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उधार के मांगे पैसे से पंजाब के एक किसान ने जीते डेढ़ करोड़ रुपये
Written By : एबीपी न्यूज़ | Updated at :
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मनोज आगे कहते हैं कि उनके पिता की मौत अस्थमा की वजह से हाल में ही हुई है. जो कुछ भी उन्होंने कमा कर बचाया था वो सब उनके ट्रीटमेंट में लगा दिया था. फिर भी वो अपने पिता को नहीं बचा पाए. इस बात का दुख जताते हुए मनोज कहते हैं कि लॉटरी अगर पहले निकल आई होती तो वो अपने पिता को बचा लेते. तस्वीर: गूगल फ्री इमेज
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लॉटरी निकलने से पहले तक मनोज की बड़ी बेटी ने 12 वीं का परीक्षा दे दी थी और उसके बाद वो नौकरी के लिए सांगुर जाने वाली थी. लेकिन अब मनोज इस बड़ी राशि को जीतने के बाद गर्व से कहते हैं कि अब बेटी अपनी आगे की पढ़ाई कर सकेगी. वहीं वो आगे कहते हैं कि मेरी दूसरी बेटी नर्स बनना चाहती थी लेकिन अब वो डॉक्टर की तैयारी कर पाएगी. उनकी तीसरी बेटी अभी छठीं परीक्षा में और बेटा गांव के ही एक स्कूल में 10वीं की पढ़ाई की थी. तस्वीर: गूगल फ्री इमेज
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पंजाब के संगरूर गांव के रहने वाले मनोज कुमार ने सरकार द्वारा निकाली गई लॉटरी में करीब 1.5 करोड़ रुपये जीत लिए हैं. कल तक मजदूरी करने वाले मनोज और उनकी पत्नी 250 रुपये डेली बेसिस पर कमाते थे. तस्वीर: एपी
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मनोज ने कहा, इस राशि से वो सबसे पहले अपना खुद का घर बनवाएंगे. इसके साथ ही वो छोटा सा बिजनेस भी करेंगे. इस बीच सबसे रोचक बात यह थी कि मनोज ने लॉटरी की टिकट उधार से मांगे पैसे से खरीदी थी. यह पहला समय था जब उन्होंने लॉटरी की टिकट खरीदी. तस्वीर: गूगल फ्री इमेज
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हुआ यूं कि 30 अगस्त को एक लोकल पोस्ट ऑफिस का एक कर्मचारी सुबह-सुबह मनोज के घर पुहंचा और उसने बाहर आई मनोज की पत्नी को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार की राखी बंपर लॉटरी आप जीत गई हैं. फिर यह खुशखबरी राज कौर ने मनोज को बताई. इसके बाद मनोज एक वो टिकट और न्यूज़पेपर में निकले लॉटरी को नंबर को मिलाने लगे जब मिल गया तो वह ये देख अचंभित रह गए. तस्वीर: गूगल फ्री इमेज
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वहीं मनोज के पिता ने अपना जीवन यापन टायर की दुकान से चलाया जिसे देखते हुए मनोज ने 15 साल की उम्र में कमाने निकल पड़े थे. तस्वीर: गूगल फ्री इमेज
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मनोज ने बताया कि मां कृष्णी देवी साल 1984 में मांडवी से निकल गई थीं क्योंकि गांव नरवाना जिले में था जहां हर साल बाढ़ आ जाती थी जिसके कारण बहुत तबाही देखने को मिलती थी. तस्वीर: गूगल फ्री इमेज
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मनोज एक वाल्मीकि दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं लेकिन माली हालत को देखते हुए उन्होंने अपने परिवार के साथ 10 साल पहले क्रिश्चियन धर्म को अपना लिया था. उन्होंने यह ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनके बच्चों का भविष्य बन जाए. तस्वीर: गूगल फ्री इमेज
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