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गरीबी और महागरीबी में क्या है अंतर और कैसे तय होते हैं मानक?
आप किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति देखकर गरीबी और अतिगरीबी में अंतर को भांपते होंगे, लेकिन बता दें गरीबी और अतिगरीबी में अंतर का सरकारी पैमाना अलग है.
जब तीसरी बार इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनी थीं उस समय देश बहुत नाजुक हालात से गुजर रहा था, ऐसे में गरीबी और अति गरीबी के बीच अंतर करना काफी कठिन साबित हो रहा था.
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उस समय साल 1971 में अर्थशास्त्री वी. एम. दांडेकर और एन. रथ ने तर्क दिया था कि गरीबी रेखा का निर्धारण ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में 2,250 कैलोरी रोजाना की जरूरत पर होने वाले खर्च के आधार पर किया जाना चाहिए.
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एम. दांडेकर और एन. रथ ने अपने इस फॉर्मूले के आधार पर पाया कि ग्रामीण क्षेत्र की एक-तिहाई आबादी और शहरी क्षेत्र की आधी आबादी को कैलोरी के आधार पर पर्याप्त भोजन नहीं मिलता. हालांंकि समय-समय पर गरीबी और अति गरीबी की पहचान करने वाला पैमाना बदलता रहा है.
Published at : 05 Mar 2024 07:18 PM (IST)
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