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जब इंदिरा ने पाकिस्तान को तोड़ा था
उरी आतंकी हमले में 18 सैनिक शहीद हुए, इन कुर्बानियों के बाद हर कोई पाकिस्तान को जवाब देने की बात कर रहा है. हालांकि जंग में जाने का फैसला ना तो आसान होता है और ना ही जल्दबाजी में लिया जाता है. ऐसे नाजुक वक्त में प्रधानमंत्री मोदी को लोग पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की याद भी दिला रहे हैं जिन्होंने 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी थी और उसे धूल चटाई. आप भी जानिए कि कैसे इंदिरा ने तोड़ा था पाकिस्तान?
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पाकिस्तानी कमांडर नियाजी ने पहले लेफ्टिनेंट जनरल अरोड़ा के सामने सरेंडर के कागज पर दस्तखत किए और फिर अपने बिल्ले उतारे. सरेंडर के प्रतीक के तौर पर नियाजी ने अपना रिवॉल्वर जनरल अरोड़ा के हवाले कर दिया. पाकिस्तान के सरेंडर के साथ ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ये एलान कर दिया. भारत ने सिर्फ 14 दिन में पाकिस्तानी फौज को हथियार डालने के लिए मजबूर कर दिया और इस तरह इंदिरा ने पाकिस्तान को तोड़ दिया उसके 2 टुकड़े कर दिए.
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पाकिस्तान की सरकार और सेना पूर्वी पाकिस्तान में रहने वाले अपने ही देश के लोगों पर जुल्म कर रही थी, बेगुनाह लोगों की हत्या कर रही थी और ये सब सिर्फ इसलिए क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान के लोग पाकिस्तान की सेना के जुल्म के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. उनकी आवाज दबाने के लिए पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान में नरसंहार शुरू कर दिया था. अपनी जान बचाने के लिए लोग वहां से भागने लगे - ये शरणार्थी पूर्वी पाकिस्तान की सीमा से लगे भारतीय राज्यों में पहुंच गए. पूर्वी पाकिस्तान के करीब 10 लाख लोग भारत में शरणार्थी बनकर आ गए. भारत की प्रधानमंत्री होने के नाते इंदिरा पर इस बात का दबाव बढ़ रहा था कि वो जल्द से जल्द इस मसले का हल निकालें और जरूरी कार्रवाई करें. इसीलिए इंदिरा ने एक तरफ भारतीय फौज को युद्ध की तैयारी करने का आदेश दे दिया और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाने की कोशिश शुरू कर दी.
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