Indian Vs Iranian Currency: इस मुस्लिम देश में भारत के 216 रुपये हो जाते हैं लाखों के बराबर, जानें कौन सी है यह कंट्री?
Indian Vs Iranian Currency: ईरान की मुद्रा ईरानी रियाल दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी मानी जाती है. जानिए कैसे 1 भारतीय रुपया सैकड़ों ईरानी रियाल के बराबर है और इसकी वजह क्या है.

दुनिया में अलग-अलग देशों की मुद्राओं की ताकत अलग-अलग होती है. अमेरिकी डॉलर, यूरो और ब्रिटिश पाउंड जैसी करेंसी भारतीय रुपये से कहीं ज्यादा मजबूत मानी जाती हैं. वहीं पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों की मुद्रा भारतीय रुपये के मुकाबले कमजोर है, जहां एक भारतीय रुपया तीन से चार गुना ज्यादा ताकत रखता है, लेकिन इन सबके बीच एक देश ऐसा भी है, जहां भारतीय रुपये की ताकत कई गुना ज्यादा है.
यह देश है ईरान और उसकी मुद्रा ईरानी रियाल. वाइस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिर एक भारतीय रुपया करीब 463.11 ईरानी रियाल के बराबर है. इसका मतलब यह है कि भारत के केवल 216 रुपए ईरान में 1 लाख से ज्यादा रियाल की कीमत रखते हैं. अगर उल्टा हिसाब लगाया जाए तो ईरान में 10 लाख रियाल की रकम भारत में सिर्फ 215 रुपये के बराबर रह जाती है. यही वजह है कि ईरानी रियाल को दुनिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में गिना जाता है.
ईरान की अर्थव्यवस्था
ईरानी रियाल की कमजोरी कोई नई बात नहीं है. यह मुद्रा पिछले कई दशकों से दबाव में रही है, लेकिन हाल के वर्षों में हालात और ज्यादा खराब हो गए. दिसंबर 2025 के अंत में ईरान की अर्थव्यवस्था उस वक्त गंभीर संकट में फंस गई, जब अमेरिकी डॉलर का अनौपचारिक रेट बढ़कर लगभग 14 लाख रियाल प्रति डॉलर तक पहुंच गया. यह स्तर ईरान के आर्थिक इतिहास में सबसे खराब माना गया.
ईरानी रियाल की गिरती वैल्यू
विशेषज्ञों के अनुसार, साल 2018 के बाद से अब तक ईरानी रियाल अपनी करीब 90 प्रतिशत वैल्यू खो चुका है. इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं. इन प्रतिबंधों के कारण ईरान का तेल निर्यात, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ. नतीजतन महंगाई तेजी से बढ़ी, आम लोगों की क्रय शक्ति घटी और सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को संभालना मुश्किल होता चला गया.
वर्ल्ड बैंक ने जताई चिंता
वर्ल्ड बैंक ने भी ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है. अक्टूबर 2025 में जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि साल 2025 में ईरान की जीडीपी में करीब 1.7 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है. वहीं 2026 में यह गिरावट और बढ़कर लगभग 2.8 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि ईरानी अर्थव्यवस्था पर संकट अभी खत्म नहीं हुआ है.
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