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मौत बनकर आने वाली मिसाइल को हवा में कैसे ढेर करती है इंडियन नेवी, कितना घातक है डिफेंस सिस्टम?
नौसेना का चार-स्तरीय सुरक्षा कवच, जिसमें Barak 8, Shtil-1, Barak 1 और AK-630 शामिल हैं. समुद्र में किसी भी हवाई हमले को विफल करने में सक्षम है. आइए भारतीय नेवी के डिफेंस सिस्टम के बारे में जानें.
समुद्र की लहरों के बीच तैरते भारतीय नौसेना के विशालकाय युद्धपोत केवल लोहे के ढांचे नहीं, बल्कि अभेद्य किले हैं. आधुनिक समुद्री युद्ध में, जहां दुश्मन मिसाइलें पलक झपकते ही मौत बनकर आती हैं, वहां नौसेना का लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम एक ऐसे अदृश्य सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जिसे भेदना नामुमकिन है. यह सुरक्षा तकनीक की वह पराकाष्ठा है जहां खतरे की पहचान से लेकर उसके पूरी तरह खात्मे तक, हर कदम पहले से ही तय और अचूक होता है.
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आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि खतरे को भांपने और उसे रोकने की गति से जीते जाते हैं. भारतीय नौसेना ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट जैसे महत्वपूर्ण युद्धपोतों को बचाने के लिए एक बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया है. यदि दुश्मन कोई विमान, क्रूज मिसाइल या ड्रोन दागे, तो नौसेना का यह लेयर्ड सिस्टम उसे चार अलग-अलग दूरियों पर रोकने के लिए तैयार रहता है.
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यदि पहली परत चूक जाए, तो दूसरी, तीसरी और चौथी परत उसे हवा में ही राख करने के लिए तत्पर है. किसी भी जहाज को सुरक्षित रखने के लिए नौसेना चार मुख्य तरीके अपनाती है. पहला है 'स्टेल्थ', यानी दुश्मन के रडार की नजरों से पूरी तरह ओझल हो जाना.
Published at : 22 Apr 2026 08:24 AM (IST)
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