जानें- पूर्व पीएम नेहरु के हिंदू होने पर सवाल उठाते शादी के कार्ड का सच
इलाहाबाद के संग्रहालय में जवाहर लाल नेहरु की शादी से जुड़ी कई तस्वीरों और दस्तावेजों को सहेज कर रखा गया है. नेहरु गैलरी में नेहरु की शादी का कार्ड भी था.

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर वायरल एक कार्ड के जरिए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के पंडित होने पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. वायरल मैसेज में दावा है कि शादी का कार्ड उर्दू में छापा गया है और उर्दू में छपा ये कार्ड खुद जवाहर लाल नेहरु की शादी का है. जानिए इस दावे का सच क्या है?
तस्वीर में क्या है?
तस्वीर में बाईं तरफ जवाहर लाल नेहरु और उनकी पत्नी कमला नेहरु की तस्वीर होने का दावा किया जा रहा है. तो दाईं तरफ लिखी इबारत के बारे में दावा है कि वो उर्दू में छपा शादी का दावतनामा है. तस्वीर में नीचे लिखा है, ‘’नेहरू की शादी का कार्ड, न गणेश, न विष्णु, न ओम और सबकुछ उर्दू में. कहने को नेहरु पंडित थे.’’ इस कार्ड को लोग फेसबुक से लेकर वॉट्सएप तक शेयर कर रहे हैं.
कार्ड में छपा है नेहरू जी की बारात का न्यौता
कार्ड में क्या लिखा है इसका जवाब उर्दू-फारसी के शायर और जानकार इतरत नकवी ने दिया, उन्होंने बताया, ‘’कार्ड में नेहरू जी की बारात का न्यौता छपा है. बारातियों को 7 फरवरी सन 1916 को शाम 4 बजे बारात में शामिल होने का न्योता दिया गया था.’’ कार्ड की भाषा उर्दू नहीं बल्कि फारसी है पर हां लिपि अरबी है जिसमें उर्दू भी लिखी जाती है. सोशल मीडिया पर वायरल अधूरा कार्ड जवाहर लाल नेहरु की शादी से ही जुड़ा हुआ ही है.
फारसी का चलन देश के शहरी रईसों अदालत और सरकारी काम काज में ज्यादा था लिहाजा बड़े लोगों के न्यौते फारसी भाषा में छपते थे. फारसी का इस्तेमाल गर्व का विषय होता था. हिन्दी का चलन आज के जितना पहले नहीं था.
कार्ड का पूरा हिस्सा क्या है?
इलाहाबाद म्यूजियम के डायरेक्टर डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि संग्रहालय में जवाहर लाल नेहरु की शादी से जुड़ी कई तस्वीरों और दस्तावेजों को सहेज कर रखा गया है. नेहरु गैलरी में नेहरु की शादी का कार्ड भी था. फारसी भाषा में छपे सभी निमंत्रण पत्र जवाहर लाल नेहरू की शादी में मेहमानों को बुलावा भेजने के लिए छापे गए थे. कार्ड के तीन अलग-अलग हिस्से यहां संजोए गए हैं.
शादी के न्योते के लिए छापे गए थे तीन तरह के कार्ड
असल में शादी का न्योता देने के लिए तीन अलग अलग कार्ड छापे गए थे. एक में 7 फरवरी 1916 को बारात में शामिल होने का न्योता था. दूसरा कार्ड शादी के बाद रिसेप्शन के लिए छापा गया था और तीसरा पांच फरवरी 1916 में शादी से पहले आयोजित होने वाली दावत का था. पूर्व प्रधानमंत्री नेहरु की शादी के कार्ड सिर्फ फारसी में ही नहीं छापे गए थे. ये कार्ड अंग्रेजी भाषा में भी छापे गए थे.
डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया, ‘’जवाहर लाल नेहरू की शादी के कार्ड अंग्रेजी और फारसी भाषा में हैं. कार्ड के मुताबिक 7 फरवरी 1916 को दिल्ली में शादी हुई थी. शादी का रिसेप्शन 10 मार्च 1916 में इलाहाबाद में हुआ था.’’
नेहरू जी के पंडित होने पर उठाए जा रहे सवाल सच नहीं
जानकारों से बातचीत के आधार पर पड़ताल में पता चला कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की शादी के कार्ड दो भाषाओं यानि फारसी और अंग्रेजी में छापे गए थे. शादी के अलग-अलग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तीन अलग कार्ड छापे गए थे.
इस तरह से पड़ताल के दौरान हमें इलाहाबाद संग्रहालय में जो दस्तावेज मिले उनमें कहीं भी विष्णु, गणेश और ऊं लिखा नहीं मिला. इस तरह से वायरल मैसेज में इस्तेमाल की गयी तस्वीर सच्ची है पर वायरल मैसेज में इस आधार पर नेहरू जी के पंडित होने पर उठाए जा रहे सवाल को सच नहीं कहा जा सकता है.

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