भारत में कितनी मातृभाषाएं, पहले नंबर पर हिंदी तो दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा कौन सी लैंग्वेज बोलते हैं लोग?
भारत में कुल बहुत सारी आधिकारिक मातृभाषाएं हैं, जिनमें हिंदी एक नंबर पर आती है. आइए जानते हैं कि इसके अलावा दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा कौन सी है.

भारत में हर कुछ किलोमीटर पर पानी का स्वाद और भाषा बदल जाना एक आम बात है. यह देश अपनी सांस्कृतिर और भाषाई विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. देश के इस अनोखे रंग को समझने के लिए जब भी हम सरकारी आंकड़ों और जनगणना की फाइलों को खंगालते हैं, तो चौंकाने वाले सच सामने आते हैं. हमारे देश में मातृभाषाओं का एक विशाल संसार बसा है, जिसमें हिंदी सबसे आगे चमकती है, लेकिन इसके बाद कौन सी भाषाएं अपनी पकड़ मजबूत करती हैं, यह जानना बेहद जरूरी है.
जनगणना के रजिस्टर से निकलीं 121 भाषाएं
भारत में मातृभाषाओं के असली और आधिकारिक आंकड़े साल 2011 की जनगणना से मिलते हैं. उस दौरान जब लोगों से उनकी मातृभाषा के बारे में पूछा गया, तो देश भर से कुल 1369 ऐसी बोलियां और भाषाओं के नाम सामने आए जिन्हें लोग मुख्य रूप से बोलते थे. इसके अलावा लगभग 1474 ऐसे नाम भी मिले जो बेहद अजीब थे और उन्हें बोलने वाले न के बराबर लोग थे. जांच-परख और छंटनी के बाद सरकार ने यह तय किया कि जिस भाषा को बोलने वाले कम से कम 10 हजार लोग होंगे, उसे मातृभाषा माना जाएगा. इस कसौटी पर देश में कुल 121 मुख्य मातृभाषाएं पाई गईं.
संविधान के दर्जे वाली 22 भाषाएं
इन 121 भाषाओं में से देश के संविधान की आठवीं अनुसूची में कुल 22 भाषाओं को विशेष दर्जा दिया गया है. इन महत्वपूर्ण भाषाओं में में हिंदी के अलावा बंगाली, गुजराती, असमिया, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, बोडो, संथाली, मैथिली और डोंगरी जैसी भाषाएं शामिल हैं. ये सभी भाषाएं मिलकर भारत के बहुभाषी ढांचे को मजबूत बनाती हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान और उनके दैनिक संवाद का मुख्य जरिया हैं.
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हिंदी के बाद सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा कौन सी?
साल 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है. तत्कालीन 121 करोड़ की आबादी में से करीब 52.83 करोड़ लोग हिंदी को अपनी मातृभाषा मानते थे, जो कुल आबादी का लगभग 43.6% हिस्सा है. इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर बंगाली भाषा आती है, जिसे देश के लगभग 9.7 करोड़ लोग बोलते हैं, जो कुल जनसंख्या का करीब 8% है. इसके ठीक बाद तीसरे नंबर पर मराठी (करीब 8.30 करोड़), चौथे पर तेलुगु (करीब 8.11 करोड़) और पांचवें नंबर पर तमिल (करीब 6.90 करोड़) का नंबर आता है.
उत्तर भारत में कैसे बढ़ी हिंदी की रफ्तार?
अगर हम बीते कुछ दशकों का आंकड़ा देखें को साल1971 से लेकर 2011 के बीच भारत में हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या में 160% से भी अधिक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 1971 में जहां सिर्फ 20.27 करोड़ लोग हिंदी बोलते थे, वहीं 2011 तक यह आंकड़ा 52 करोड़ पार कर गया है. देश में हर 10 हजार लोगों में से औसतन 4363 लोग हिंदी का ही इस्तेमाल करते हैं. हिंदी भाषी आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे घनी आबादी वाले राज्यों में रहता है.
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