Persian Gulf Energy Supply: पर्शियन गल्फ से किन-किन देशों को होती है एनर्जी सप्लाई, इन पर कितना डिपेंड है भारत?
Persian Gulf Energy Supply: ईरान ने अमेरिका और इजरायल को होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत फायस की खाड़ी पर कितना ज्यादा निर्भर है.

Persian Gulf Energy Supply: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने एक बार फिर से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. दरअसल ईरान ने अमेरिका और इजरायल को होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग को लेकर चेतावनी दी है. ईरान ने ऐसा कहा है कि स्ट्रेट पूरी तरह से बंद नहीं है लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों पर रोक लग सकती है. आपको बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी रूट में से एक है. आइए जानते हैं कि भारत इस पर कितना ज्यादा निर्भर है.
दुनिया की एनर्जी लाइफलाइन
फारस की खाड़ी का इलाका जिसमें सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देश शामिल हैं दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी हब माना जाता है. दुनिया भर के तेल और नेचुरल गैस एक्सपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचने से पहले इसी इलाके से होकर गुजरता है.
फारस की खाड़ी में कच्चे तेल और नेचुरल गैस के कुछ सबसे बड़े प्रूवन रिजर्व हैं. इस इलाके से एनर्जी एक्सपोर्ट मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ट्रांसपोर्ट किया जाता है. यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक पतला पानी का रास्ता है. ग्लोबल एनर्जी डेटा के मुताबिक दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई और दुनिया भर में लिक्विफाइड नेचुरल गैस शिपमेंट का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है.
एशियाई देशों को सबसे ज्यादा सप्लाई मिलती है
फारस की खाड़ी से ज्यादातर एनर्जी एक्सपोर्ट एशियाई इकॉनमी को भेजा जाता है. यह अपनी इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम को चलने के लिए इम्पोर्टेड तेल और गैस पर काफी ज्यादा निर्भर हैं. होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला लगभग 84% कच्चा तेल और 83% एलएनजी एशियाई देशों को डिलीवर किया जाता है. ये देश अपनी एनर्जी जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए खाड़ी के प्रोड्यूसर पर निर्भर हैं.
खाड़ी से एनर्जी इंपोर्ट करने वाले बड़े देश
कई बड़ी इकॉनमी फारस की खाड़ी से होने वाली एनर्जी सप्लाई पर काफी ज्यादा निर्भर हैं. चीन अभी खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस का सबसे बड़ा इंपोर्टर है. यह सऊदी अरब, इराक और ईरान जैसे देशों से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है. भारत एक और बड़ा खरीदार है और तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस दोनों के लिए खाड़ी देशों पर ही निर्भर है.
इसी के साथ जापान और साउथ कोरिया भी मिडिल ईस्ट की एनर्जी सप्लाई पर काफी ज्यादा निर्भर हैं. वह अपनी तेल की लगभग 70% से 90% मांग इसी इलाके से पूरी करते हैं. इन सबके अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, थाईलैंड और फिलिपींस जैसे देश भी अपनी बढ़ती एनर्जी जरूरत को पूरा करने के लिए खाड़ी के देशों पर ही निर्भर हैं.
खाड़ी एनर्जी पर भारत की निर्भरता
बीते कुछ सालों में भारत की इकॉनमिक ग्रोथ और एनर्जी की खपत तेजी से बढ़ी है. इससे देश इंपोर्टेड फ्यूल पर काफी ज्यादा निर्भर हो गया है. भारत अभी अपनी क्रूड ऑयल की जरूरत को लगभग 75% से 90% दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है. इनमें से कुल तेल इंपोर्ट का लगभग 50% से 55% फारस की खाड़ी के देशों, खासकर इराक, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात कुवैत से आता है. अब क्योंकि भारत की तेल सप्लाई का इतना बड़ा हिस्सा इसी इलाके से आता है, इस वजह से यहां पर हुई कोई भी रुकावट देश की एनर्जी सिक्योरिटी पर काफी असर डाल सकती है.
खाड़ी क्षेत्र पर भारत के निर्भरता सिर्फ कच्चे तेल तक ही सीमित नहीं है. देश बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस और लिक्विफाइड नेचुरल गैस भी इंपोर्ट करता है. भारत की एलपीजी की लगभग 80% से 85% मांग इंपोर्ट से ही पूरी होती है. इस सप्लाई का 85% से ज्यादा हिस्सा सीधे खाड़ी देशों से ही आता है.
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Source: IOCL























