Virat Kohli: कोहली को महान कहना सही है या नहीं? सचिन के मुकाबले कैसा है अब तक का रिकॉर्ड, जानें सब कुछ
Virat Kohli Team India: विराट ने रनों का अंबार खड़ा किया है. वे अपने समकालीन बल्लेबाजों को काफी पीछे छोड़ चुके हैं. कोहली ने विदेश में खेले गए वनडे मैचों में 54.58 की औसत से रन बनाए हैं.

Virat Kohli Team India: हर युग में क्रिकेट ने खुद को बदला है. डब्ल्यूजी ग्रेस से लेकर लेन हटन तक, डॉन ब्रैडमैन से लेकर जैक हॉब्स तक, विजय हजारे से सुनील गावस्कर तक, विव रिचर्ड्स से लेकर इयान चैनल तक, गैरी सोबर्स से कैलिस तक, जहीर अब्बास से कुमार संगकारा तक, बैरी रिकॉर्ड्स से लेकर लारा तक, द्रविड़ से पोंटिंग तक, और सचिन से लेकर विराट तक, हर युग में क्रिकेट को अपने तरह से खेला गया. हर युग में महान खिलाड़ी आए जिन्होंने क्रिकेट को अपने तरीके से बदला और हजारों रन बनाए.
किसी युग के डॉन, ब्रैडमैन कहलाए तो कभी सचिन ने राज किया, कभी पोंटिंग और संगकारा की बल्लेबाजी ने मंत्रमुग्ध किया तो विव और इंजमाम की बल्लेबाजी ने खौफ पैदा किया. इसी फेहरिस्त में अब विराट कोहली का नाम भी जुड़ चुका है. विराट सार्वकालिक महान बल्लेबाज हैं या नहीं ये चर्चा का विषय है. लेकिन जब मॉडर्न डे ग्रेट का चुनाव होगा तो कोहली के निर्विवाद रूप से जीत दर्ज करने की संभावना है. जानते हैं कैसे.
फैब फोर की तुलना -
स्टीव स्मिथ, केन विलियमसन, जो रूट और विराट कोहली. विश्व क्रिकेट के ये चार बड़े बल्लेबाज जो अपने देश के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं. अब जब सभी को साथ में खेलते हुए एक अच्छा खासा समय बीत चुका है और संन्यास लेने का दौर भी शुरू हो चुका है ऐसे में सभी चार बल्लेबाजों की तुलना जायज हो जाती है.
भारत के विराट कोहली ने 123 टेस्ट मैचों की 210 पारियों में 46.85 की औसत से 9230 रन बनाए हैं. वहीं 302 वनडे मैचों की 290 पारियों में 57.88 की औसत से 14181 रन बनाए हैं. वहीं 125 टी20 मैचों में 48.69 की औसत से 4188 रन बनाए हैं.
ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ ने 170 वनडे मुकाबलों में 43.28 की औसत से 5800 रन बनाए हैं. वहीं टेस्ट में स्मिथ का रिकॉर्ड शानदार है, लाल गेंद से स्मिथ 56.71 की औसत से बल्लेबाजी करते हैं. उन्होंने 116 टेस्ट की 206 पारियों में 36 शतक की मदद से 10271 रन बनाए हैं. वहीं उन्होंने 67 टी20 मुकाबलों में 43.28 की औसत से 1067 रन बनाए.
इंग्लैड क्रिकेट के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज जोसेफ एडवर्ड रूट ने 152 टेस्ट मैचों की 278 पारियों में 50.87 की औसत से 12972 रन बनाए हैं. वहीं 177 वनडे मैचों में उन्होंने 47.96 की औसत से 6859 रन बनाए हैं. वहीं 32 टी20 मुकाबलों में 35.72 के औसत से 893 रन हैं.
न्यूजीलैंड के केन विलियमसन ने 105 टेस्ट की 186 पारी में 54.88 की औसत से 9276 रन बनाए हैं. वहीं 173 वनडे मैचों में 7235 रन बनाए हैं, इस दौरान उनका औसत 49.21 का है. 93 टी20 मुकाबलों में 33.44 की औसत से 2575 रन बनाए हैं.
टेस्ट में फैब फोर के आंकड़ों पर नजर -
आंकड़े साफ बता रहे हैं कि विराट कोहली इस सदी के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं. बीते कुछ सालों में विराट के टेस्ट क्रिकेट के प्रदर्शन में गिरावट जरूर आई है जबकि इसी दौरान जो रूट ने रनों की झड़ी लगा दी है, साथ ही स्टीव स्मिथ भी पुराने रंग में लौट चुके हैं. ये हम नहीं आंकड़े कह रहे हैं.
2021 से जो रूट ने 55 टेस्ट मैचों में 55.96 की औसत से 5149 रन बनाए हैं जिसमें 19 शतक शामिल हैं. वहीं न्यूजीलैंड के केन विलियमसन ने 23 मैचों में 61.51 की शानदार औसत से 2399 रन बनाए हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ ने 41 टेस्ट मैचों में 3034 रन बनाए हैं. विराट ने 36 टेस्ट मैचों में मात्र 3 शतकों और 31.86 की औसत के साथ 1912 रन बनाए हैं. लिहाजा इन चार बल्लेबाजों में विराट टेस्ट में पिछड़ रहे हैं.
टेस्ट में विराट इन सबसे नीचे जरूर आ गए हैं, लेकिन व्हाइट बॉल की क्रिकेट में विराट इन सभी से मीलों आगे हैं. 2021 से विराट ने 51 वनडे खेले हैं, जिसमें उनके बल्ले से 50.97 की औसत से 2141 रन निकले हैं. इसमें विश्वकप 2023 के शानदार 765 रन भी शामिल.हैं. इस दौरान जो रूट ने 28 मुकाबलों में 37 की औसत ने 897 रन बनाए हैं. केन विलियमसन ने 22 मैचों में 62.47 की औसत से 1062 रन बनाए हैं. वहीं स्टीव स्मिथ ने 41 मैचों में 1422 रन बनाए हैं.
विराट के रनों की रफ्तार जरूर कम हो गई हो लेकिन प्रति इनिंग्स रिकॉर्ड अभी भी शानदार है. स्टीव स्मिथ ने पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी पारी में क्रमश: 84.54, 50.91, 40.74, 31.44 की औसत से रन बनाए हैं. वहीं अपने करियर के सबसे शानदार फॉर्म में चल रहे जो रूट ने 49.80, 60.64, 48.06, 42.10 की औसत से रन बनाए हैं. न्यूजीलैंड के केन विलियमसन की 49.52, 64.54, 51.48, 51.57 की औसत रही है. वहीं विराट कोहली ने इस सभी पारियों में 45.67, 61.78, 35.98, 42.38 की औसत से रन बनाए हैं. लिहाजा फॉर्म में आई गिरावट के बाद भी विराट की औसत तकरीबन एक जैसी ही है.
वनडे में विराट ही सम्राट -
टेस्ट में गिरते आंकड़ों के ग्राफ को वनडे मैचों का सहारा मिलता है जहां विराट इन सभी बल्लेबाजों से मीलों आगे हैं. विराट ने रनों का अंबार खड़ा किया है. वे अपने समकालीन बल्लेबाजों को काफी पीछे छोड़ चुके हैं. विराट ने विदेश में खेले गए वनडे मैचों में 54.58 की औसत से 5394 रन बनाए हैं. ये स्टीव स्मिथ के कुल वनडे रनों से मात्र 406 रन कम है. विराट ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 64 की औसत से 8064 रन बनाए हैं, ये जो रूट के कुल वनडे रनों से 1205 रन ज्यादा है, केन विलियमसन के कुल वनडे रनों से 829 रन ज्यादा है और स्टीव स्मिथ के कुल वनडे रनों से 2264 रन ज्यादा है. केन विलियमसन, जो रूट और स्टीव स्मिथ ने कुल मिला कर 44 वनडे शतक बनाए हैं वहीं विराट कोहली ने वनडे में अकेले 51 शतक लगाए हैं.
एक खास बात जो विराट को सचिन से भी आगे रखती है वो है उनकी लक्ष्य का पीछा करने की आदत. विराट दुनिया के सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में भी शामिल हैं तो फिनिश करने वालों में भी विराट का नाम आता है. विराट ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 167 मैचों में 64 की औसत और 93.23 की स्ट्राइक रेट से 8064 रन बनाए हैं. वहीं सचिन ने 236 मैचों में 42.33 की औसत और 88.44 से 8720 रन बनाए हैं. वनडे में सफल रन चेज करने के मामले में भी विराट का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है. विराट ने सफल रन चेज करते हुए 5786 रन बनाए हैं इस दौरान उनका औसत 90.1 का रहा. उनसे बेहतर औसत सिर्फ वेस्ट इंडीज के शे होप, भारत के महेंद्र सिंह धोनी और जिम्बावे के सिकंदर रजा का ही है. इस लिस्ट में सचिन तेंडुलकर टॉप 10 में भी नहीं आते हैं.
कप्तानी में कोई नहीं दूर दूर तक -
चारों खिलाड़ियों की तुलना में विराट सबसे ज्यादा मारक कप्तान हुए हैं. यहां उनके आंकड़ों से ज्यादा उनके प्रभाव की बात करनी जरूरी हो जाती है. विराट को 2014 में टेस्ट की कप्तानी मिली, उसके बाद से विराट ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल दी. विराट ने तेज गेंदबाजों की एक ऐसी फौज तैयार की जिसका फायदा भारतीय क्रिकेट को आने वाले कई सालों तक होने वाला है. विराट की कप्तानी में भारत ने घरेलू मैदानों को किले में तब्दील किया था, एक ऐसा किला जिसे भेदना असंभव था. विराट की बल्लेबाजी पर कभी कप्तानी का दबाव नहीं दिखा.
बतौर कप्तान विराट ने 68 टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिसमें 40 टेस्ट में जीत मिली. SENA (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया) देशों में विराट एशिया के सबसे बेहतरीन कप्तान साबित हुए. विराट की कप्तानी में भारत ने 24 टेस्ट मैचों में से 7 में जीत दर्ज की, ये किसी भी भारतीय कप्तान द्वारा इन देशों में सबसे अधिक है. इसके अलावा पाकिस्तान ने वसीम अकरम और जावेद मिंयादाद की कप्तानी में 4 मैच जीते हैं. विराट ने विदेश में कुल 16 टेस्ट मैच जीते हैं. इनमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2018 में भारत ने पहली बार उनके घर पर सीरीज जीती थी. इसके अलावा बतौर कप्तान विराट ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2014 में 4 मैचों में 86.50 की औसत से 692 रन बनाए थे. इनमें 4 शतक भी शामिल था. उस सीरीज में विराट के बाद मुरली विजय ने 60 औसत से 482 रन बनाए थे. इसके अलावा 2018 में इंग्लैंड की धरती पर खेली गई टेस्ट सीरीज में विराट के बल्ले से 5 टेस्ट मैचों की 10 पारियों में 59.30 की शानदार औसत से 593 रन आए थे. विराट के बाद उस सीरीज में भारत की तरफ से राहुल ने सबसे ज्यादा 299 रन बनाए थे. दोनों के बीच का ये अंतर ये साफ बता रहा है कि अपने कप्तानी के समय भी विराट ने टीम पर सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ा.
घर पर विराट कोहली को मात देना लगभग असंभव था. उन्होंने भारत में 24 टेस्ट मैच जीते हैं. विराट ने घर पर 11 सीरीज में भारत की कप्तानी की है, इस दौरान वे सिर्फ दो टेस्ट मैच हारे हैं. विराट सिर्फ कप्तान ही नहीं थे वे टेस्ट के सबसे डॉमिनेटिंग कप्तान थे. उनकी कप्तानी में भारत ने घर पर जो 24 टेस्ट जीते हैं उसमें से 9 टेस्ट पारी के अंतर से और इतने ही टेस्ट 150 रन से ज्यादा के अंतर से जीते हैं. विराट की कप्तानी में भारत सबसे खतरनाक घरेलू टीम बन गई थी जो अजेय थी.
वनडे में विराट ने 95 मैचों में कप्तानी की है इस दौरान उन्होंने 72.65 की शानदार औसत से 5449 रन बनाए हैं. कप्तानी के समय बतौर बल्लेबाज विराट की बल्लेबाजी और निखर कर सामने आई. विराट की कप्तानी में भारत ने 65 मैचों में जीत दर्ज की. विराट ने कप्तान रहते हुए जहां सामने से मोर्चा संभाले रखा वहीं, विलियमसन और स्मिथ ने क्रमश: 51.35 और 43.65 की औसत से रन बनाए हैं. ये आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि वनडे में विराट ही सम्राट हैं, कोई भी खिलाड़ी इनके आसपास भी नहीं है.
सचिन तेंदुलकर भी थे ऑल फॉर्मेट ग्रेट -
जैसे विराट कोहली को अपने समय के महान बल्लेबाजों से चुनौती मिल रही है और खिलाड़ी विराट को पीछे छोड़ रहे हैं, उसी तरह सचिन तेंदुलकर को अपने ही टीम के खिलाड़ी राहुल द्रविड़ की चुनौती मिली थी. द्रविड़ ने टेस्ट में सचिन से अधिक प्रभावी पारियां खेलीं.
सचिन को अपने समय का महान बल्लेबाज इसलिए कहा जाता था क्योंकि सचिन के आंकड़े वनडे और टेस्ट दोनों में ही शानदार थे. अगर टेस्ट और वनडे दोनों को अलग कर के देखा जाए तो टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से ज्यादा प्रभाव राहुल द्रविड़ का रहा है. राहुल द्रविड़ ने टेस्ट में सचिन ने 36 मैच कम खेले लेकिन उनका औसत भी 52.3 का था. तेंदुलकर ने दो बार टेस्ट करियर के शबाब पर पहुंचे पहली बार 1996 से 1999 तक. इस दौरान उन्होंने 35 टेस्ट मैचों में 3358 रन बनाए. इसके बाद 2008 से 2011 तक सचिन दूसरी बार छलांग लगाई, इस दौरान सचिन ने 42 टेस्ट मैचों में 3922 रन बनाए इस दौरान उनकी औसत 59.4 की थी. वहीं द्रविड़ ने 2003 से 2004 के दौरान 17 टेस्ट मैच खेले और 79.5 की औसत से 1749 रन बनाए. इस दौरान द्रविड़ ने रावलपिंडी में पाकिस्तान के खिलाफ 270 और एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 233 और 72 रनों की ऐतिहासिक पारी भी खेली थी. राहुल द्रविड़ टेस्ट मैचों में सचिन से ज्यादा खतरनाक थे. लेकिन वनडे और टेस्ट दोनों के रिकॉर्ड को देखा जाए तो सचिन दुनिया में सबसे आगे थे.
विराट की तरह ही सचिन भी अपने समय के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज थे. सचिन ने वनडे में अपने समकालीन खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं. सचिन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 47.34 की औसत से 9706 रन बनाए हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग 42.09 की औसत से 8630 रन बनाए हैं. जबकि ब्रायन लारा ने इस दौरान 38.30 की औसत से 4980 और श्रीलंका के कुमार संगाकारा ने 43.04 की औसत से 8834 रन बनाए हैं. लक्ष्य का पीछा करते हुए सचिन ने जहां 42.33 की औसत से रन बनाए हैं, इस मामले में लारा सचिन से थोड़े आगे हैं. लारा ने 42.71 की औसत से दूसरी पारी में रन बनाए हैं.
वनडे में सचिन ने कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं, शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 143 रन हों, या विश्वकप में पाकिस्तान के खिलाफ बनाए गए 98 रन, ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहला दोहरा शतक हो या मीरपुर में बंग्लादेश के खिलाफ शतकों का शतक, सचिन अपने समय के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज थे.
टेस्ट और वनडे दोनों ही प्रारूपों में सचिन और विराट ने समान रूप से लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है. दोनों ही बल्लेबाजों के क्रिकेट जीवन में उतार-चढ़ाव आए लेकिन दोनों ही बल्लेबाजों ने वापसी की और फिर से क्रिकेट के शिखर पर पहुंच गए. सचिन और विराट की तुलना में अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि सचिन के समय अच्छे गेंदबाज थे और विराट को क्रिकेट में आए बदलावों का फायदा मिला है. लेकिन विराट ने भी अपने समय में दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाजों को काफी पीछे छोड़ दिया है.
हर समय की क्रिकेट अलग तरह से खेली जाती है, तर्क के रूप में ये भी कहा जा सकता है कि वेस्टइंडीज के विवियन रिचर्ड्स जैसा वनडे में बल्लेबाज नहीं आया जो अपने दम पर मैच का रुख पलट सकता था. लेकिन वो समय दूसरा था रिचर्ड्स को भी वेस्टइंडीज की पेस बैट्री न खेलने का सौभाग्य मिला था, लेकिन फिर भी रिचर्ड्स जैसी डॉमिनेटिंग क्रिकेट उस समय शायद ही किसी ने खेली हो. रिचर्ड्स के बाद सचिन ने उस परंपरा को जारी रखा और अब विराट उस परंपरा को उससे भी आगे ले जा चुके हैं. हर युग का अपना एक हीरो होता है और इस युग के हीरो बिना किसी विवाद के विराट ही हैं.
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Source: IOCL
















