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महिलाओं का रोजगार में दमदार प्रदर्शन, जानें सात सालों में कितने प्रतिशत तक पहुंची रोजगार दर

भारत में महिला कार्यबल की भागीदारी में जबरदस्त उछाल देखा गया है. एक रिपोर्ट के अनुसार बीते सात सालों में भारत में महिलाओं की रोजगार दर में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है.

भारत में महिला कार्यबल की भागीदारी में जबरदस्त उछाल देखा गया है. एक रिपोर्ट के अनुसार बीते सात सालों में भारत में महिलाओं की रोजगार दर में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है.

आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रह रही हैं. जिसकी वजह से उन्हें लेकर समाज में भी नजरिया बदला है. एक स्टडी के अनुसार भारत में पिछले सात सालों में महिलाओं की रोजगार दर में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है. चलिए जानते हैं कि वर्कफोर्स में महिलाओं ने कैसे मारी बाजी कितने प्रतिशत बढ़ी महिलाओं की भागीदारी.

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श्रम मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में महिलाओं की रोजगार दर 22 प्रतिशत थी जो 2023-24 में बढ़कर 40.3 प्रतिशत हो गई है. यह लगभग दोगुनी वृद्धि देश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
श्रम मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में महिलाओं की रोजगार दर 22 प्रतिशत थी जो 2023-24 में बढ़कर 40.3 प्रतिशत हो गई है. यह लगभग दोगुनी वृद्धि देश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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हालांकि, चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं. सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएं जैसे घरेलू जिम्मेदारियां और लैंगिक रूढ़ियां, महिलाओं की राह में रोड़ा बन सकती हैं. फिर भी, इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में महिलाएं आर्थिक स्वतंत्रता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.
हालांकि, चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं. सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएं जैसे घरेलू जिम्मेदारियां और लैंगिक रूढ़ियां, महिलाओं की राह में रोड़ा बन सकती हैं. फिर भी, इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में महिलाएं आर्थिक स्वतंत्रता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.
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ग्रामीण क्षेत्रों में महिला रोजगार में 96 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत रहा है. इस बदलाव का श्रेय सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों को दिया जा रहा है, जो महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला रोजगार में 96 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत रहा है. इस बदलाव का श्रेय सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों को दिया जा रहा है, जो महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित हैं.
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मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र के प्रयास महिला उद्यमियों के विकास में योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय स्तर पर 15 मंत्रालयों की 70 केंद्रीय योजनाएं और 400 से ज्यादा राज्य स्तरीय योजनाएं महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं. आंकड़ों के अनुसार, महिला स्नातकों की रोजगार क्षमता 2013 में 42 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 47.53 प्रतिशत हो गई है.
मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र के प्रयास महिला उद्यमियों के विकास में योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय स्तर पर 15 मंत्रालयों की 70 केंद्रीय योजनाएं और 400 से ज्यादा राज्य स्तरीय योजनाएं महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं. आंकड़ों के अनुसार, महिला स्नातकों की रोजगार क्षमता 2013 में 42 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 47.53 प्रतिशत हो गई है.
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स्नातकोत्तर और उससे ऊपर की शिक्षा प्राप्त महिलाओं की रोजगार दर भी 2017-18 के 34.5 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 40 प्रतिशत हो गई है. यह दर्शाता है कि शिक्षित महिलाएं अब पहले से कहीं अधिक संख्या में कार्यबल में शामिल हो रही हैं.
स्नातकोत्तर और उससे ऊपर की शिक्षा प्राप्त महिलाओं की रोजगार दर भी 2017-18 के 34.5 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 40 प्रतिशत हो गई है. यह दर्शाता है कि शिक्षित महिलाएं अब पहले से कहीं अधिक संख्या में कार्यबल में शामिल हो रही हैं.
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पीएलएफएस के आंकड़े बताते हैं कि महिला स्व-रोजगार में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2017-18 में 51.9 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 67.4 प्रतिशत हो गया है. जिससे महिलाएं वास्तव में आत्मनिर्भर बन रही हैं.
पीएलएफएस के आंकड़े बताते हैं कि महिला स्व-रोजगार में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2017-18 में 51.9 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 67.4 प्रतिशत हो गया है. जिससे महिलाएं वास्तव में आत्मनिर्भर बन रही हैं.
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इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, पिछले सात वर्षों में 1.56 करोड़ महिलाएं औपचारिक कार्यबल में शामिल हुई हैं. महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की संख्या भी दोगुनी होकर 1.92 करोड़ हो गई है जिससे 89 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं. सरकार का लक्ष्य 2047 तक 70 प्रतिशत महिला कार्यबल भागीदारी सुनिश्चित करना है.
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, पिछले सात वर्षों में 1.56 करोड़ महिलाएं औपचारिक कार्यबल में शामिल हुई हैं. महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की संख्या भी दोगुनी होकर 1.92 करोड़ हो गई है जिससे 89 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं. सरकार का लक्ष्य 2047 तक 70 प्रतिशत महिला कार्यबल भागीदारी सुनिश्चित करना है.

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