वायरल सच: क्या देश के जवानों को अपनी वर्दी खुद खरीदनी पड़ेगी?
सोशल मीडिया कह रहा है कि जो जवान देश के लिए जान देने से भी पीछे नहीं हटते उन्हें सरकार वर्दी का पैसा तक देने के लिए तैयार नहीं है.

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर हर रोज कई फोटो, वीडियो और मैसेज वायरल होते हैं. वायरल हो रहे इन फोटो, वीडियो और मैसेज के जरिए कई चौंकाने वाले दावे भी किए जाते हैं. ऐसा ही एक दावा सोशल मीडिया पर सनसनी बढ़ा रहा है. सोशल मीडिया कह रहा है कि जो जवान देश के लिए जान देने से भी पीछे नहीं हटते उन्हें सरकार वर्दी का पैसा तक देने के लिए तैयार नहीं है. दावे के मुताबिक सेना के जवानों को वर्दी के पैसे अपनी जेब से चुकाने पड़ेंगे जबकि पहले ऐसा नहीं होता था.
एक अंग्रेजी अखबार के आर्टिकल में छपी खबर के हवाले से ये दावा हुआ. जिसमें कहा गया है कि सेना में वर्दी के लिए जो बजट तय हुआ था उसमें कटौती कर दी गई. दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने ट्विटर पर लिखा, ''अगर ये सच है तो शायद सैनिक के साथ किया जा रहा सबसे क्रूर मजाक है. एक सिपाही से हम कैसे कह सकते हैं कि अपने परिवार का पेट काटकर तनख्वाह में से वर्दी खरीदो. ये सेना का अपमान है.''

एबीपी न्यूज़ ने की वायरल दावे की पड़ताल पड़ताल में पता चला कि सैनिकों को अब अपनी कुछ यूनिफॉर्म खुद खरीदनी पड़ेंगी. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि यूनिफॉर्म का पैसा उन्हें अपनी जेब से भरना होगा. दरअसल सातवें वेतन आयोग के बाद से सैनिकों को यूनिफॉर्म अलाउंस भत्ता मिलने लगा है. सेना के जवान की यूनिफॉर्म के अंदर 54 आइटम आते हैं.
जवानों को वर्दी की जगह यूनिफार्म एलाउंस इसलिए दिया गया क्योंकि ओएफबी यानि वर्दी बनाने वाली ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड से मिलने वाली वर्दी की क्वालिटी में शिकायतें आ रही थीं. इसके साथ ही देश के दूर दराज के सीमावर्ती इलाकों में वर्दी सही समय पर नहीं मिलती थी. इसके साथ सरकार ने ये तय किया है ओएफबी अब नॉन कोर जरूरतों के बजाए सेना की कोर जरूरतों पर ध्यान दे. कोर जरूरतों में गोला बारूद, हथियार, कॉम्बैट व्हीकल्स शामिल है. यूनिफॉर्म नॉन कोर है इसलिए ओएफबी कुछ वर्दियां तैयार नहीं करेगी.
पड़ताल में रक्षा मंत्रालय की तरफ से तीनों सेना प्रमुखों को भेजी गई ये चिट्ठी भी मिली. चिट्ठी के मुताबिक, ''रैंक के हिसाब से सेना के जवानों को 10 हजार का अलाउंस दिया जाएगा. यूनिफॉर्म अलाउंस जवानों के सैलरी के साथ साल में एक बार जुलाई में ही दे दिया जाएगा. यूनिफॉर्म अलाउंस भत्ते में सिर्फ बेसिक यूनिफॉर्म शामिल है. किसी भी तरह की स्पेशल यूनिफॉर्म जो सियाचिन ग्लेशियर और सबमरीन के अंदर पहनी जाती है वो पहले की तरह जवानों को दी जाती रहेगी. '' बता दें कि रक्षा बजट में कोई कटौती नहीं की गई है बल्कि 2017-18 में ये अब तक का सबसे ज्यादा रक्षा बजट है.
पड़ताल का नतीजा सेना के जवानों को जो बेसिक यूनिफॉर्म मिलती थी वो उन्हें खरीदनी होगी, जिसके लिए साल में एक बार यूनिफॉर्म अलाउंस दिया जाएगा. स्पेशल यूनिफॉर्म जवानों को पहली की तरह मिलती रहेंगी. जिसमें कॉम्बैट यूनिफॉर्म और कॉम्बैट जूते शामिल है क्योंकि सैनिक ड्यूटी पर कॉम्बैट यूनिफॉर्म ज्यादा पहनते हैं जब वो सीमा पर या फिर देश के अशांत इलाकों में होते हैं.

हमारी पड़ताल में जवानों के अपनी जेब से वर्दी खरीदने का दावा झूठा साबित हुआ है.
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Source: IOCL






















