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सहारनपुर मस्जिद टूटने पर भड़के अरशद मदनी! बोले- 'संविधान और समान कानून...'

सहारनपुर कलेक्ट्रेट की प्राचीन मस्जिद तोड़े जाने पर अरशद मदनी ने सवाल उठाए. उन्होंने संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता, पुराने रिकॉर्ड और समान कानून लागू करने की मांग की.

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक प्राचीन मस्जिद को तोड़े जाने के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे बेहद दुखद बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इस घटना से संविधान, कानून और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं.

मदनी ने कहा कि अगर देश में कानून सभी लोगों और समुदायों के लिए बराबर है तो उसके इस्तेमाल में अलग-अलग मापदंड नहीं होने चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि बुलडोजर की कार्रवाई कई मामलों में न्याय से ज्यादा बदले और भेदभाव की राजनीति जैसी दिखाई देने लगी है.

मस्जिद के रिकॉर्ड और जमीन को लेकर क्या दावा है?

अरशद मदनी ने अपने बयान में दावा किया कि संबंधित मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है और उसका वक्फ नंबर 451 है. उन्होंने यह भी कहा कि पुराने जमीन रिकॉर्ड में याकूब खान और वहीद खान के नाम दर्ज बताए जाते हैं. मदनी के मुताबिक, मस्जिद कमेटी ने अदालत के सामने 1911 से जुड़े दस्तावेज, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेख भी पेश किए थे. उनका कहना है कि इतने पुराने दस्तावेजों और कानूनी दावों के बावजूद मस्जिद को गिराए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है. हालांकि, इन रिकॉर्ड और कानूनी दावों की अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी.

प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का भी किया जिक्र

अरशद मदनी ने अपने बयान में 1991 के Places of Worship Act का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह कानून अभी भी लागू है. साथ ही उन्होंने नए वक्फ कानून में ‘वक्फ बाई यूजर’ से जुड़े प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े पुराने इस्तेमाल और रिकॉर्ड को भी कानूनी प्रक्रिया में महत्व दिया जाना चाहिए. उनका तर्क है कि किसी धार्मिक स्थल को लेकर विवाद होने पर कार्रवाई से पहले उपलब्ध दस्तावेजों और कानूनी दावों की पूरी तरह जांच होनी चाहिए.

अतिक्रमण पर कार्रवाई हो तो नियम सभी के लिए बराबर हों

मदनी ने अपने बयान में यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण कार्रवाई का आधार है तो यही नियम हर धर्म और समुदाय के धार्मिक निर्माण पर समान रूप से लागू होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन, सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय से मौजूद किसी भी धार्मिक निर्माण के मामले में प्रशासन को एक जैसे नियम अपनाने चाहिए. उनके मुताबिक, किसी एक समुदाय के धार्मिक स्थल पर ज्यादा सख्ती और दूसरे मामलों में अलग रवैया समान न्याय की भावना पर सवाल खड़ा कर सकता है.

'समान न्याय चाहते हैं, कोई विशेष रियायत नहीं'

जमीयत अध्यक्ष ने कहा कि भारत सभी धर्मों के लोगों का साझा देश है और संविधान किसी नागरिक को दूसरे से कम या ज्यादा अधिकार नहीं देता. उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समेत सभी समुदायों के लिए समान संवैधानिक अधिकारों की बात कही. मदनी ने कहा कि उनकी मांग किसी विशेष रियायत की नहीं बल्कि समान न्याय की है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कानून सभी धार्मिक स्थलों के लिए समान है तो उसके लागू होने का तरीका भी सभी के लिए एक जैसा क्यों नहीं होना चाहिए.

About the author सौरव कुमार

4 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं. साल 2022 से एबीपी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेस्क की भी जिम्मेदारी संभालते हैं. सेंट्रल यूनिर्वसिटी ऑफ साउथ बिहार से 2022 में पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की. राजनीति, चुनाव, सामाजिक विषयों और साहित्य में रुचि है. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर जोर देते हैं. राजनीति से जुड़ी खबरों पर लगातार लिख रहे हैं

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