ब्रिक्स के संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति बनी, भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है. BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति बन गई है. इसको लेकर गहन बातचीत 4 बजे सुबह तक जारी रही.

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का दिल्ली में आगाज हो गया है. इस बीच भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है. सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने को लेकर सहमति बन गई है. इस समझौते तक पहुंचने के लिए BRICS देशों के बीच देर रात तक लंबी और गहन बातचीत चली. चर्चा सुबह करीब 4 बजे तक जारी रही संयुक्त बयान आज जारी किए जाने की तैयारी है. यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब BRICS के सदस्य देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है.
BRICS के भीतर रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का संघर्ष और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर सभी सदस्य देशों की सोच एक जैसी नहीं है. बातचीत के दौरान इन मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आए. भारत ने अध्यक्ष देश के तौर पर अलग-अलग पक्षों के बीच बातचीत जारी रखी और साझा सहमति बनाने की कोशिश की. इसका मकसद यह था कि किसी मुद्दे पर मतभेद के कारण समूह की पूरी प्रक्रिया प्रभावित न हो.
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ईरान, सऊदी अरब और UAE के बीच संतुलन चुनौती
इस बार BRICS में पश्चिम एशिया के तीन महत्वपूर्ण देश ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं. इन देशों के बीच कई क्षेत्रीय और रणनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग रुख रहा है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच इन देशों को एक साझा बयान के लिए साथ लाना भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी. इसके बावजूद बातचीत का रास्ता खुला रहा और सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश जारी रही.
भारत की अध्यक्षता में बनी सहमति
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. अध्यक्ष देश के तौर पर भारत की जिम्मेदारी केवल बैठकों की मेजबानी तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग सदस्य देशों के हितों के बीच संतुलन बनाना भी महत्वपूर्ण है. संयुक्त बयान पर सहमति को इसी नजरिए से भारत की कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. अलग-अलग भू-राजनीतिक परिस्थितियों वाले देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाते हुए भारत ने साझा दस्तावेज पर सहमति का रास्ता तैयार किया. संयुक्त बयान पर सहमति BRICS की एकजुटता के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे यह संकेत मिलता है कि सदस्य देशों के बीच गंभीर मतभेद होने के बावजूद वे साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर साथ आने की कोशिश कर सकते हैं.
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