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आलस को मानते हैं मानसिक बीमारी, जानें जापान की 7 आदतें जो लोगों को हमेशा रखती हैं एक्टिव
कई जापानी लोग इकिगाई की अवधारणा को एक सहारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जो उन्हें अलस में डूबने से बचाता है. इकिगाई जुनून, काबिलियत और आजीविका के बीच संतुलन को दर्शाता है.
पारंपरिक जापानी मान्यताओं में आलस को सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति के तौर पर देखा जाता है जो इंसान का फोकस, दिशा और अंदरूनी ताकत कमजोर कर देता है. इसी सोच के चलते लोग रोजमर्रा में ऐसी दिनचर्या अपनाते हैं, जिससे शारीरिक सक्रियता और मानसिक एकाग्रता बनी रहती है. इन आदतों की मदद से लोग तब भी संतुलन बनाए रखते हैं, जब उनका मोटिवेशन सबसे कम होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको ऐसी सात आदतों के बारे में बताते हैं, जो आलस को दूर रखने में मदद करती है.
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कई जापानी लोग इकिगाई की अवधारणा को एक सहारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जो उन्हें अलस में डूबने से बचाता है. इकिगाई जुनून, काबिलियत और आजीविका के बीच संतुलन को दर्शाता है. जिन लोगों को अपने जीवन का मकसद स्पष्ट होता है, वह दिन की शुरुआत टालने की बजाय उत्साह के साथ करते हैं. रिसर्च के अनुसार जीवन का स्पष्ट उद्देश्य मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाता है और अवसाद जैसी समस्याओं के खतरे को कम करता है.
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वहीं जापान की काइजेन पद्धति में बड़ी पैमाने पर बदलाव करने की बजाए, छोटे-छोटे सुधारों के माध्यम से निरंतर विकास किया जाता है. जैसे 1 मिनट की सफाई, 2 मिनट की वॉक यह छोटे काम दिमाग के लिए नजरअंदाज करना मुश्किल होते हैं और धीरे-धीरे आदत बन जाते हैं. यह तरीका टालमटोल को कम करने में मदद करता है.
Published at : 01 Jan 2026 09:01 AM (IST)
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