PFI के पूर्व मुखिया अबूबकर को नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत! खराब स्वास्थ्य की बात पर मांगी थी जमानत
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की रिपोर्ट देखने के बाद ऐसा नहीं लगता कि अबूबकर को इलाज के लिए जमानत देने की जरूरत है. दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका मेडिकल हुआ था.

Supreme Court News: पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व मुखिया ई. अबूबकर को जमानत पर रिहा करने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर है. देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में प्रतिबंधित PFI के मुख्य नेताओं में से एक अबूबकर ने बीमारियों का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के एम्स अस्पताल में उसकी मेडिकल जांच का आदेश दिया था. अब एम्स की रिपोर्ट को देखने के बाद कोर्ट ने उसे रिहा करने से मना कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस एमएम सुंदरेश और राजेश बिंदल की बेंच ने कहा है कि डॉक्टरों की रिपोर्ट देखने के बाद ऐसा नहीं लगता कि याचिकाकर्ता को इलाज के लिए जमानत देने की जरूरत है. अबूबकर के लिए पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने उसे घर पर नजरबंद रखने का प्रस्ताव दिया, लेकिन कोर्ट ने इससे भी मना कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर भविष्य में स्वास्थ्य से जुड़ी कोई बड़ी समस्या सामने आए तो वह जमानत के लिए निचली अदालत में याचिका दाखिल कर सकता है.
क्या है PFI?
जांच एजेंसियों का कहना है कि PFI पहले से प्रतिबंधित संगठन SIMI (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) का बदला हुआ रूप है. NIA ने अपनी जांच के बाद यह आरोप लगाया था कि PFI भारत मे 2047 तक गज़वा-ए-हिंद के मकसद से काम के रहा था. उसका लक्ष्य लोकतांत्रिक सरकार को भंग कर भारत में शरिया शासन स्थापित करना था. उसके संबंध जमात उद दावा मुजाहिदीन बांग्लादेश और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) से भी थे. भारत में कई हिंसक गतिविधियों के पीछे PFI का हाथ होने का आरोप एजेंसियों ने लगाया. PFI पर 2022 में UAPA कानून के तहत 5 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था.
अबूबकर पर आरोप
22 सितंबर 2022 को गिरफ्तार अबूबकर पर विशेष कैंप लगा कर युवाओं को गजवा-ए-हिंद के लिए भड़काने का आरोप है. जांच एजेंसियों का कहना है कि उसके ऐसे कार्यक्रमों में मुस्लिम युवाओं को भारत में इस्लाम का शासन लाने के लिए खूनखराबा करने के लिए तैयार रहने को कहा जाता था. युवाओं को बकायदा शारीरिक ट्रेनिंग देकर जिहाद के लिए तैयार भी किया जाता था. अबूबकर खुद कई आतंकियों से सीधे संपर्क में था.
खराब सेहत का दावा
आतंक निरोधक कानून के तहत आरोपी अबूबकर को मई, 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत देने से मना कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट में उसने दलील दी थी कि उसका पहले कैंसर का ऑपरेशन हो चुका है. अभी वह पार्किंसन और डायबिटीज का मरीज है. उसकी उम्र 70 से अधिक है. उसे जमानत मिलनी चाहिए. इसका विरोध करते हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि जेल में रहने के दौरान याचिकाकर्ता को 40 बार एम्स में लाया गया है. उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है. इन दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने अबूबकर की एम्स में स्वास्थ्य जांच का आदेश दिया था.
Source: IOCL






















