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चिंपैंजी बीमार होने पर खुद करते हैं इलाज, इन औषधीय पौधों का करते हैं इस्तेमाल

दुनियाभर में लाखों प्रजाति के जानवर पाए जाते हैं. सभी जानवरों की अपनी एक खासियत होती है. जिसके कारण उन्हें जाना जाता है. लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि चिपैंजी कैसे खुद का इलाज करता है.

दुनियाभर में लाखों प्रजाति के जानवर पाए जाते हैं. सभी जानवरों की अपनी एक खासियत होती है. जिसके कारण उन्हें जाना जाता है. लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि चिपैंजी कैसे खुद का इलाज करता है.

चिंपैंजी एक ऐसा जानवर है कि जो बीमार पड़ने और चोट लगने पर खुद का इलाज खुद करता है. चिंपैंजी को पता होता है कि उसे किन औषधी पौधों की जरूरत होती है.

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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और यूरोप, जापान, युगांडा के शोधकर्ताओं की एक अनुसंधान टीम ने पाया है कि चिंपैंजी अन्य जानवरों की तुलना में अधिक औषधीय पौधों का इस्तेमाल करते हैं. पीएलओएल वन पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के लिए मुताबिक चिंपैंजी द्वारा इस्तेमाल किये गए 13 पौधों की प्रजातियों से 17 नमूना लिया था.
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और यूरोप, जापान, युगांडा के शोधकर्ताओं की एक अनुसंधान टीम ने पाया है कि चिंपैंजी अन्य जानवरों की तुलना में अधिक औषधीय पौधों का इस्तेमाल करते हैं. पीएलओएल वन पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के लिए मुताबिक चिंपैंजी द्वारा इस्तेमाल किये गए 13 पौधों की प्रजातियों से 17 नमूना लिया था.
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दरअसल इस रिसर्च के लिए युगांडा के बुडोंगो वन में 2 चिंपैंजी समुदायों का निरीक्षण करने के लिए वहां 4 महीने बिताया था. इस दौरान दोनों समुदायों के 170 चिंपैंजी में से शोधकर्ताओं ने जीवाणु संक्रमण और सूजन से पीड़ित 51 चिंपैंजी का पता लगाया.
दरअसल इस रिसर्च के लिए युगांडा के बुडोंगो वन में 2 चिंपैंजी समुदायों का निरीक्षण करने के लिए वहां 4 महीने बिताया था. इस दौरान दोनों समुदायों के 170 चिंपैंजी में से शोधकर्ताओं ने जीवाणु संक्रमण और सूजन से पीड़ित 51 चिंपैंजी का पता लगाया.
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रिसर्च के दौरान उनकी पहचान असामान्य मूत्र संरचना, दस्त, परजीवी निशान या घावों से की गई थी. शोधकर्ताओं ने दिन में 10 घंटे तक इन बीमार चिंपैंजियों पर नजर रखा था और देखा कि वे कब कौन-से पौधे खाते हैं.
रिसर्च के दौरान उनकी पहचान असामान्य मूत्र संरचना, दस्त, परजीवी निशान या घावों से की गई थी. शोधकर्ताओं ने दिन में 10 घंटे तक इन बीमार चिंपैंजियों पर नजर रखा था और देखा कि वे कब कौन-से पौधे खाते हैं.
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रिसर्च में देखा गया कि डायरिया से पीड़ित एक चिंपैंजी अल्स्टोनिया बूनेई की सूखी लकड़ी खा रहा था. ये असल में डॉगबेन परिवार का एक पौधा है. रिसर्चर ने पाया कि पोषण की कमी के कारण चिंपैंजी शायद ही कभी मृत व सूखी लकड़ी खाते हैं.
रिसर्च में देखा गया कि डायरिया से पीड़ित एक चिंपैंजी अल्स्टोनिया बूनेई की सूखी लकड़ी खा रहा था. ये असल में डॉगबेन परिवार का एक पौधा है. रिसर्चर ने पाया कि पोषण की कमी के कारण चिंपैंजी शायद ही कभी मृत व सूखी लकड़ी खाते हैं.
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इसके अलावा चिंपैंजी को हाथ में घाव होने के कारण क्रिस्टेला पैरासिटिका पौधे की पत्तियां खाते हुए देखा गया था. शोधकर्ताओं ने बीमार चिंपैंजियों द्वारा खाए गये सभी पौधों का एंटीबायोटिक और सूजनरोधी गुणों के लिए परीक्षण किया.
इसके अलावा चिंपैंजी को हाथ में घाव होने के कारण क्रिस्टेला पैरासिटिका पौधे की पत्तियां खाते हुए देखा गया था. शोधकर्ताओं ने बीमार चिंपैंजियों द्वारा खाए गये सभी पौधों का एंटीबायोटिक और सूजनरोधी गुणों के लिए परीक्षण किया.
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शोधर्कताओं ने पाया कि अल्स्टोनिया बूनेई नामक पौधे में जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं. इसका उपयोग अफ्रीका में पारंपरिक उपचार के लिए किया जाता है. रिसर्च में देखा गया कि चिंपैंजी द्वारा उपयोग होने वाले पौधों का स्थानीय लोग भी इस्तेमाल करते हैं.
शोधर्कताओं ने पाया कि अल्स्टोनिया बूनेई नामक पौधे में जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं. इसका उपयोग अफ्रीका में पारंपरिक उपचार के लिए किया जाता है. रिसर्च में देखा गया कि चिंपैंजी द्वारा उपयोग होने वाले पौधों का स्थानीय लोग भी इस्तेमाल करते हैं.

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