लोग कह रहे थे कि ये ज्यादा नहीं चलेगा, इसका एक्शन ठीक नहीं है लेकिन देखिए बुमराह ने क्या काम किया है, ठीक है बुमराह चोटिल भी हुए हैं लेकिन हर बार उन्होंने चोट के बाद जबरदस्त वापसी की है. आप देखें बुमराह 10 साल से लगभग सभी फॉर्मेट खेल रहे हैं ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि उन्होंने अपनी बॉडी को समझा और उसके हिसाब से फिटनेस पर जोर दिया.
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सवाल- ऐसा क्यों है कि ज्यादातर गेंदबाजों को हैमस्ट्रिंग की समस्या हो रही है?
जवाब- फास्ट बॉलर की ताकत उसके पैरों में होनी चाहिए क्योंकि सबसे ज्यादा लोड उन्हीं पर पड़ता है तो कुछ गेंदबाजों को तकनीक पर काम करना होगा. जिसकी टाँगे मज़बूत नहीं है तो उसे दिक्कत होगी.
सवाल- आपके वक्त में तेज गेंदबाज खुद को कैसे फिट रखते थे?
जवाब- हमारे टाइम में रनिंग का काफी महत्व होता था और हफ़्ते के दो दिन हम लांग डिस्टेंस रनिंग किया करते थे. इसके अलावा जितना रन अप होता था उतनी दूरी की स्प्रिंट किया करते थे. बाकी बचे दिनों में हम जिम जाते थे लेकिन हमारी ट्रेनिंग लाइट वेट और रिपीटेशन पर आधारित थी. हम ज्यादा वेट से ट्रेन नहीं करते थे.
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सवाल- आपके वक्त में बॉलिंग कोच नहीं थे आज तो बोलिंग कोच भी है फिर इंजरी मैनेजमेंट खराब क्यों हो रहा है?
जवाब- बॉलिंग कोच को जब बॉलर मिलता है तो वो परफॉरमेंस रिलेटेड होता हैं. मान लीजिए एक टेस्ट में तीन तेज गेंदबाज खेल रहे हैं तो बोलिंग कोच का काम होता है उन्हें बताना कि बल्लेबाज की क्या कमजोरी है? किस एरिया में गेंद करनी है? वो उस वक़्त तकनीक पर काम नहीं करता. मुझे भी बड़ा आश्चर्य होता की आजकल चोट काफी गंभीर हो रही हैं या तो गेंदबाजों के पास फिटनेस पर काम करने का टाइम नहीं है या उन्हें मिल नहीं पा रहा है.



















