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ऋषि, मुनि, साधु, संत, संन्यासी और योगी में क्या अंतर होता है? जानिए आसान भाषा में!
Hinduism: हममें से ज्यादातर लोग ऋषि, मुनि, साधु, संत, योगी और संन्यासी को एक जैसा ही समझ लेते हैं, जबकि असल में ये सब अलग होते हैं. इनका कार्य, आध्यात्मिक ज्ञान, रहन-सहन सब कुछ अलग होता है.
ऋषि मुनि योगी साधु संन्यासी और संत में क्या अंतर है?
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ऋषि, मुनि, योगी, साधु, संत और संन्यासी के बीच अधिकतर लोग अंतर नहीं कर पाते हैं. आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के के जरिए इन सवाल का जवाब देंगे.
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ऋषि वे होते हैं, जिन्होंने कठिन तपस्या और ध्यान के जरिए ब्रह्मांडीय सत्य और वेदों के मंत्रों का साक्षात्कार किया. इसलिए ऋषियों को मंत्रद्रष्टा भी कहा जाता है. उन्होंने कई क्षेत्रों में शोध किए. जैसे- चरक ऋषि ने चरक संहिता रची थी, ठीक उसी तरह पतंजलि ऋषि ने योगसूत्र की रचना की. कणाद ऋषि ने ही सबसे पहले बताया था कि प्रत्येक वस्तु सूक्ष्म कणों से बनी हुई है, जिन्हें अणु कहा जाता है. ऋषियों को ज्ञान और तपस्या के आधार पर 4 वर्गों में बांटा गया.
Published at : 10 Sep 2025 08:30 AM (IST)
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