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हिंदी न्यूज़फोटो गैलरीउत्तर प्रदेश और उत्तराखंडAdi Kailash Yatra: आदि कैलाश पर्वत के रहस्य तो सुने होंगे, ऐसे कर सकते हैं रोमांच से भरी यात्रा
Adi Kailash Yatra: आदि कैलाश पर्वत के रहस्य तो सुने होंगे, ऐसे कर सकते हैं रोमांच से भरी यात्रा
Written By : ABP Live | Updated at : 16 Jun 2022 01:24 PM (IST)
आदि कैलाश यात्रा
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Kailash Yatra: भारत में आस्था एक बड़ी भावना है. कई धर्म और उनसे जुड़े अनगिनत धर्मस्थल...जो ना सिर्फ इतिहास को अपने अंदर समेटे हैं बल्कि जिनकी मान्यता लाखों करोड़ों लोगों को जीवन पथ दिखाती है. रहस्यों से भरे कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां जा तो सकते हैं लेकिन ये यात्रा हर किसी के बस की बात नहीं है. ऐसी ही एक रोमांच और चुनौतियों से भरपूर यात्रा है आदि कैलाश पर्वत की. इस यात्रा में चुनौतियां भी हैं, रोमांच भी है और साथ ही बेहद खूबसूरत रास्तों से गुजरने का अनुभव भी. आज आपको आदि कैलाश यात्रा से जुड़ी हर बात बताएंगे ताकि आप जाना चाहें तो अपना सफर आराम से शुरू कर सकें....
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करीब 6 हजार मीटर की ऊंचाई पर मौजूद आदि कैलाश को छोटा कैलाश भी कहा जाता है. उत्तराखंड में मौजूद आदि कैलाश पर्वत तिब्बत के कैलाश मानसरोवर जितना ही खूबसूरत और प्राकृतिक नजारों के बीच मौजूद है. खास बात ये कि अगर कैलाश मानसरोवर जाना है तो यात्रियों को इसी रास्ते से होकर गुजरना होता है.
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उत्तराखंड के खूबसूरत जिले पिथौरागढ़ के सीमांत इलाके धारचूला से इस यात्रा की शुरुआत होती है. सड़क के रास्ते से आप धारचूला से तवाघाट पहुंचते हैं और यहीं से आदि कैलाश के लिए ट्रैकिंग की शुरुआत हो जाती है. थोड़ा ही सफर करने के बाद आपको नेपाल के अपि पर्वत की झलक दिखने लगती है. इस यात्रा का असली रोमांच शुरू होता है उस वक्त जब आप छियालेख चोटी पर पहुंचते हैं.
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यहां की मनमोहक खूबसूरती हर थकान को दूर कर देती है. बर्फ से ढके पहाड़, बुग्याल और रंगों से भरे फूल मन खुश कर देते हैं. इसके बाद अगले पड़ाव के लिए गर्बियांग से गुजरते हुए आप इतिहास की झलकियों से भी रूबरू होते हैं. हालांकि कुछ साल पहले ये छोटा सा गांव लैंडस्लाइड की चपेट में आ गया था लेकिन अभी भी घरों की नक्काशी देखकर आप चौंक जाएंगे.
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यहां से नाबी होते हुए यात्री गुंजी पहुंचते हैं. इसके बाद कालापानी नदी के रास्ते यात्री गुजरते हैं और इस दौरान नेपाल के अपि पर्वत को देख मन खुश हो जाता है. जिसके बाद यात्री कुंटी यांक्ति पहुंचते हैं. इस जगह का नाम पांडवों की मां कुंती के नाम पर रखा गया है.
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मान्यता है कि स्वर्ग यात्रा के दौरान पांडव अपनी मां के साथ यहां रुके थे. बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बसा ये गांव बेहद खूबसूरत है. करीब चार दिनों की यात्रा करने के बाद जब यात्री छह हजार मीटर की ऊंचाई पर मौजूद आदि कैलाश पर्वत पर पहुंचते हैं तो इसका सम्मोहन हर किसी पर होता ही है. आदि कैलाश के आधार पर स्थित धोती पार्वती झील आपको अलौकिक अनुभव में ले जाती है.
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कैसे और कब जाएं ? - उत्तराखंड में देहरादून या फिर पंतनगर तक आप फ्लाइट या ट्रेन के रास्ते जा सकते हैं. इसके बाद पिथौरागढ़ के धारचूला तक आपको पूरा रास्ता सड़क मार्ग से ही तय करना होगा. वहां से ट्रैकिंग की शुरुआत हो जाती है. सर्दियों और बरसात के मौसम में ये यात्रा संभव नहीं होती. ऐसे में गर्मियों के मौसम में जून से सितंबर तक यात्रा का सबसे उचित समय रहता है.
Published at : 16 Jun 2022 01:24 PM (IST)
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