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Khan Market History: दिल्ली के मशहूर खान मार्केट का किस खान से है संबंध? हैरान कर देगा आपको यह जवाब

Khan Market History: दिल्ली के मशहूर खान मार्केट का नाम किसी दुकान या रेस्टोरेंट पर नहीं, बल्कि डॉ. खान साहब के सम्मान में रखा गया था. जानिए इसके नाम और इतिहास की पूरी कहानी.

Khan Market History: दिल्ली के मशहूर मार्केट की बात करें तो खान मार्केट का नाम जुबान पर आ ही जाता है. खान मार्केट देश के सबसे महंगे और अच्छी क्वालिटी के सामान के लिए जाना जाता है. साथ ही साथ यहां पर अच्छे और मशहूर कैफे और खाने-पीने की चीजें भी मिलती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खान मार्केट का नाम आखिर "खान" मार्केट ही क्यों पड़ा, आखिर ये खान कौन था. कई लोगों का मानना है कि इस मार्केट का नाम खान चाचा से पड़ा है, लेकिन इस बात के पीछे की सच्चाई कुछ और ही है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी और इस बाजार की दिलचस्प कहानियां.

किस खान के नाम पर बना है यह मार्केट?

खान बाजार की बात करते हैं तो सबसे पहले ये जान लीजिए कि आखिर ये किस शख्स के नाम से बना है. बता दें कि खान मार्केट का नाम किसी दुकान या रेस्टोरेंट से नहीं रखा गया है, बल्कि यह खान अब्दुल जब्बार खान के नाम पर रखा गया है, जिन्हें डॉ. खान साहब भी कहा जाता था. वे 1945 से 1947 तक खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री रहे थे, जो हिस्सा अब पाकिस्तान में है.

इस बाजार का नाम रखने के पीछे डॉ. खान साहब के अच्छे काम थे. माना जाता है कि डॉ. खान साहब ने बंटवारे के समय बहुत से लोगों को भागदौड़ और हिंसा से बचाकर सुरक्षित निकालने में मदद की थी. इसी वजह से उनके सम्मान में यह बाजार उनके नाम पर रखा गया. एक दिलचस्प बात यह भी है कि डॉ. खान साहब मशहूर स्वतंत्रता सेनानी खान अब्दुल गफ्फार खान के बड़े भाई भी थे, जिन्हें "फ्रंटियर गांधी" के नाम से जाना जाता है.

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बंटवारे के बाद कैसे बना यह बाजार?

इस जानकारी के बाद अब सवाल आता है कि क्या बंटवारे के बाद ही यह बाजार बना या फिर इसका निर्माण पहले हो चुका था. इसके जवाब में बता दें कि खान मार्केट को 1951 में भारत सरकार के पुनर्वास मंत्रालय ने बनाया था. इसका मकसद था बंटवारे के दौरान भारत आए शरणार्थियों को रोजगार का जरिया देना. शुरुआत में इस दो मंजिला यू-आकार के बाजार में 154 दुकानें और ऊपर रहने के लिए 74 फ्लैट बनाए गए थे. दुकान मालिक नीचे अपनी दुकान चलाते थे और ऊपर अपने परिवार के साथ रहते थे.

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