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जन्म के वक्त हुई बच्चों की अदला बदली, 5 महीने बाद असली मांओं से मिलेंगे

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लेकिन साथ ही दोनों पीड़ित परिवार अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई भी चाहते हैं. पुलिस और अस्पताल इस मामले की जांच कर रहे हैं. इसकी जांच के लिए अस्पताल ने एक जांच टीम बनाई है. हमने जब अस्पताल का पक्ष लेना चाहा तो हमें बताया गया कि जांच टीम ही इस घटना पर पक्ष रखेगी. लेकिन जांच टीम के प्रमुख के देश से बाहर होने के कारण हम उनका पक्ष नहीं ले पाए. बहरहाल इस घटना के प्रकाश में आने से शिमला सहित हिमाचल में लोग सकते में हैं और सबको इसी का इंतजार है कि इस मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है?
लेकिन साथ ही दोनों पीड़ित परिवार अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई भी चाहते हैं. पुलिस और अस्पताल इस मामले की जांच कर रहे हैं. इसकी जांच के लिए अस्पताल ने एक जांच टीम बनाई है. हमने जब अस्पताल का पक्ष लेना चाहा तो हमें बताया गया कि जांच टीम ही इस घटना पर पक्ष रखेगी. लेकिन जांच टीम के प्रमुख के देश से बाहर होने के कारण हम उनका पक्ष नहीं ले पाए. बहरहाल इस घटना के प्रकाश में आने से शिमला सहित हिमाचल में लोग सकते में हैं और सबको इसी का इंतजार है कि इस मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है?
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गोद में खेल रही बेटी के लिए शीतल ठाकुर कहती हैं
गोद में खेल रही बेटी के लिए शीतल ठाकुर कहती हैं "इसे कब भूख लगती है, कब सोती है ये मुझे पता है ऐसे ही मेरे बेटे के बारे में उनको पता होगा. शुरू में मुश्किल तो आएगी. मैंने अपने बेटे को देखा भी नहीं है." बातें करते हुए जितेंद्र ठाकुर भावुक हो गए. उन्होंने हमसे अनुरोध किया कि हम उनकी पत्नी से नाम मिलें क्योंकि घर में रोना धोना मचा है. "खून का ना सही दूध का रिश्ता तो है" दोनों परिवार ये कह रहे हैं कि दोनों बच्चों का जन्मदिन हर साल साथ मनाएंगे और इस रिश्ते को दोनों परिवार ताउम्र निभाएंगे.
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कोर्ट ने दोनों परिवार को आपसी सहमति से बच्चों की अदला-बदली का सुझाव दिया है जिससे दोनों परिवार सहमत हैं. 26 अक्टूबर को दोनों परिवार जितेंद्र ठाकुर के घर मिलेंगे जहां बच्चों को अन्न खिलाया जाएगा. पहली बार अनमोल अपनी असली मां की गोद में जाएगी तो नित्यांश जन्म देने वाली मां के सीने से लगेगा. अगले दिन कोर्ट में मामले की सुनवाई भी है. दोनों परिवार बच्चों की अदला-बदली कोर्ट के सामने ही करना चाहते हैं. लेकिन ये अदला-बदली उन्हें कलेजे पर पत्थर रख कर करनी होगी. जिस बच्चे को अपना समझ कर 5 महीने सीने से लगाए रखा उसे दूसरे को सौंपने का दर्द क्या होता है ये केवल दोनों माएं ही समझ सकती हैं.
कोर्ट ने दोनों परिवार को आपसी सहमति से बच्चों की अदला-बदली का सुझाव दिया है जिससे दोनों परिवार सहमत हैं. 26 अक्टूबर को दोनों परिवार जितेंद्र ठाकुर के घर मिलेंगे जहां बच्चों को अन्न खिलाया जाएगा. पहली बार अनमोल अपनी असली मां की गोद में जाएगी तो नित्यांश जन्म देने वाली मां के सीने से लगेगा. अगले दिन कोर्ट में मामले की सुनवाई भी है. दोनों परिवार बच्चों की अदला-बदली कोर्ट के सामने ही करना चाहते हैं. लेकिन ये अदला-बदली उन्हें कलेजे पर पत्थर रख कर करनी होगी. जिस बच्चे को अपना समझ कर 5 महीने सीने से लगाए रखा उसे दूसरे को सौंपने का दर्द क्या होता है ये केवल दोनों माएं ही समझ सकती हैं.
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इस दौरान भी दोनों परिवार एक-दूसरे से नहीं मिल पाए. जितेंद्र ठाकुर निश्चिन्त थे लेकिन अनिल ठाकुर के पास तो 2-2 डीएनए रिपोर्ट थी.निजी लैब में करवाए गये डीएनए रिपोर्ट से अनिल और शीतल को ये तो पता चल गया था कि उनके घर में पल रही बेटी उनकी नहीं है. लेकिन अस्पताल से लेकर पुलिस तक उन्हें निराशा हाथ लग रही थी. आखिरकार उन्होंने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया और दोनों परिवारों का आधिकारिक डीएनए टेस्ट करवाया गया, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो गया.
इस दौरान भी दोनों परिवार एक-दूसरे से नहीं मिल पाए. जितेंद्र ठाकुर निश्चिन्त थे लेकिन अनिल ठाकुर के पास तो 2-2 डीएनए रिपोर्ट थी.निजी लैब में करवाए गये डीएनए रिपोर्ट से अनिल और शीतल को ये तो पता चल गया था कि उनके घर में पल रही बेटी उनकी नहीं है. लेकिन अस्पताल से लेकर पुलिस तक उन्हें निराशा हाथ लग रही थी. आखिरकार उन्होंने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया और दोनों परिवारों का आधिकारिक डीएनए टेस्ट करवाया गया, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो गया.
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डीएनए रिपोर्ट से शीतल ठाकुर का शक सही निकला. शीतल और अनिल ठाकुर अस्पताल के पास दौड़े लेकिन अस्पताल ये मानाने को तैयार नहीं हुआ कि उनके यहां बच्चों की अदला-बदली हुई है. अनिल पुलिस के पास भी गए. दुबारा डीएनए जांच करवाया लेकिन अस्पताल अपनी जिद पर अड़ा था.दूसरी तरफ इन बातों से अंजान जितेंद्र ठाकुर और अंजना, अनिल और शीतल के बेटे को पाल रहे थे. जबकि, जितेंद्र-अंजना की बेटी अनिल के यहां थी. डेढ़ महीने बाद अचानक एक दिन पुलिस जितेंद्र ठाकुर के घर पहुंची. पुलिस ने उनसे डीएनए जांच करवाने को कहा लेकिन जितेंद्र और उनकी पत्नी को यकीन नहीं हुआ. वो अस्पताल पहुंचे. एक बार फिर अस्पताल ने गड़बड़ी की बात से इंकार करते हुए जितेंद्र को डीएनए जांच करवाने से मना कर दिया. जितेंद्र ठाकुर के पास शक करने की कोई वजह भी नहीं थी. उन्होंने डीएनए जांच से इंकार कर दिया.
डीएनए रिपोर्ट से शीतल ठाकुर का शक सही निकला. शीतल और अनिल ठाकुर अस्पताल के पास दौड़े लेकिन अस्पताल ये मानाने को तैयार नहीं हुआ कि उनके यहां बच्चों की अदला-बदली हुई है. अनिल पुलिस के पास भी गए. दुबारा डीएनए जांच करवाया लेकिन अस्पताल अपनी जिद पर अड़ा था.दूसरी तरफ इन बातों से अंजान जितेंद्र ठाकुर और अंजना, अनिल और शीतल के बेटे को पाल रहे थे. जबकि, जितेंद्र-अंजना की बेटी अनिल के यहां थी. डेढ़ महीने बाद अचानक एक दिन पुलिस जितेंद्र ठाकुर के घर पहुंची. पुलिस ने उनसे डीएनए जांच करवाने को कहा लेकिन जितेंद्र और उनकी पत्नी को यकीन नहीं हुआ. वो अस्पताल पहुंचे. एक बार फिर अस्पताल ने गड़बड़ी की बात से इंकार करते हुए जितेंद्र को डीएनए जांच करवाने से मना कर दिया. जितेंद्र ठाकुर के पास शक करने की कोई वजह भी नहीं थी. उन्होंने डीएनए जांच से इंकार कर दिया.
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दूसरा परिवार है जितेंद्र ठाकुर और अर्चना ठाकुर का. इनका आठ साल का एक बेटा है. दोनों बेटी चाहते थे. अर्चना ने बेटी को जन्म भी दिया लेकिन लेकिन उन्हें बेटा मिल गया. शीतल ठाकुर को अस्पताल में ही शक हुआ था कि उन्हें बेटे की जगह किसी की बेटी दे दी गई है. उन्होंने ये बात तब उठाई भी लेकिन शीतल की बात पर किसी ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया. अगले दिन दोनों परिवार अस्पताल से घर चले आए. लेकिन शीतल ठाकुर का शक पक्का था. उन्होंने अपने पति और घरवालों से बात कर बच्चे का और अपना डीएनए जांच करवाया. नतीजा हैरान करने वाला था क्योंकि शीतल का शक सही था. बेटी का डीएनए मां से नहीं मिल रहा था. अब सवाल था कि अगर ये उनका बच्चा नहीं तो उनका बच्चा है कहां?
दूसरा परिवार है जितेंद्र ठाकुर और अर्चना ठाकुर का. इनका आठ साल का एक बेटा है. दोनों बेटी चाहते थे. अर्चना ने बेटी को जन्म भी दिया लेकिन लेकिन उन्हें बेटा मिल गया. शीतल ठाकुर को अस्पताल में ही शक हुआ था कि उन्हें बेटे की जगह किसी की बेटी दे दी गई है. उन्होंने ये बात तब उठाई भी लेकिन शीतल की बात पर किसी ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया. अगले दिन दोनों परिवार अस्पताल से घर चले आए. लेकिन शीतल ठाकुर का शक पक्का था. उन्होंने अपने पति और घरवालों से बात कर बच्चे का और अपना डीएनए जांच करवाया. नतीजा हैरान करने वाला था क्योंकि शीतल का शक सही था. बेटी का डीएनए मां से नहीं मिल रहा था. अब सवाल था कि अगर ये उनका बच्चा नहीं तो उनका बच्चा है कहां?
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आपके दिमाग में भी सवाल उठ रहा होगा कि आखिर शीतल ठाकुर को शक हुआ कैसे? आखिर उन्हें कैसे अंदेशा हुआ कि बच्चे की अदला-बदली हुई है? दरअसल, कमला नेहरू हॉस्पिटल में 26 मई 2016 की रात 11 बजे के आसपास कुल 7 बच्चों ने जन्म लिया था. 6 लड़की और 1 लड़का. इन्हीं में से 2 बच्चों की अदला-बदली हो गई थी. जिस महिला यानि शीतल ठाकुर ने बेटे को जन्म दिया था उन्हें अस्पताल के लेबर-रूम में मौजूद एक सफाईकर्मी महिला ने बेटा होने की बधाई दी थी. हालांकि अस्पताल ने उन्हें बेटी दी. उन्होंने ये बात उसी वक्त उठाई लेकिन किसी ने यकीन नहीं किया कि ऐसा हो सकता है. शीतल खुद भी नर्स हैं ऐसे में उन्हें भी यकीन नहीं हुआ कि इतना बड़ा धोखा हो सकता है. लेकिन सफाई कर्मी की बात शीतल के दिमाग में अटकी रह गई. बाद में इसी शक ने पूरे मामले का खुलासा किया.
आपके दिमाग में भी सवाल उठ रहा होगा कि आखिर शीतल ठाकुर को शक हुआ कैसे? आखिर उन्हें कैसे अंदेशा हुआ कि बच्चे की अदला-बदली हुई है? दरअसल, कमला नेहरू हॉस्पिटल में 26 मई 2016 की रात 11 बजे के आसपास कुल 7 बच्चों ने जन्म लिया था. 6 लड़की और 1 लड़का. इन्हीं में से 2 बच्चों की अदला-बदली हो गई थी. जिस महिला यानि शीतल ठाकुर ने बेटे को जन्म दिया था उन्हें अस्पताल के लेबर-रूम में मौजूद एक सफाईकर्मी महिला ने बेटा होने की बधाई दी थी. हालांकि अस्पताल ने उन्हें बेटी दी. उन्होंने ये बात उसी वक्त उठाई लेकिन किसी ने यकीन नहीं किया कि ऐसा हो सकता है. शीतल खुद भी नर्स हैं ऐसे में उन्हें भी यकीन नहीं हुआ कि इतना बड़ा धोखा हो सकता है. लेकिन सफाई कर्मी की बात शीतल के दिमाग में अटकी रह गई. बाद में इसी शक ने पूरे मामले का खुलासा किया.
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ये कहानी है पांच महीने के नित्यांश और अनमोल की. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के एक नामी सरकारी अस्पताल कमला नेहरू हॉस्पिटल में इन बच्चों का जन्म 26 मई 2016 को रात 11 बजे के लगभग एक साथ हुआ. लेकिन संयोग से बच्चों के जन्म के साथ ही एक गड़बड़ हुई. अस्पताल के कर्मचारियों से दोनों बच्चों की अदला बदली हो गई. दोनों बच्चे अपने असली माता-पिता की बजाय दूसरे को सौंप दिए गए. जबकि दोनों के परिवार वाले दूर-दूर तक एक दूसरे को नहीं जानते थे. लेकिन पांच महीने बाद अब दोनों बच्चे अपने असली माता-पिता के पास जाने वाले हैं. शिमला की इस घटना की चर्चा आज पूरे हिमाचल में हो रही है.
ये कहानी है पांच महीने के नित्यांश और अनमोल की. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के एक नामी सरकारी अस्पताल कमला नेहरू हॉस्पिटल में इन बच्चों का जन्म 26 मई 2016 को रात 11 बजे के लगभग एक साथ हुआ. लेकिन संयोग से बच्चों के जन्म के साथ ही एक गड़बड़ हुई. अस्पताल के कर्मचारियों से दोनों बच्चों की अदला बदली हो गई. दोनों बच्चे अपने असली माता-पिता की बजाय दूसरे को सौंप दिए गए. जबकि दोनों के परिवार वाले दूर-दूर तक एक दूसरे को नहीं जानते थे. लेकिन पांच महीने बाद अब दोनों बच्चे अपने असली माता-पिता के पास जाने वाले हैं. शिमला की इस घटना की चर्चा आज पूरे हिमाचल में हो रही है.
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आगे आपको बताएंगे कि इस अदला-बदली का खुलासा कैसे हुआ? उसके पहले दोनों परिवारों से मिलिए. पहला परिवार अनिल ठाकुर और शीतल ठाकुर का है. अनिल स्कूल में पढ़ाते हैं और शीतल अस्पताल में नर्स है. दोनों की एक 4 साल की बेटी भी है. 26 मई को शीतल ने बेटे को जन्म दिया लेकिन बच्चे की साफ़-सफाई के बाद अस्पताल में उसके गोद में बेटी आई जो अब पांच महीने की हो गई है.
आगे आपको बताएंगे कि इस अदला-बदली का खुलासा कैसे हुआ? उसके पहले दोनों परिवारों से मिलिए. पहला परिवार अनिल ठाकुर और शीतल ठाकुर का है. अनिल स्कूल में पढ़ाते हैं और शीतल अस्पताल में नर्स है. दोनों की एक 4 साल की बेटी भी है. 26 मई को शीतल ने बेटे को जन्म दिया लेकिन बच्चे की साफ़-सफाई के बाद अस्पताल में उसके गोद में बेटी आई जो अब पांच महीने की हो गई है.
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के एक बड़े सरकारी अस्पताल में पांच महीने पहले दो नवजात बच्चों की अदला-बदली की घटना हुई थी. अब पांच महीने बाद पीड़ित परिवार एक दूसरे को उनका असली बच्चा लौटाएंगे. लेकिन उससे पहले दोनों परिवारों के लिए ये वक्त काफी भावुक और मुश्किल भरा है. अगर अपने बच्चे से खून का रिश्ता है तो दूसरे से दूध का. आखिर कैसे हुआ इस अदला-बदली का खुलासा... जानिए क्या है पुरा मामला!
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के एक बड़े सरकारी अस्पताल में पांच महीने पहले दो नवजात बच्चों की अदला-बदली की घटना हुई थी. अब पांच महीने बाद पीड़ित परिवार एक दूसरे को उनका असली बच्चा लौटाएंगे. लेकिन उससे पहले दोनों परिवारों के लिए ये वक्त काफी भावुक और मुश्किल भरा है. अगर अपने बच्चे से खून का रिश्ता है तो दूसरे से दूध का. आखिर कैसे हुआ इस अदला-बदली का खुलासा... जानिए क्या है पुरा मामला!

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