Musk Deer: क्या हिरण के पेट में सच में होती है कस्तूरी, जानें हिरण और इंसान दोनों के किस काम आती है यह?
Musk Deer: अक्सर ही यह कहा जाता है कि हिरण के पेट में कस्तूरी होती है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच.

- कस्तूरी नर मृग की खास ग्रंथि में बनती है।
- नर मृग मादाओं को आकर्षित कर क्षेत्र चिह्नित करते हैं।
- यह पारंपरिक औषधि व इत्र उद्योग में बहुत महत्वपूर्ण।
- भारत में कस्तूरी मृग शिकार-व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित।
Musk Deer: काफी लोग यह मानते हैं कि कस्तूरी हिरण के पेट के अंदर जमा होती है. लेकिन यह एक आम गलतफहमी है. दरअसल प्राकृतिक कस्तूरी सिर्फ नर कस्तूरी मृग में ही पाई जाती है और यह पाचन तंत्र में जमा नहीं होती. इसके बजाय यह पेट की त्वचा के नीचे नाभी और जननांगों के बीच में एक खास कस्तूरी ग्रंथि में बनती है. वक्त के साथ यह गाढ़ा स्राव सूखकर एक दानेदार पदार्थ में बदल जाता है. यह अपनी खास सुगंध और औषधि इस्तेमाल के लिए काफी ज्यादा मूल्यवान है.
कस्तूरी हिरण के किस काम आती है?
कस्तूरी नर कस्तूरी मृग के जीवन और अस्तित्व में एक बड़ी भूमिका निभाती है. प्रजनन काल के समय नर कस्तूरी मृग मादा को आकर्षित करने के लिए कस्तूरी की तेज गंध को छोड़ते हैं. खुशबू मैच्योरिटी और प्रजनन तत्परता के प्राकृतिक संकेत के रूप में काम करती है.
इसी के साथ नर हिरण अपनी जगह के अंदर चट्टान, झाड़ी और पेड़ को चिन्हित करने के लिए भी कस्तूरी का इस्तेमाल करते हैं. यह खुशबू प्रतिद्वंदी पुरुषों को दूर रहने की चेतावनी देती है.
कस्तूरी की सुगंध हिरणों को जंगल में भी एक दूसरे का पता लगाने में मदद करती है. यह खुशबू हिरण के बीच संचार के एक मुख्य साधन के रूप में काम करती है.
इंसानों को इस कस्तूरी से क्या फायदा?
प्राकृतिक कस्तूरी को दुनिया के सबसे दुर्लभ और सबसे महंगे पशु से उत्पन्न हुए पदार्थ में से एक माना जाता है. कस्तूरी का इस्तेमाल इसके औषधीय गुणों की वजह से लंबे समय से आयुर्वेद और पारंपरिक चीनी चिकित्सा में किया जाता रहा है.
इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से स्ट्रोक, मिर्गी और कोमा जैसे तंत्रिका संबंधी विकारों के उपचार में किया जाता है. इसी के साथ पुरानी खांसी, अस्थमा और निमोनिया सहित सांस से जुड़ी बीमारियों के उपचार में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.
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इत्र उद्योग में भी बड़ी भूमिका
कस्तूरी को इसकी शक्तिशाली और लंबे समय तक रहने वाली खुशबू की वजह से इत्र उद्योग में खास महत्व दिया जाता है. यह एक फिक्सेटिव के रूप में काम करता है. दूसरी खुशबू से जुड़ी चीजों को स्थिर रहने में मदद करता है और परफ्यूम को लंबे समय तक अपनी खुशबू बनाए रखने में भी काम आता है.
आपको बता दें कि प्रजाति की रक्षा के लिए भारत ने वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत कस्तूरी मृग के शिकार और प्राकृतिक कस्तूरी के व्यापार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया हुआ है.
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