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Kanataka Election 2018: आज़ादी से अब तक कर्नाटक की सत्ता और मुख्यमंत्रियों की पूरी कहानी
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कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं. 224 सीटों में से 222 पर हुए चुनाव में से 104 पर बीजेपी, 78 पर कांग्रेस, 38 जेडीएस गठबंधन ने बाजी मारी है. अन्य के खाते में 2 सीटें गई हैं. कोई भी पार्टी बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाई है. अब तक साफ नहीं है कि सूबे का अगला सीएम कौन होगा. लेकिन ऐसे मौके पर हम इतिहास के पन्ने को पलट सकते हैं. इसी सिलसिले में आज हम आपको कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की कहानी बताने जा रहे हैं. अब तक कर्नाटक में 22 मुख्यमंत्रियों का शासन रहा है.
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9 अक्टूबर 2007 से 11 नवंबर 2007 तक राज्य में राष्ट्रपति शासन रहा. राष्ट्रपति शासन के हटते ही साल 2008 में 13वें असेंबली इलेक्शन हुए और देश की सत्ता से दूर हुई बीजेपी ने दक्षिण भारत में पहली बार कमल खिलाकर अपनी बड़ती शख्सियत का संदेश दे दिया. साल 2008 में हुए चुनावों में बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई. बीजेपी ने जातीय दांव खेलते हुए बीएस येदुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाने में कोई देर नहीं की और सत्ता का समीकरण सही दिखा में बैठा दिया. लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते येदुरप्पा अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. 3 साल 62 दिन के बाद उन्हें अपने पद को छोड़ना पड़ा. येदुरप्पा के हटने के बाद बीजेपी ने 2011 में पार्टी के वरिष्ठ नेता सदानंद गौड़ा को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया. उनका यह कार्यकाल 343 दिन का रहा. लेकिन दबाव के चलते जल्दी ही उन्हें भी अपना तख्त-ओ-ताज खोना पड़ा. सदानंद गौड़ा के स्थान बीजेपी ने जगदीश शेट्टार को सीएम पद सौंपा.
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