RSS के सरकार्यवाह होसबाले का सरकार को सुझाव, 'पाकिस्तान के साथ संवाद का रास्ता खुला रहना चाहिए'
RSS Dattatreya Hosabale Pakistan: दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि किसी भी देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करना आवश्यक है और मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार (12 मई 2026) को कहा कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध को तोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम लोगों के बीच आपसी संपर्क है और संवाद के लिए हमेशा रास्ता खुला रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है और अब समय आ गया है कि नागरिक समाज नेतृत्व करे.
बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए: आरएसएस
आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, ‘किसी भी देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करना आवश्यक है और मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए, लेकिन साथ ही हमें अपने दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए. हमें हमेशा उनसे संवाद के लिए तैयार रहना चाहिए.’ उन्होंने दोनों देशों के बीच गतिरोध को तोड़ने में लोगों के बीच आपसी संपर्क को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसे अब और अधिक से अधिक आजमाया जाना चाहिए.
हालांकि सरकार पारंपरिक राजनयिक चैनलों से इतर ‘ट्रैक टू’ कूटनीति पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन विपक्षी नेताओं सहित कई बुद्धिजीवियों ने लंबे समय से नागरिक समाज की भागीदारी की वकालत की है. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यही एक उम्मीद है, क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वास है कि अंततः नागरिक समाज के रिश्ते ही काम आएंगे. क्योंकि हमारे बीच सांस्कृतिक संबंध हैं और हम कभी एक राष्ट्र रहे हैं इसलिए, इस पर जोर देना होगा.’
26/11, पहलगाम आतंकी हमले का किया जिक्र
उनसे पूछा गया कि भारत को पाकिस्तान और उसके आतंकवाद को लगातार प्रायोजित करने के रवैये से कैसे निपटना चाहिए. उन्होंने 26/11, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों का हवाला देते हुए कहा, ‘देखिए, (कूटनीतिक रूप से) हर संभव प्रयास किया जा चुका है, लेकिन पाकिस्तान लगातार छोटी-छोटी उकसावे वाली हरकतें करता रहता है.’ उन्होंने कहा कि व्यापार और वाणिज्य, वीजा जारी करना बंद नहीं होना चाहिए क्योंकि संवाद के लिए हमेशा एक खिड़की (खुली) रहनी चाहिए.
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि इसी वजह से कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखा गया है. उन्होंने कहा कि वहां के शिक्षाविदों, खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सामुदायिक नेताओं को आगे आना चाहिए, क्योंकि उनके राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में भारत के प्रति कुछ दूरी और नकारात्मकता विकसित हो गई है.
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Source: IOCL


























