किसान संगठन ने की पीली मटर का आयात रोकने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
याचिकाकर्ता संगठन के लिए पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पीली मटर का आयात लगभग 35 रुपए प्रति किलो की दर से हो रहा है. उन्होंने कहा कि पीली दाल को आयात-शुल्क से मुक्त किया गया है.

पीली मटर का आयात रोकने की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. किसान महापंचायत नाम की संस्था की याचिका में कहा गया है कि दाल के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाली पीली मटर के आयात से किसानों को नुकसान हो रहा है. कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि इस मामले में आम उपभोक्ता के हितों का भी ध्यान रखना जरूरी है. अगर घरेलू उत्पादन अपर्याप्त है तो उससे दाल महंगी हो जाएगी.
याचिकाकर्ता संगठन के लिए पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पीली मटर का आयात लगभग 35 रुपए प्रति किलो की दर से हो रहा है. यह भारत में उगाई जाने वाली दालों जैसे अरहर, मूंग और उड़द पर भारी पड़ रहा है, क्योंकि इनका न्यूनतम समर्थन मूल्य 85 रुपए प्रति किलो है. कृषि मंत्रालय की विशेषज्ञ कमेटी और नीति आयोग दूसरी संस्थाओं ने भी पीली मटर का आयात रोकने की सिफारिश की है. यह भारतीय किसानों की आमदनी को प्रभावित कर उन्हें हतोत्साहित करता है.
भूषण ने कहा कि पीली दाल को आयात-शुल्क से मुक्त किया गया है. इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है. उन्हें सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, मूंग और तूर दाल को एमएसपी से भी कम पर बेचना पड़ रहा है. कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने इस साल मार्च में पीली मटर पर प्रतिबंध लगाने और दूसरी दालों पर आयात शुल्क बढ़ाने की सिफारिश की थी. इस सिफारिश को माना जाना चाहिए.
थोड़ी देर चली सुनवाई के बाद 3 जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, 'आपने आधिकारिक और जिम्मेदार संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला दिया है इसलिए हम नोटिस जारी कर रहे हैं, लेकिन हमें देखना होगा कि घरेलू उत्पादन पर्याप्त है या नहीं. अगर आयात रोक दिया गया और उत्पादन कम हुआ तो उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है.'
कोर्ट ने कहा, 'किसान दाल उगाते जरूर हैं, लेकिन वह उसे बेच देते हैं. दाल का भंडारण कोई और करता है. अगर घरेलू उत्पादन कम हुआ तो कीमतें महंगी होंगी. यह उपभोक्ताओं की समस्या की वजह बनेगा इसलिए, इस मामले में संतुलन बनाने की जरूरत है.' सुनवाई के दौरान भूषण ने कहा कि पीली मटर को ऑस्ट्रेलिया में मवेशियों को खिलाते हैं. इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या इस दाल की पौष्टिकता को लेकर कोई अध्ययन हुआ है? भूषण ने कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक यह दाल स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है.
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Source: IOCL

























