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India-US Military Exercise: इधर ट्रंप के टैरिफ पर बवाल, उधर एक साथ आईं भारत और अमेरिका की सेनाएं; अलास्का में दागे जा रहे गोले-कारतूस

अलास्का में भारत और अमेरिका के जवानों की एक्सरसाइज शुरू हो गई है. इस मिलिट्री एक्सरसाइज में यूएस के 750 और भारत के 450 जवान शामिल हो रहे हैं.

टैरिफ वॉर को लेकर भले ही भारत और अमेरिका के बीच इन दिनों तलवारें खिंची हुई हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों में दोनों देशों की सेनाओं को अपनी-अपनी सीमाओं से परे एक साथ सैन्य सहयोग की जरूरत पड़ सकती है. इसी आदर्श वाक्य के साथ अलास्का में भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच वार्षिक मिलिट्री एक्सरसाइज 'युद्ध अभ्यास 2025' (1-14 सितंबर) का आगाज हो गया है.

मंगलवार (2 सितंबर 2025) से अलास्का के फोर्ट वेनराइट मिलिट्री बेस में भारत और अमेरिका की सेनाओं के युद्धाभ्यास के दौरान पहले दिन दोनों देशों के कॉन्टिन्जंट कमांडर ने संबोधित किया. यूएस आर्मी की फर्स्ट (01) इन्फ्रेंट्री ब्रिगेट कॉम्बेट टीम (आर्टिक) के कमांडर, कर्नल क्रिस्टोफर ब्रॉलेय ने भारतीय सैन्य टुकड़ी का स्वागत करते हुए कहा कि "साथ मिलकर, हम शांति स्थापना, मानवीय प्रतिक्रिया और युद्ध अभियानों के लिए अपने कौशल को निखारते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि भविष्य की चुनौतियों के लिए सीमाओं के पार सहयोग की आवश्यकता होगी."

भारत पर ट्रंप ने लगाया 50 फीसदी टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत के खिलाफ लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ और ऑपरेशन सिंदूर की मध्यस्थता को लेकर भारत से हुए टकराव से इतर, कर्नल ब्रॉलेय ने कहा कि "जब हमारे (भारत और अमेरिका के) सैनिक कंधे से कंधा मिलाकर प्रशिक्षण लेते हैं, तो हम दुनिया को दिखाते हैं कि हमारी साझेदारी मजबूत, स्थायी है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है.”

अमेरिका के 750 और भारत के 450 जवान शामिल

इस वर्ष 'युद्ध अभ्यास' में अमेरिका की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन (इंडो पैसिफिक कमांड के अधीन) की तीन अलग-अलग बटालियन (1 बटालियन, 5 इन्फेंट्री रेजिमेंट बॉबकैट्स और 1 इन्फेंट्री ब्रिगेड कॉम्बेट टीम आर्टिक) के करीब 750 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. भारतीय सेना की मद्रास रेजीमेंट के 450 सैनिक इस वर्ष के युद्ध-अभ्यास संस्करण में हिस्सा ले रहे हैं. दोनों देशों के बीच साझा मिलिट्री एक्सरसाइज का ये 18वां संस्करण है.

भारतीय दल के कमांडर का बयान 

युद्ध अभ्यास के उद्घाटन मौके पर बोलते हुए भारतीय दल के कमांडर, ब्रिगेडियर राजीव सहारा (65वीं इन्फेंट्री ब्रिगेड) ने अमेरिका के साथ साझेदारी को बहुमूल्य बताते हुए कहा कि इस तरह की मिलिट्री एक्सरसाइज अवधारणाओं, परिष्कृत प्रक्रियाओं और सबसे महत्वपूर्ण, एक-दूसरे के अनुभव से सीखने के लिए आदर्श वातावरण बनाती हैं. ये युद्धभ्यास, एक वर्ष भारत में होता है और एक वर्ष अमेरिका. पिछले साल ये युद्धाभ्यास राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (बीकानेर) में आयोजित किया गया था. उल्लेखनीय है कि दोनों देशों की साझा मिलिट्री एक्सरसाइज को युद्ध अभ्यास (यानी युद्ध के लिए तैयारियां)  के नाम से ही जाना जाता है.

यूएस आर्मी का आधिकारिक बयान 

अमेरिका के लिए, अलास्का, आर्कटिक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख हवाई और समुद्री गलियारों से अपनी निकटता के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रशिक्षण स्थल प्रदान करता है. भारतीय सैनिकों के लिए, यह आर्कटिक अभियानों में अनुभवी अमेरिकी सैनिकों के साथ ठंडे मौसम में प्रशिक्षण का एक स्थान प्रदान करता है. युद्ध अभ्यास के आगाज पर यूएस आर्मी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अगले दो हफ्ते तक दोनों देशों की थलसेनाओं के सैनिक साझा ट्रेनिंग करेंगे ताकि इंटरऑपरेबिलिटी (अंतर-संचालन), रेडीनेस (तत्परता) और सहयोग बढ़ाया जा सके.

वर्ष 2004 में युद्ध अभ्यास की शुरुआत काउंटर इनसर्जेंसी एक्सरसाइज के साथ शुरू हुई थी, लेकिन आज ये एक ब्रिगेड-स्तर की कमांड पोस्ट और फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज में तब्दील हो गई है जिसका उद्देश्य पारंपरिक, गैर-पारंपरिक और हाइब्रिड खतरों से लड़ने के साथ-साथ आपदा राहत और मानवीय सहायता के लिए तैयार रहना है. साथ ही अमेरिका की इंडो-पैसिफिक कमांड की हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र को फ्री और ओपन रखने में क्षेत्रीय पाटनर्शिप को मजबूत करने की स्ट्रेटेजी पर आधारित है.

एक्सरसाइज में कई तरह की चीजों का इस्तेमाल

यूएस आर्मी के मुताबिक, इस बार की एक्सरसाइज में आर्टलरी (तोप) लाइव फायर एक्सरसाइज, एकेडमिक एक्सचेंज, कम्बाइंड टेक्टिकल ऑपरेशन्स और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. यह अभ्यास अमेरिकी सेना प्रशांत क्षेत्र की पाँच मुख्य प्राथमिकताओं का समर्थन करता है: अभियान, परिवर्तन, मारक क्षमता, साझेदारी और लोग। यह व्यापक अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी को भी दर्शाता है, जिसमें संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से संयुक्त अभ्यासों, रक्षा व्यापार पहलों और कार्मिक आदान-प्रदान की एक श्रृंखला शामिल है.

ये भी पढ़ें: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से 2024 तक आए लोगों को भारत में रहने की इजाजत

नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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