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Flu Prevention be Vaccine: फ्लू को हल्के में न लें, हर साल लगवाएं वैक्सीन

Flu Prevention be Vaccine: फ्लू को सामान्य सर्दी-जुकाम समझना सही नहीं है. हर साल फ्लू का टीका गंभीर संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद करता है और कई लोगों के लिए जरूरी माना जाता है.

Flu Prevention be Vaccine: फ्लू को सामान्य सर्दी-जुकाम समझना सही नहीं है. हर साल फ्लू का टीका गंभीर संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद करता है और कई लोगों के लिए जरूरी माना जाता है.

भारत में ज्यादातर लोग फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा को सिर्फ एक मौसमी बुखार या हल्की सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं जो कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है. हर साल खासकर बरसात और सर्दी के मौसम में हजारों लोग फ्लू की चपेट में आते हैं, फिर भी बहुत कम लोग इसकी वैक्सीन लगवाने के बारे में सोचते हैं. पोलियो, खसरा और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के टीके तो लोग आसानी से लगवा लेते हैं, लेकिन फ्लू का सालाना टीका आज भी सबसे कम इस्तेमाल होने वाले टीकों में से एक है. आइए जानते हैं कि फ्लू को हल्के में क्यों नहीं लेना चाहिए और हर साल वैक्सीन क्यों जरूरी है. 

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सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि लोग फ्लू को आम सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं. जबकि डॉक्टरों के मुताबिक फ्लू आम सर्दी-जुकाम से बिल्कुल अलग वायरस से होता है और यह काफी गंभीर रूप ले सकता है.  स्वस्थ लोग तो कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है, उनके लिए यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, दिल की बीमारी, किडनी और लिवर से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को इससे ज्यादा खतरा रहता है. यही वजह है कि इसे हल्के में लेना सही नहीं है. 
सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि लोग फ्लू को आम सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं. जबकि डॉक्टरों के मुताबिक फ्लू आम सर्दी-जुकाम से बिल्कुल अलग वायरस से होता है और यह काफी गंभीर रूप ले सकता है.  स्वस्थ लोग तो कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है, उनके लिए यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, दिल की बीमारी, किडनी और लिवर से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को इससे ज्यादा खतरा रहता है. यही वजह है कि इसे हल्के में लेना सही नहीं है. 
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बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर फ्लू हो भी जाए तो दवा लेकर ठीक हो सकते हैं, इसलिए वैक्सीन लगवाने की क्या जरूरत है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है. फ्लू एक ऐसी बीमारी है जिसे वैक्सीन से रोका जा सकता है, और टीका लगवाने से गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मौत तक के खतरे में काफी कमी आती है. यह वायरस निमोनिया जैसी बीमारी को भी जन्म दे सकता है और पहले से मौजूद अस्थमा या दिल की बीमारी को और बढ़ा सकता है, जिस वजह से कई बार अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है.
बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर फ्लू हो भी जाए तो दवा लेकर ठीक हो सकते हैं, इसलिए वैक्सीन लगवाने की क्या जरूरत है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है. फ्लू एक ऐसी बीमारी है जिसे वैक्सीन से रोका जा सकता है, और टीका लगवाने से गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मौत तक के खतरे में काफी कमी आती है. यह वायरस निमोनिया जैसी बीमारी को भी जन्म दे सकता है और पहले से मौजूद अस्थमा या दिल की बीमारी को और बढ़ा सकता है, जिस वजह से कई बार अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है.
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एक और बड़ी गलतफहमी यह है कि फ्लू का टीका लगवाने से खुद फ्लू हो जाता है. डॉक्टर साफ तौर पर कहते हैं कि यह वैक्सीन फ्लू का कारण नहीं बन सकती. हां, कुछ लोगों को टीका लगने की जगह हल्का दर्द या सूजन, हल्का बुखार, बदन दर्द या एक-दो दिन की थकान महसूस हो सकती है. लेकिन ये लक्षण अस्थायी होते हैं और इसका मतलब है कि शरीर का इम्यून सिस्टम टीके पर सही तरीके से प्रतिक्रिया दे रहा है. इसे बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की सुरक्षा तैयार होने का संकेत समझना चाहिए. 
एक और बड़ी गलतफहमी यह है कि फ्लू का टीका लगवाने से खुद फ्लू हो जाता है. डॉक्टर साफ तौर पर कहते हैं कि यह वैक्सीन फ्लू का कारण नहीं बन सकती. हां, कुछ लोगों को टीका लगने की जगह हल्का दर्द या सूजन, हल्का बुखार, बदन दर्द या एक-दो दिन की थकान महसूस हो सकती है. लेकिन ये लक्षण अस्थायी होते हैं और इसका मतलब है कि शरीर का इम्यून सिस्टम टीके पर सही तरीके से प्रतिक्रिया दे रहा है. इसे बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की सुरक्षा तैयार होने का संकेत समझना चाहिए. 
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पोलियो या खसरे के टीके की तरह फ्लू का टीका जीवन में एक बार लगवाकर छुट्टी नहीं मिल जाती. दरअसल फ्लू का वायरस लगातार अपना रूप बदलता रहता है और हर सीजन में नए-नए स्ट्रेन फैलते हैं, जिस वजह से पुराने टीके का असर भी समय के साथ कम हो जाता है. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि हर साल नया टीका जरूर लगवाना चाहिए, जो उस समय फैल रहे वायरस के स्ट्रेन के हिसाब से बनाया गया हो. साथ ही यह गलतफहमी भी गलत है कि सिर्फ बच्चों और बुजुर्गों को ही यह टीका चाहिए. 18 साल से ऊपर के हर किसी को सालाना फ्लू का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है, खासकर 50 साल से ऊपर के लोगों, गर्भवती महिलाओं, स्वास्थ्यकर्मियों और डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों के लिए यह बेहद जरूरी है. 
पोलियो या खसरे के टीके की तरह फ्लू का टीका जीवन में एक बार लगवाकर छुट्टी नहीं मिल जाती. दरअसल फ्लू का वायरस लगातार अपना रूप बदलता रहता है और हर सीजन में नए-नए स्ट्रेन फैलते हैं, जिस वजह से पुराने टीके का असर भी समय के साथ कम हो जाता है. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि हर साल नया टीका जरूर लगवाना चाहिए, जो उस समय फैल रहे वायरस के स्ट्रेन के हिसाब से बनाया गया हो. साथ ही यह गलतफहमी भी गलत है कि सिर्फ बच्चों और बुजुर्गों को ही यह टीका चाहिए. 18 साल से ऊपर के हर किसी को सालाना फ्लू का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है, खासकर 50 साल से ऊपर के लोगों, गर्भवती महिलाओं, स्वास्थ्यकर्मियों और डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों के लिए यह बेहद जरूरी है. 
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डॉक्टरों के मुताबिक फ्लू का मौसम शुरू होने से पहले हर साल यह टीका लगवा लेना चाहिए. भारत के ज्यादातर हिस्सों में इसके लिए सबसे सही समय अप्रैल या मई का महीना माना जाता है, यानी मानसून शुरू होने से पहले, क्योंकि इसी समय के बाद फ्लू के मामले बढ़ने लगते हैं.  समय से पहले टीका लगवाने से शरीर को अच्छी इम्युनिटी बनाने का पर्याप्त समय मिल जाता है. आमतौर पर डॉक्टर क्वाड्रिवैलेंट फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं, जो उस सीजन में फैलने की आशंका वाले चार अलग-अलग वायरस स्ट्रेन से बचाव करती है.
डॉक्टरों के मुताबिक फ्लू का मौसम शुरू होने से पहले हर साल यह टीका लगवा लेना चाहिए. भारत के ज्यादातर हिस्सों में इसके लिए सबसे सही समय अप्रैल या मई का महीना माना जाता है, यानी मानसून शुरू होने से पहले, क्योंकि इसी समय के बाद फ्लू के मामले बढ़ने लगते हैं.  समय से पहले टीका लगवाने से शरीर को अच्छी इम्युनिटी बनाने का पर्याप्त समय मिल जाता है. आमतौर पर डॉक्टर क्वाड्रिवैलेंट फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं, जो उस सीजन में फैलने की आशंका वाले चार अलग-अलग वायरस स्ट्रेन से बचाव करती है.

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