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40% पुरुष होते हैं अपनी 'इनफर्टिलिटी' से अनजान
Written By : आईएएनएस | Updated at :
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डॉ. सागरिका के अनुसार, टेस्टिकुलर स्पर्म रिट्रिवल एस्पिरेशन आर्टिफिशियल तकनीकों में सबसे नयी और सबसे विकसित तकनीक है. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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नर्व्स सिस्टम से संबंधित कुछ विकार भी शुक्राणुओं की गतिशीलता को बाधित कर सकते हैं. दुर्घटनाओं या सर्जरी के कारण रीढ़ की हड्डी को चोट पहुंचने जैसी नर्व्स की क्षति जैसी स्थितियां भी शुक्राणुओं को परिवहन करने की नलिकाओं की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं. ऐसा पाया गया है कि एंटी डिप्रेशन की दवाइयां भी नर्व्स सिस्टम को प्रभावित करती हैं. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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डॉ. सागरिका का कहना है कि शुक्राणु का उत्पादन टेस्टिकल्स में होता है और इसे परिपक्व होने में 72 दिन का समय लगता है. ट्यूब में कुछ अवरोध होने पर स्खलित वीर्य में शुक्राणुओं की पूरी तरह से कमी हो सकती है. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिस्आर्डर के कारण ज्यादातर पुरुषों में शुक्राणु के एकाग्रता में कमी आ जाती है और शुक्राणु महिला की कोख तक सुरक्षित रूप से पहुंचने में अक्षम होता है. वर्ष 2015-2017 के बीच किए गए सर्वे के अनुसार, पांच पुरुषों में से एक पुरुष में स्पर्म ट्रांसपोर्ट की समस्या थी. सर्वे में उन पुरुषों को भी शामिल किया था जिन्होंने वेसेक्टॉमी करा ली थी, लेकिन अब बच्चे पैदा करना चाहते थे. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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मेल इनफर्टिलिटी के लिए तीन प्रमुख कारक हो सकते हैं. ओलिगोजोस्पर्मिया (शुक्राणुओं की कम संख्या), टेराटोजोस्पर्मिया (शुक्राणुओं की असामान्य रूपरेखा) और स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिस्आर्डर. मेल फैक्टर इनफर्टिलिटी के करीब 20 प्रतिशत मामलों में स्पर्म ट्रांसपोर्ट डिस्आर्डर ही जिम्मेदार होते हैं. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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शुक्राणुओं की गुणवत्ता की जांच केवल इनफर्टिलिटी के कारण को जानने के लिए किए जाने वाले टेस्ट के माध्यम से की जा सकती है. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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दिल्ली के इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल की आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. सागरिका अग्रवाल का कहना है कि मेल फैक्टर इनफर्टिलिटी असामान्य या खराब शुक्राणु के उत्पादन के कारण हो सकती है. पुरुषों में यह संभावना हो सकती है कि उनके शुक्राणु उत्पादन और विकास के साथ कोई समस्या नहीं हो, लेकिन फिर भी शुक्राणु की संरचना और स्खलन की समस्याएं स्वस्थ शुक्राणु को स्खलनशील तरल पदार्थ तक पहुंचने से रोकती हैं और आखिरकार शुक्राणु फैलोपियन ट्यूब तक नहीं पहुंच पाता जहां निषेचन हो सकता है. शुक्राणु की कम संख्या शुक्राणु वितरण की समस्या का सूचक हो सकते हैं. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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पुरुषों में शुक्राणु की गुणवत्ता और उसकी मात्रा गर्भ धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यदि शुक्राणु कम हो या खराब गुणवत्ता के हों तो गर्भ धारण करने की संभावनाएं 10 गुना कम और कभी-कभी इससे भी कम हो जाती है. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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कई महिलाओं को गर्भ धारण करने में मुश्किल आती है. यहां तक कि सभी टेस्ट रिपोर्ट सामान्य होने के बाद वे स्वाभाविक रूप से गर्भ धारण में असमर्थ रहती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कई बार गर्भधारध पुरुषों की 'इनफर्टिलिटी' के कारण भी नहीं हो पाता. फोटोः गूगल फ्री इमेज
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ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. किसी भी सुझाव पर अमल करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.
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प्रशांत अग्रवालप्रेसिडेंट, नारायण सेवा संस्थान
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