Hora Shastra: होरा शास्त्र में क्या लिखा है? ये कितना पुराना है?
Hora Shastra: वैदिक शास्त्र में होरा शास्त्र को महत्व दिया गया है. आखिर क्या होता है होरा शास्त्र, जानें इसका महत्व और यह कितना पुराना है.
Written By : एबीपी लाइव | Updated at : 18 May 2024 08:05 PM (IST)
होरा शास्त्र
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होरा शास्त्र ज्योतिष की एक विधा है, जिसे ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है.
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अगर आप किसी शुभ या मंगल काम के लिए मुहूर्त देखते हैं तो शुभ पल का चयन करने के लिए विचार की जाने वाली समय की सबसे छोटी इकाई को होरा कहते हैं.
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होरा की अवधि लगभग 60 मिनट की होती है. सूर्योदय से सूर्योदय तक के समय को होरा कहते हैं. हर दिन की शुरुआत में पहली होरा उस ग्रह की होती है जिसका वार होता है.
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iएक दिन में 24 होरा होते हैं जिसमें से 12 होरा के स्वामी दिनमान के 12 भागों के स्वामी होते हैं. प्रत्येक दिन के प्रारंभ में प्रथम होरा उस ग्रह की होती है जिसका वह वार होता है. जबकि अगली होरा उसी दिन से छठे दिन की होगी और यही क्रम आगे बढ़ता जाएगा.
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होरा अंग्रेजी शब्द आवर (Hour)से लिया गया है. इसका अर्थ है अहो+रात्र यानि रात और दिन. प्रत्येक होरा यानि आवर पर एक विशेष ग्रह का स्वामी होता है. होरा शास्त्र लगभग 5000 से 10000 साल पुराना होता है.
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अगर कभी विशेष रूप से शुभ मुहूर्त के लिए समय अभाव हो या तत्काल मुहूर्त निर्धारण करने के लिए होरा की भूमिका अहम होती है.