मजहब अलग है, इंसानियत एक! तेलंगाना में मुस्लिम शख्स ने हिंदू स्वामी अयप्पा के भक्तों को खिलाया भोज
तेलंगाना से एक धार्मिक सद्भावना से जुड़ी और मिसाल पेश करती खबर आई है. यहां मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति ने हिंदू धर्म के स्वामी के भक्तों के लिए भोज का आयोजन किया.

तेलंगाना के जगत्याल जिले से सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे की एक अनूठी मिसाल सामने आई है, जिसने समाज में सकारात्मक संदेश दिया है. यहां मेटपल्ली क्षेत्र में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपने घर पर हिंदू धर्म के अयप्पा स्वामी के भक्तों के लिए भोज का आयोजन किया. इस दौरान धर्म की सीमाएं टूटती हुई नजर आईं और इंसानियत ने जीत हासिल की.
मामला मेटपल्ली का है, जहां निवासी कुतुबुद्दीन पाशा ने क्षेत्र में पदयात्रा पर निकले अयप्पा स्वामी के भक्तों की सेवा का बीड़ा उठाया. उन्होंने न सिर्फ इन तीर्थयात्रियों के लिए अपने आवास पर भोज की पूरी व्यवस्था की, बल्कि उनके साथ प्यार और सम्मान का व्यवहार भी किया. आयोजन के दौरान पाशा ने मौजूद नौजवानों को संबोधित करते हुए एक बड़ा और प्रेरणादायक संदेश दिया.
'युवाओं को मिल जुलकर साथ रहना चाहिए'
कुतुबुद्दीन पाशा ने कहा, 'मजहब अलग हो सकता है, लेकिन इंसानियत एक है.' उन्होंने युवाओं पर जोर देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को जाति, धर्म और फिरकावाद की बाड़ों से ऊपर उठकर एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए. उनका मानना है कि सच्चा धर्म वही है, जो दूसरे की भूख मिटाए और प्यार बांटे.
पाशा के सम्मान से अभिभूत नजर आए अयप्पा स्वामी
पाशा के इस प्यार, सम्मान और सेवा भाव से आयप्पा स्वामी के भक्त गहरे प्रभावित हुए. भक्तों ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कुतुबुद्दीन पाशा को शाल और फूलों से सम्मानित किया और उनके इस बड़े दिल के लिए आभार व्यक्त किया. इस मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने भी इस पल को साक्षी बनाकर साम्प्रदायिक सद्भाव की अहमियत को महसूस किया. यह भाईचारा साबित करता है कि मानवता किसी भी धर्म या सीमा से ऊपर है और सच्चा भारत वहीं है, जहां लोग एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















