'चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ याचिकाकर्ता पर लगाया जुर्माना
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि चार सप्ताह के अंदर उच्चतम न्यायालय कानूनी सहायता समिति को जुर्माने का भुगतान किया जाए.

Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) के लिए नामांकन पत्र (Nomination Papers) दाखिल करने के मुद्दे से संबंधित एक याचिका (Petition) को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव लड़ने का अधिकार न तो मौलिक और न ही ‘कॉमन लॉ’ अधिकार है. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ‘कॉमन लॉ’ अधिकार व्यक्तिगत अधिकार हैं जो न्यायाधीश द्वारा बनाए गए कानून से आते हैं, न कि औपचारिक रूप से विधायिका द्वारा पारित कानून नहीं होते. इसके साथ ही न्यायालय ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.
न्यायालय ने कहा कि कोई व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि उसे चुनाव लड़ने का अधिकार है. उसने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 (चुनाव आचरण नियम, 1961 के साथ पढ़ें) में कहा गया है कि नामांकन प्रपत्र भरते समय उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव किया जाना है.
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) के 10 जून के एक आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. दिल्ली हाई कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव, 2022 के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी तय करने से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया था.
याचिकाकर्ता ने कहा था कि 21 जून 2022 से एक अगस्त 2022 के बीच सेवानिवृत्त होने वाले राज्यसभा सदस्यों की सीट को भरने के लिए चुनाव की खातिर 12 मई, 2022 को अधिसूचना जारी की गई थी. नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 31 मई थी.
याचिकाकर्ता ने दी ये दलील
याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने नामांकन पत्र लिया था, लेकिन उनके नाम का प्रस्ताव करने वाले उचित प्रस्तावक के बिना नामांकन दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि प्रस्तावक के बिना उनकी उम्मीदवारी स्वीकार नहीं की गई, जिससे उनके भाषण और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ था.
सुप्रीम कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि चार सप्ताह के अंदर उच्चतम न्यायालय कानूनी सहायता समिति को जुर्माने का भुगतान किया जाए.
इसे भी पढ़ेंः-
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















