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क्यों ईरान के गाढ़े काले सोने के लिए पागल है दुनिया, क्या है इस देश के लिक्विड गोल्ड का रहस्य?
ईरानी तेल की लोकप्रियता का राज उसकी बेहतरीन केमिस्ट्री है. अमेरिकी तेल के मुकाबले यह अधिक किफायती और रिफाइनरियों के लिए मुनाफे का सौदा है. आइए जानें कि क्यों ईरानी तेल देशों की पहली पसंद है.
जब भी आप अपनी कार में ईंधन भरवाते हैं या किसी विमान में सवार होते हैं, तो उस ईंधन के पीछे एक रिफाइनरी इंजीनियर का गणित छिपा होता है. दशकों से दुनिया भर के इंजीनियर खामोशी से ईरान के तेल को चुनते आए हैं, चाहे उस पर कितने ही कड़े प्रतिबंध क्यों न लगे हों. इस दीवानगी की वजह राजनीति नहीं, बल्कि शुद्ध केमिस्ट्री है. ईरान का कच्चा तेल रसायनिक रूप से एक ऐसे स्वीट स्पॉट पर बैठा है, जिसे बदलना या किसी दूसरे देश के तेल से रिप्लेस करना तकनीकी और आर्थिक रूप से दुनिया की बड़ी रिफाइनरियों के लिए एक दुःस्वप्न जैसा साबित होता है.
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कच्चा तेल कोई एक समान तरल नहीं है, बल्कि यह हजारों हाइड्रोकार्बन अणुओं का मिश्रण होता है. इसमें कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं की जंजीरें होती हैं. छोटी जंजीरें हल्की होती हैं और पेट्रोल या जेट ईंधन बनाती हैं, जबकि लंबी और भारी जंजीरें डामर जैसा कम मूल्य का उत्पाद देती हैं.
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किसी भी कच्चे तेल की गुणवत्ता दो मुख्य पैमानों पर मापी जाती है- घनत्व और सल्फर की मात्रा. तेल के घनत्व को मापने के लिए 'API ग्रेविटी' का उपयोग किया जाता है. पानी की API ग्रेविटी 10 होती है, इससे ऊपर का हर अंक तेल को हल्का बनाता है.
Published at : 09 Mar 2026 08:31 AM (IST)
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प्रेम कुमारJournalist
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